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ज्योतिषी : भारत में लूट मचाते ज्योतिषी ! -दुर्गेश यादव “गुलशन”

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लूट मचाते अनपढ़ ज्योतिषी

होटल के एक कमरे में घुसते ही धूप और अगरबत्ती की सुगंध नाकों में समा गई। धीमी रोशनी में होटल का वह कमरा किसी बड़े मंदिर के पूजाघर से कम नही लग रहा था। मेज पर फूलों से ढंकी मूर्तियों के साथ जल और अलग-अलग रंगों की तिलक सामग्री रखी थी। सामने कुर्सी पर बैठे ज्योतिषी की आयु लगभग 30 साल की थी। सांवले रंग के उस ज्योतिषी की आंखे करामाती थी। आने वाली महिला को अपने आंखों में सीधे देखते रहने की हिदायत देता था। बातों बातों में सब कुछ जान लेने के बाद वह संकट से उबरने के लिए पूजा कराने पर जोर देता था और ग्राहक से 100 या 200 रुपये झाड़ लेता था।

अनपढ़ ज्योतिषी के विज्ञापनों का मायाजाल हर रोज अखबारों में विज्ञापन पढ़ने को मिलते है:

 आज रीवा शहर में काशी के ज्योतिषी पहली बार पधारे है। आप के ललाट की रेखा देख कर भविष्य बताएंगे बताएंगे। स्त्री-पुरूष के हर संकट का निवारण करेगे। प्रेम में सफलता, संतान प्राप्ति, व्यापार लाभ, शादी में कामयाबी, बुरी आदतों से छुटकारा और शरीर के सफेद दाग दूर करने का उपाय बताएंगे। गुमशुदा के बारे में तो ये पलक झपकते ही बता देते है। मिले पुराना बस स्टैंड के पीछे, सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक हर मंगलवार।

 

एक और दिलचस्प विज्ञापन पर जरा गौर करे:

मानो या न मानो पर यह सच है,तंत्र, मंत्र, यंत्र तीनो तपो का समाधान दुर्गा माँ के परम भक्त,चमत्कारी सिद्ध महात्मा आप का चेहरा,हस्तरेखा, फ़ोटो देख कर दिल की बात बताते है।
विशेष नोट में ये भी लिखा रहता कि जिन लोगो का ज्योतिष और तांत्रिक विद्या पर से विश्वास उठ गया है वे अवश्य मिले।
कुछ रोजीरोटी कमाने वाले स्थानीय ज्योतिष भी इसी तरह के विज्ञापन देते है। ज्योतिषियों ने अपना भ्रमजाल इस कदर फैलाया हुआ है कि पढ़े-लिखे लोग भी उसमे आसानी से फंस जाते है।समझ मे नही आता कि आखिर क्यों लोग इस थोथे अंधविश्वास से उबर नही पा रहे है।

आओ जरा परख तो करें

एक बार इनका विज्ञापन मेरे पिताजी श्री शोभनाथ यादव को अपने ही गाँव बवंधर के एक व्यक्ति ने दिया।वो विज्ञापन जब मैंने घर मे देखा तो,मैंने प्लान बनाया इन पाखंडियो का काला सच बाहर लाने के लिए,सो मैंने पिताजी से बोला कि पिताजी आज हम लोग ज्योतिषी के पाश चल रहे है,अपनी समस्या लेकर,पिताजी भी तैयार हो गए।हम लोग ज्योतिषी के पते पर पहुँच गए। लगभग 30 वर्षीय ज्योतिषी ने कुछ देर हम दोनों से बाते की, फिर व्यक्तिगत मामला बता कर,पिताजी को बाहर खड़े रहने को कहा। बाहर उसका एक चेला खड़ा था जो ग्राहकों के आने का हिसाब रख रहा था। 200 रुपये के चढ़ावे के बाद ही उसने मेरा हाथ देखा। दक्षिण भारतीय वह ज्योतिषी हिंदी समझ नही पा रहा था, लेकिन फिर भी टूटीफूटी हिंदी बोल रहा था।कुछ देर बाद उसने पूछा “तुम क्या सवाल लेकर आये हो?”
मैंने कहा “आप तो मन की बात पढ़ सकते है। आप ही बताइए कि मैं क्या सवाल पूछने आपके पास आया हूँ?”
यह सुनकर वह दुविधा में पड़ गया। उसने अनुमान से जितनी भी बाते बताई,सारी गलत थी। होटल के नीचे ही खड़े होकर मैंने पिताजी से एक दूसरे के अनुभव बता दिए और 400 रुपये में पाखंडी की सारी चाले जान गए। बाहर कतार में लगे पढ़े लिखे लोगो को देख कर उनकी नासमझी पर हमें तरस आया।बस इसी घटना से मेरे पिताजी की आंखे खुली और वे आज एक तार्किक व्यक्ति के रूप में जाने जाते है।

एक अनुभव यह भी-

कुछ समय बाद फिर शहर में एक ज्योतिषी आया।हमने उसे भी परखने के मन बनाया।इस बार हम अपने भाभी के साथ गए। इस ज्योतिषी ने भाभी को बाहर भेज दिया। जब ज्योतिषी ने सेक्स से जुड़े सवाल पूछने शुरू किए तो मेरा पारा चढ़ गया। मेरी तेज आवाज को सुनकर भाभी भी अंदर आ गयी। हम दोनों ने उस ज्योतिषी को खूब खरी खोरी सुनाई और अपने पैसे उठाकर हम चल दिये। चूंकि बाहर ग्राहकों की लाइन लगी थी अतः वह ज्यादा कुछ बोल नही पाया।अब तक मेरी भाभी भी समझ चुकी थी।

अन्धविश्वाशी युवाओ को जागरूक होना होगा अन्यथा ज्योतिषी के हांथो ठगे जाने का मलाल उन्हें जीवन भर सताता रहेगा।


कुछ पढ़े लिखे व कुछ हालात व मजबूरी के मारे इनके पास पहुंचते है। आधुनिक कहलाने वाला युवा वर्ग शॉर्टकट के चक्कर मे सबसे ज्यादा इन ठग रूपी ज्योतिषियों के चंगुल में फँसता जाता है और ठगा जाता है।
शहर में आयोजित ज्योतिषी सम्मेलन में भी चर्चा का विषय रहा कि असज के ज्योतिषियों के काम करने का तरीका गलत है, क्योंकि कई ज्योतिषियों द्वारा फैलाये जा रहे भ्रम से अब लोगो ने ज्योतिष शास्त्र पर विश्वास करना कम कर दिया है और इससे बड़े दुकानदारों की दुकानदारी भी प्रभावित हो रही है।

जरा सोचिए–

क्या खून पसीने की कमाई इन अज्ञानी ज्योतिषियों को सौंपने का दर्द आपको नही होता?यदि होता है तो आप ये सब कब से छोड़ेंगे?

ज्योतिषी
दुर्गेश यादव”गुलशन” लूट मचाते ज्योतिषी

 

द्वारा- दुर्गेश यादव”गुलशन”
(लेखक भारतीय मूलनिवासी संगठन मध्यप्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष है।)

 

This post was written by durgesh yadav gulshan.

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About durgesh yadav gulshan

हर जोर जुल्म के टक्कर में संघर्ष हमारा नारा है। मैं दुर्गेश यादव "गुलशन" पूर्ण रूप से भारतीय मूलनिवासियो को उनको उनका हक और अधिकार दिलाने के लिए समर्पित हूँ। संपर्क:बवंधर,जवा,रीवा, मध्यप्रदेश मो.9118489349,7581038809

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