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गाँव बाला महुआ की त्रासदी

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रामगढ : रुना मिश्रा शुक्ला : जिले के मांडू प्रखंड अंतर्गत बसंतपुर पंचायत का छोटा गाँव बाला महुआ। गाँव की आबादी 800 । गाँव  के चारो ओर जंगल और उसके आगे हरा-भरा झुमरा पहाड़। रामगढ़ मुख्यालय से बसंतपुर की दूरी मात्र 30 किमी और बसंतपुर से बाला महुआ गाँव  की दूरी महज 5 किमी है। विकास से कोसों दूर है यह गाँव, हो भी कैसे, खूबसूरत वादियों से घिरे इस गाँव में प्रशासनिक महकमा तो दूर, कभी कोई सांसद या विधायक ने इस गाँव की ओर रूख नहीं किया। वहीं आज तक जिप अध्यक्ष से लेकर जिप उपाध्यक्ष व मांडू प्रमुख तक इस गाँवमें नहीं पहुंच सके हैं। गाँव में आज तक बिजली नही पहुंच पाई है। ग्रामीणों को इस 21वीं शदी के नुक्लियर पावर के यूग में भी ढिबरी जलाकर रात काटनी पड़ती है। बिजली के अभाव के कारण बच्चों की पढ़ाई भी बाधित होती है।

इस अदिवासी बहुल गाँव  में सिर्फ एक प्राथमिक विद्यालय है जहाँ से पांचवीं क्लास पास होने पर गाँव के बच्चे पांच किमी पैदल दूरी तय कर बसंतपुर पढ़ने जाते हैं। गाँव में एक भी आंगनबाड़ी केंद्र नहीं है, जिससे छोटे-छोटे बच्चों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। वहीं आजादी के 69 साल बाद भी गाँव को आज तक पक्की तो क्या कच्ची सड़क तक नसीब नहीं हुई है। लोग पगडंडी के सहारे आज भी पैदल ही बसंतपुर पहुंचते हैं। बीमार होने पर खाट पर लादकर बसंतपुर मरीजों को पहुंचाते हैं। जहां से घाटो की ओर लाया जाता है। गाँव में स्वास्थ्य केंद्र नहीं है, जिसके कारण कई ग्रामीण इलाज के अभाव में दम तोड़ देते हैं। गाँव में मोटरसाइकिल तक जाने का रास्ता नहीं है। पांच किमी पैदल चलने के कारण कोई भी चिकित्सक यहां नहीं जाते हैं। गाँव में बड़े अधिकारी यहां तक कि बीडीओ या सीओ भी आज तक नही पहुंचे हैं। गाँव में आज तक सड़क या बिजली नहीं आ पाई है। आज भी लोग एकमात्र कुएं का गंदा पानी पीने को विवश हैं। एक भी हैंडपंप नहीं है।

शिक्षा : गाँव में सिर्फ एक नवप्राथमिक विद्यालय है। पांचवां तक पढ़ने के बाद बच्चे 5 किमी दूरी तय कर बसंतपुर मध्य विद्यालय जाते हैं। गाँव में कोई भी बच्ची मैट्रिक पास नहीं है। कोई भी युवा इंटर तक शिक्षा ग्रहण नहीं किया है। गरीबी व साधन विहीन गाँव होने के कारण गाँव के ज्यादातर बच्चे स्कूल नहीं जाते हैं। रोजगार के साधन के नाम पर गाँव में कुछ भी नहीं है। गाँव का कोई आदमी सरकारी या प्राइवेट कंपनी में नौकरी नहीं करता। कुछ ग्रामीण खेती-बाड़ी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। कुछ परिवार जंगल से लकड़ी लाकर बाजार में बेचकर चंद पैसे कमाते हैं। गरीबी के कारण यहां के बच्चे कुपोषण के शिकार हैं। कहते हैं ग्रामीण गाँव में सुविधा के नाम पर कोई चीज नहीं है। सबसे ज्यादा परेशानी सड़क व शिक्षा की है। पगडंडी में लोगों को चलना मुश्किल हो जाता है। खासकर बच्चे तो कई बार स्कूल जाने पर गिरकर घायल हो जाते हैं। यह गाँव हमेशा ही जन प्रतिनिधियों की उपेक्षा का शिकार  रहा है। चुनाव के समय ग्रामवासी पांच किमी दूरी तय कर बसंतपुर में वोट देने कुछ उम्मीद लगाकर जाते हैं, लेकिन चुनाव के बाद सारी उम्मीदें टूट जाती हैं। ग्रामवासियों को यह सवाल हमेशा खाये जाता है कि  समस्याओं से घिरा मेरा गाँव कब विकास की ओर जाएगा ।

सरकारी विभाग से किसी प्रकार की सुविधा नहीं मिलने के कारण आज तक गाँव में बिजली, पानी, सड़क, पुल-पुलिया का निर्माण नहीं हो पाया है। कई बार जिला मुख्यालय से लेकर प्रखंड मुख्यालय तक बाला महुआ को विकास करने अनुरोध किया गया, लेकिन आज तक एक भी काम इस गाँव के लिये नहीं हो पाया। हालात यह है कि बरसात में पैदल भी बाला महुआ गाँव में पहुंचना मुश्किल हो जाता है। गाँव में आज तक बिजली नही पहुंचा। विकास को लेकर आज तक जनप्रतिनिधि लोग भी गंभीर नही हुआ, यही कारण है कि लोग अभाव की जिन्दगी जी रहे है। गाँव में इतनी गरीबी है कि कई परिवार को रात में भूखा तक सोना पड़ता है। रामगढ़ के जनप्रतिनिधी को इस मामले में विशेष रूप से ध्यान देने की आवश्यकता है।

 

साभार : रुना मिश्रा शुक्ला

This post was written by sanjay dash.

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