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अब एकलव्य भारी पड़ रहे हैं द्रोणाचार्यों पर…

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मुख्यधारा की मीडिया से अलग धर्म क्रांति को हवा दे रहे अंकुश गायकवाड..

बहुजनों की काबिलियत को कमतर आंका जाना भारतीय मीडिया और जनमानस की फितरत बन चुकी है। काबिलियत किसी कौम या जाति विशेष की मोहताज नहीं होती है। असली सवाल अवसर का होता है। बहुजनों में तो एकलब्य जैसी काबिलियत छुपी हुई है लेकिन यहां के द्रोणाचार्यों की बनाई हुई यह व्यवस्था उस एकलव्य को अपनी काबिलियत दिखाने के उस मंच पर पहुंचने दे तो ना। हालांकि कुछ शख्स ऐसे भी होते हैं जो द्रोणाचार्यों को धता देते हुए समाज के लिए काम करते हुए आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे ही एक शख्स का नाम है अंकुश गायकवाड। आज अंकुश गायकवाड वर्चुअल मीडिया में अपनी अच्छी पहुंचे बनाए हुए हैं और इसके साथ ही साथ बाबासाहेब अंबेडकर और तथागत गौतम बुद्ध के विचारधारा पर चलते हुए बहुजन समाज को  संगठित करते रहते हैं।

कौन है अंकुश गायकवाड़? 

महाराष्ट्र के रायगड जिले के खांबवली नामक ग्राम मैं जन्मे अंकुश गायकवाड़ का इतिहास संघर्षों का इतिहास रहा हुआ है। अंकुश जब छठवीं में पढ़ते थे तभी इनके पिता जी का परिनिर्वाण हो गया। अब अंकुश को पालने की जिम्मेदारी इनकी मां पुष्पा गायकवाड पर आ गई। पुष्पा खुद ज्यादा पढीलिखी ना होते हुए भी अंकुश को पढ़ाती लिखाती रही। अंकुश ने बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर) की पढ़ाई की है। आज MCA की पढ़ाई कर रहे हैं। अंकुश बताते हैं कि उनके साथ स्कूलों में बहुत जाति भेदभाव हुआ है। जातीय भेदभाव और उत्पीड़न से तंग होकर ब्राह्मणवादी व्यवस्था से डरने के बजाए लड़ना शुरू कर देते हैं। कई बार तो सवर्ण समाज के लोग उन्हें धमकी भी देते हैं लेकिन जिसकी रगों में बाबा साहब का खून दौड़े वह हार मानने वाला कहां। अंततः वह मिशन में लगे हुए हैं।

अंकुश का लक्ष्य क्या है?

अंकुश व्यवसाय के रूप में वेबसाइट तथा साॅफ्टवेअर डेवलपिंग का बिज़नस चलाते हैं। और साथ ही साथ वह बुद्धिज़्म टाइम्स (Buddhism TIMES) नाम से एक एनजीओ स्थापित किए हुए हैं। बुद्धिज़्म टाइम्स आज तथागत गौतम बुद्ध के विचारधारा को आगे बढ़ाते हुए धम्म क्रांति के चक्र को गतिमान बनाए रखने में अपना बहुमूल्य योगदान दे रहा है। क्योंकि अंकुश गायकवाड साॅफ्टवेअर तथा वेबसाइट क्रिएटर एवं अन्य ऑनलाइन इन्टरनेट इनोवेशन की दुनिया से जुड़े हुए हैं तो वह सोशल मीडिया का अच्छी तरीके से इस्तेमाल करके मेनस्ट्रीम मीडिया का एक तोड़ खड़ा करने में बहुजन समाज के लोगों की मदद करते रहते हैं। अंकुश गायकवाड जैसे युवा पीढ़ी की सोच इस बात का गवाह है कि अब बहुजन आंदोलन को कोई भी नहीं रोक सकता है।

रिपोर्ट- सूरज कुमार बौद्ध

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