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कालिख से पुते हुए सभ्य चेहरे

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तीसमार खाँन एक स्पेशल मिसन की पूर्ति के लिए घोटाले द्वीप के दौरे पर निकले थे।वहाँ पहुँचने पर लोगों ने पूरे तामझाम से स्वाग़त किया। पहले दिन वे घोटाले द्वीप के बाजार निकले,देखा लोग विभिन्न प्रकार के मुखौटे बेच रहे थे।सभी मुखौटे काले थे।दुकानदार चिल्ला-चिल्ला कर बेच रहे थे,”घोटाला ले लो-घोटाला ले लो,100₹ में मुँह काला ले ले।तिसमार खाँन जब यह जानने के लिए एक दुकानदार से पूछे कि यह सब किस तरह का मुखौटा है तो वह तुरंत जान गया कि यह विदेशी है।फिर उसने विस्तार से बताते हुए कहा कि यहाँ जिनका मुँह जितना काला होता है वे उतने सभ्य माने जाते हैं,जो जितना बड़ा घोटालेबाज़ होता है उसे उतनी सम्मान की नज़र से देखा जाता।वैसे लोग,जो अभी घोटाला सीख रहे हैं तो वैसे लोगों के लिए अलग-अलग कीमत के मुखौटे हैं,100₹ -100000₹ तक के मुखौटे इस बाजार में बिकते हैं।मंत्री लोगों के लिए दूसरा बाजार है जहाँ से वे लाख ₹ तक के मुखौटे खरीदकर पहनते हैं तथा उत्तम सम्मान पाते हैं। घोटाला द्वीप के प्रधान साहब जो मुखौटा लगाए हैं वह दस करोड़ का है जो हिंदुस्तान से आयात किया गया है।वहाँ कुछ लोग ऐसे भी थे जो मुखौटा ना लेकर स्थाई पेंट ही करवा ले रहे थे और गर्व से मुँह चमकाते हुवे आगे बढ़ जाते थे।

पास में ही एक बस्ती थी जहाँ के लोगों को लोग ईमानदार कह गाली देते थे,पूछने पर पता चला कि वे लोग मुखौटे का प्रयोग नहीं करते हैं इसलिए अभी काफी पिछड़े हैं।उनमें से कुछ लोग ऐसे भी थे जो इनदिनों मुखौटा पहनना प्रारंभ किए थे उनकी प्रगति हो रही थी। खान साहब जब आगे बढ़े तो एक और अज़ीब वाक्या उनके साथ हुई वे देखे कि दो काले मुँहवाले आपस में झगड़ रहे थे और एक दूसरे को गाली देते हुवे कह रहे थे ईमानदार कहीं का देख तेरे मुँह पर अभी भी सफेदी है,जेल पहले मैं जाऊंगा मैं तुझसे बड़ा घोटालेबाज़ हूँ। मैं सोंच में पड़ गया कि पहले जेल मैं जाऊंगा इसके लिए ये झगड़ रहे हैं,पास गुजरते हुवे एक काले मुँहवाले से मैने पूछा कि भई ये क्या माज़रा है? तो उस काले मुँहवाले ने कहा कि लगता है आप यहाँ नए हैं इसिलिए ऐसा प्रश्न कर रहे हैं यहाँ जेल जाना गर्व की बात है ।खाँन साहब ने झट से पूछ दिया थोड़ा विस्तार से बताएं तो उसने आगे बताते हुवे कहा कि यहाँ जो जेल जाते हैं उसके बाद वे मंत्रीबनकर ही निकलते है,जेल जाने से चेहरे पर जो थोड़ी-मोड़ी सफेदी बची रहती है वह समाप्त होकर पूरी तरह से काली हो जाती है यो दोनों ठीकेदार हैं जेस जाने के बाद स्मगलर बनेंगे तथा अगर पुन: जेल जाएंगे तो इनका प्रमोशन होगा और वे मंत्री चुने जाएंगे,और इसी तरह एक दिन देश के प्रधान बन जाएंगे। लड़ाई करने के दौरान वह कह रहा था कि मैंने जो स्कूल का ठेका लिया था वह एक सप्ताह में ही गिर गई इस तरह से मैं घोटालेबाज़ हुवा तो प्रमोशन का हकदार मैं हूँ अत: जेल मैं जाऊंगा,उसपर दूसरा बोल उठा तुझे क्या पता मैं जो पूल बना रहा था वह कभी बना ही नहीं क्योंकि एक पाया आज तैयार करता कल वह गिर जाता फिर दूसरा तैयार करता कल फिर वह भी गिर जाता इस तरह से मैं पाया बनाते हुवे नदी पार कर गया पर पूल बनी ही नहीं तो बता बड़ा घोटालेबाज कौन हुवा मैं या तू?

खांन साहब आगे बढ़े देखा स्कूल में बच्चे वहाँ का राष्ट्रगाण गा रहे थे
“घोटाला,घोटाला,घोटाला किए जा
पचाना जो हो आता तो आगे बढ़े जा”
देखा सभी बच्चों के स्कूल पोशाक काले थे
चेहरे काले सिर्फ दाँत ही सफेद लग रहे थे,शिक्षक से पूछने पर पता चला कि यहाँ जब बच्चे मैट्रिक फैल होते है तब उनके दाँतों को स्थाई रूप से काले कर दिए जाते हैं जो तब उन्हें महाविद्यालय में प्रवेश मिलती है।

इतना कुछ देखते-देखते खाँन साहब की नींद खुल चुकी थी वे पसीना से तरबतर थे,उठे और सीधे आईने की तरफ दौड़े देखा उनके चेहरे पर कोई कालिख़ तो नहीं है।

 

महेश”अमन”
रंगकर्मी
18/07/17

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