Breaking News
Home / न्यूज़ पटल / एडिटोरियल / आवाम की आजादी…
kavita

आवाम की आजादी…

Spread the love

हम आवाम को आजाद कैसे मान लें,
सिंहासन पर सीमित परिवार का दौर है।
गरीबों को दो जून भोजन नसीब नहीं,
GDP बढ़ा रही सरकार का दौर है।
हर वस्तु की “कीमत” है इस जमाने में,
मूल्य नहीं समझती यह बाजार का दौर है।
विकास विकास करके जमीन हथिया रहे,
पूंजीपतियों की ग़ुलाम हुक़्मरान का दौर है।
अविष्कार आवश्यकता की जननी बन गई,
अनिश्चित दिशा अहंकार का दौर है।
कम पढ़ा तो काम छोड़ा ढेर पढ़ा तो गाँव,
अकुशल शिक्षा बेरोजगार का दौर है।
ग्राम पंचायत से PMO तक गौर कीजिए,
आप यही कहेंगे भ्रष्टाचार का दौर है।
एेसी व्यवस्था का विरोध करो यारों,
जहाँ तुच्छ राजनितिक अहंकार का दौर है।

सुरज कुमार बौद्ध
(लेखक भारतीय मूलनिवासी सगंठन के राष्ट्रीय महासचिव हैं)

This post was written by sanjay dash.

The views expressed here belong to the author and do not necessarily reflect our views and opinions.

About sanjay dash

Check Also

कोलेबिरा उपचुनाव में एक सशक्त महिला नेतृत्व की जरूरत

कोलेबिरा उपचुनाव में एक सशक्त महिला नेतृत्व की जरूरत

Spread the love4Sharesकोलेबिरा उपचुनाव की सरगर्मी ने यहाँ की जनता में एक नए उम्मीद को …