Breaking News

Recent Posts

मैं सुखी हूँ  – (व्यंग्य ) – @उदय मोहन पाठक

मैं सुखी हूँ

मैं सुखी हूँ  -(व्यंग्य ) विवाह से पूर्व मैं छात्र जीवन के सुख का आनंद ले रहा था। स्वयं भोजन पकाना, कपड़े धोना, झाड़ू लगाना आदि आदि कार्यों के अतिरिक्त स्वाध्याय में लगा रहता था। प्रत्येक माह पिताजी के मनी ऑर्डर की चिंता रहती थी। किसी तरह पढ़ लिख कर …

Read More »

विकास दिखना चाहिए (खरी-खरी) -उदय मोहन पाठक

विकास

चाहे परिस्थितियां जो भी हों, विकास स्वप्न के बजाय धरातल पर दिखना चाहिए। गर्मी का मौसम, बिजली और पानी की समस्या से परेशान लोग। दोनो के पीछे के कारण पानी की कमी है – जैसे डेमो और बड़े जलाशयों में पानी की कमी। बिजली कैसे पैदा हो? जलापूर्ति कैसे हो? …

Read More »

ऐसा आने वाला हो (कटाक्ष)  -उदय मोहन पाठक

उदय मोहन पाठक की कविता

ऐसा आने वाला हो  (कटाक्ष)  -उदय मोहन पाठक अब और नही हूँ, मैं कुछ भी कहने वाला। चुनावी समर अब है, अंत होने वाला सभी महारथियों का ध्यान सत्ता सुख की ओर राजतिलक की ओर लगता है कि यह प्रजातंत्र नही, राजतंत्र का सिंहासन पाना हो इन पांच सालों में …

Read More »
  • “मैं हूँ नेता “

    पहले कीमतें मैंने बढाई फिर मैंने कहा मेरे पास जादू की छड़ी नहीं है भाई जो मैंने यूँ घुमाई और खत्म हो जाएगी महंगाई मैं हूँ नेता , कुछ नही देता बस लेता ही लेता कभी मैं तुमसे नोट लेता कभी मैं तुमसे वोट लेता और बदले में लूट लेता …

    Read More »