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अंधविश्वास देश व विज्ञान के लिए जहर है

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समाज को अंधकार व अंधविश्वास के गर्त में ढकेलने का जिम्मेदार भी पुरोहित वर्ग ही है।कौटिल्य ने अपने अर्थशास्त्र में लिखा कि रात में मंदिर या सिद्ध स्थान पर कोई चमत्कारिक घटना खडी करके यात्रा या समाज मे लगवाकर उससे धन कमावे।वृक्ष में किसी मनुष्य को छिपाकर उससे राक्षस का भय दिखाकर सिद्धि का स्वांग रचावे और देशवासियों से सोने द्वारा उनका प्रतिकार करावे।भेट चढ़ाने पर सुरंग वाले कुँए में नाग दिखावे,जिसका सिर बंधा रहे।श्रद्धालुओ को छिद्र युक्त नाग की प्रतिमाएं मन्दिर में या बाभी में नाग का प्रत्यक्ष दर्शन कराए।जो श्रद्धावान हो उनके आचमन और छीटा देने के जल में कुछ मिला देवें और उनके बेहोश होने पर देवता का कोप बताये।आज के महात्मा योगी बाबा और भगवान इसी चमत्कार और धोखाधड़ी के बल पर करोड़पति बने हुए है।बंगलौर यूनिवर्सिटी के वॉइस चांसलर डॉ. नर सिन्हैया ने जब सतसई बाबा के चमत्कारों(हाथ की सफाई) की जांच के लिए पांच प्रोफेसरों का पैनल बनाया तो इन बाबा जी की हिम्मत नही पड़ी,अपने चमत्कारों को इस पैनल के सामने दिखाने की।लेकिन इस घटना से नर सिन्हैया साहब को वीसी के पद से हाथ धोना पड़ा था।इस धार्मिक धोखाधड़ी व ठग विद्या ने भारत के मानव संसाधन को वैज्ञानिक चिंतन से ध्यान हटाकर देश को अंधविश्वास की काली चादर से ढक दिया। धर्मजनित अंधविश्वास की जड़े बहुत गहरी होती है।इसमें ज्योतिष शास्त्र,हस्त रेखा शास्त्र,अंक शास्त्र,ग्रह नक्षत्र और भृगु संहिता में भी कौटिल्य की ठग विद्या व अंधविश्वास का प्रदर्शन किया गया है।अन्य देशों व विज्ञान ने इसको प्रमाडित नही किया है।धर्म से जुड़े होने के कारण लगता है कि ये बहुत ही गम्भीर ज्ञान के भंडार है।जैसे वेदो में ज्ञान की जगह अज्ञान है,उसी तरह इनको भी पढ़ने में पता चलता है कि इसमें ढोल की पोल व आम जनता को ठगने का गोरखधंधा है।अंधविश्वास इस कदर गहराई में जड़ें जमा चुका है कि सामाजिक तौर पर दबे कुचले लोगो को आगे बढ़ते देख गणेश जी लड्डू खाने की जगह दूध पीने लगे।प्रचार तो यह भी किया गया कि अमेरिका के राष्ट्रपति भवन में गणेश जी पत्थर तोड़कर प्रगट हो गए और तत्कालीन राष्ट्रपति ने उसको दूध पिलाया और पूजा अर्चना की।ये सब लिखने का मेरा यह उद्देश्य है कि अंधविश्वास देश व विज्ञान के लिए जहर है।

 

द्वारा—–दुर्गेश यादव”गुलशन” (लेखक भारतीय मूलनिवासी संगठन मध्यप्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष है।)

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