आधी-आबादीसूरज कुमार बौद्ध

झारखंड में एक बेटी की मौत नहीं बल्कि रोटी की मौत: सूरज कुमार बौद्ध

एक बेटी की मौत नहीं बल्कि रोटी की मौत
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कुछ दिन पहले झारखंड में भूख की वजह से एक बच्ची की जान चली गई। बच्ची की मौत भूख के चलते हुई क्योंकि परिवार का राशन कार्ड, पहचान पत्र न होने के चलते रद्द कर दिया गया था। इंसान कितना स्वार्थी और निर्दयी हो चुका है कि आधार कार्ड न होने की वजह से 11 साल की बच्ची को भूख की वजह से मौत का मुंह देखना पड़ता है। धिक्कार है ऐसी मानसिकता पर। मौत बेटी की नहीं, यह रोटी की मौत है। आइए पढ़ते हैं सूरज कुमार बौद्ध की कविता “रोटी की मौत”।

भूख से बिलखती
दर्द से चीखती
एक बेबस लाचार मां
अपनी कांपते हाथों में
बेटी को गोद लिए हुए
दर-दर भटक रही है।
इस मरे हुए समाज के आगे
आंचल पसार रही है,
कोई भात दे दो
बेटी बहुत भूखी है।

राशन वाले ने कहा
“भूखी है तो क्या,
आधार कार्ड नहीं है।
राशन नहीं मिलेगा।”
और मेरी भूखी बच्ची
भात भात कहते मर गई।
इस कानूनी खेल में
बेटी हमारी खो गई,
मौत बेटी की नहीं
आज रोटी की मौत हो गई।

– सूरज कुमार बौद्ध
राष्ट्रीय महासचिव,  भारतीय मूलनिवासी संगठन