Breaking News
Home / न्यूज़ पटल / गुजरात के चुनाव पर एक नजर

गुजरात के चुनाव पर एक नजर

Spread the love
  • 15
    Shares

बीजेपी गुजरात के चुनाव प्रचार में अपनी पूरी ताकत झोंक चुकी है. सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ख़ुद प्रचार का ज़िम्मा उठा लिया है. 27 नवंबर के बाद 29 नवंबर को भी वो रैलियां करेंगे.
एक दिन में प्रधानमंत्री की 4-4 रैलियां हो रही हैं. प्रधानमंत्री की रैलियां सौराष्ट्र और दक्षिण गुजरात में होनी हैं.
गुजरात में पिछले कुछ दिनों में जो हवा बनी है उस पर मोदी की रैलियों का कैसा असर होगा इस पर राजनीतिक विश्लेषक औरवरिष्ठ पत्रकार आर. के. मिश्र का नज़रिया.

फ़ौज लेकर उतर पड़े मोदी
राहुल गांधी अभी-अभी गुजरात गए थे. अब मोदी पूरा फ़ौज लेकर उतर रहे हैं. उनके सभी कैबिनेट मंत्री भी आ रहे हैं.
कांग्रेस को वहां अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है. इसकी उम्मीद पहले से थी. 9 और 14 दिसंबर को मतदान होना है ऐसे में दोनों पार्टियां अपनी पूरी ताक़त लगा देंगी.
गुजरात मोदी का गढ़ है और अगर 2017 में यहां सेंध लग गयी तो 2019 के लोकसभा चुनाव में उनके लिए मुश्किलें खड़ी हो जाएंगी. इसलिए गुजरात को जीतने के लिए साम दाम दंड भेद सभी प्रकार के जोड़ बीजेपी लगा देगी.
इसे देखते हुए सोशल मीडिया पर प्रचार हो रहा है. डर का माहौल भी बना है. सीडी आनी शुरू हुई हैं.

मुस्लिमों को भी रिझाने की तैयारी
दूसरी बात, बीजेपी इस बार चुनाव प्रचार में मौलवियों को उतार रही है. जो उत्तर प्रदेश से आ रहे हैं.
सूरत में मुस्लिम कार्यकर्ता पहले से ही उतरे हुए हैं. पहले जिन मुस्लिम वोटर्स को वो छूते तक नहीं थे इस बार उन पर भी नज़रे हैं.
ये बता रहा है कि किस तरह की स्थिति बन गई है.

मोदी की नोटबुक से ली चीज़ें
कांग्रेस ने मोदी की नोटबुक से कई चीज़ें ले ली हैं. वो आक्रामक रहे हैं. वो इंटरेक्टिव रहे हैं. उन्होंने चीज़ों पर सीधे सवाल किए हैं. उन्हें लोगों का अच्छा साथ मिला है. इसी को समझते हुए बीजेपी अब आक्रामक प्रचार करने जा रही है.
मोदी जी आएंगे तो वो अपनी तीखी भाषा में प्रहार करेंगे. बीजेपी छोटी-छोटी चीज़ों को भी पकड़ कर बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है.
सवाल काफ़ी खड़े हो गए हैं. 2015 में पाटीदारों के बिफ़रने पर बीजेपी को झटका लगा था.
मोदी को पहले ही इसका अंदाजा हो गया था. इसलिए पिछले छह महीने में उन्होंने अपने दौरे बढ़ा दिए थे. भले ही वो पहले प्रधानमंत्री के रूप में आए थे लेकिन अब वो पार्टी का प्रचार करने आए हैं.
बीजेपी को पता है कि उनकी स्थिति उतनी अच्छी नहीं है. जितने भी युवा नेता आए हैं वो उनके ख़िलाफ़ हैं. जो चीज़ें बीजेपी ने सरकार में रहते हुए की हैं उससे स्थिति और भी बदतर हुई है.

वोट काटने की राजनीति
बीजेपी का ध्यान अब विपक्ष के वोट को विभाजित करने पर केंद्रित है. इसलिए नीतीश कुमार जिनका गुजरात में कोई जनाधार नहीं है उसके भी 100 उम्मीदवार खड़े होने की बात चल रही है.
शंकर सिंह वाघेला भी ऑल इंडिया हिंदुस्तान कांग्रेस पार्टी के चुनाव चिह्न पर उतर रहे हैं. ये वोट काटने का काम करेगी. उसी तरह आम आदमी पार्टी भी वोट काटेगी. बीजेपी के भी वोट कटेंगे क्योंकि शिव सेना अपने 50 उम्मीदवार उतार रही है.
गुजरात में जेडीयू के बागी नेता छोटूभाई वसावा का अच्छा जनाधार है जो आदिवासी समुदाय के दिग्गज नेता माने जाते हैं. ये शरद यादव खेमे के माने जाते हैं.
ये वही नेता हैं जिन्होंने राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के दिग्गज नेता अहमद पटेल की हार को जीत में बदचलने में अहम भूमिका निभाई थी.
इसी के मद्देनजर कांग्रेस ने वसावा के साथ विधानसभा चुनाव में उतरने का मन बनाया है.
अब बीजेपी इस नाम के प्रत्याशी ढूंढ रही है जिनसे मतदाताओं में उलझन पैदा की जा सके और इनके वोट कटें.
यानी गुजरात चुनाव में बीजेपी को इस तरह के चुनावी हथकंडे भी आजमाने की ज़रूरत पड़ रही है.

(बीबीसी संवाददाता मानसी दाश के साथ बातचीत पर आधारित)

About Oshtimes

Check Also

सुदेश महतो

सुदेश महतो सरकार में रहकर भी सीएनटी/एसपीटी के संशोधन को रोकने में नाकाम

Spread the love6Sharesसिल्ली और गोमिया को लेकर सत्ताधारी दल भाजपा और आजसू में टकराव तय …