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झारखंड सरकार ने पिछड़ो को फिर ललकारा  “आरक्षण नही देंगे

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झारखंड सरकार ने पिछड़ो को फिर ललकारा
“आरक्षण नही देंगे

मामला: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) के बाद झारखंड की सर्वोच्च नियुक्ति संस्थान और सबसे ज्यादा भ्रष्ट सँस्था “झारखंड लोक सेवा आयोग” (JPSC) ने भी स्पष्ट शब्दो में लिखित रूप में कह डाला कि
” पिछड़ो, आदिवासियो और दलितो को आरक्षण नही देंगे। ”

झारखंड हाइकोर्ट में रिट सँख्या WP(S): 5547/2017 में राज्य कि सबसे भ्रष्ट संस्था J.P.S.C. Affidavit किया है कि

” No benefit of reservation is extended in preliminary test exam.”

“reservation policy is not applicable in preliminary test.”

Cut of marks of 6 th JPSC P.T. Exam

1. Unreserved : 206
2. B.C. 1 : 206
3. B.C. 2 : 206
4. S.C. : 192
5. S.T. : 192

सवाल यहाँ महत्वपूर्ण है कि
———————————–
चम्बल के डाकू भी इतने भ्रष्ट नही होंगे जितने कि JPSC संस्था है और ये बात तो जग जाहिर है फिर ये किसकी हवा पर इतने टाइट हो रहे है ?

JPSC का काली करतूत याद किया जाये तो संक्षेप यही है कि इसने भ्रष्ट्राचार के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिये है।
वर्ष 2002 से 2008 तक खुल्लम खुला घोटाले करते हुऐ इसने सिविल सेवा, व्याख्याता, शिक्षक, मेडिकल अफसर, बजार पर्यावेक्षक आदि के सारे पद बेच डाले और इस महाघोटाले में राज्य के राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलो नेता और कई अफसर शमिल थे।

इस महाघोटाले की जाँच छात्र आंदोलनो के उपरांत देश कि सर्वोच्च जाँच एजेन्सी C.B.I. को सौपी गयी।
C.B.I. की कार्यशैली से पूरा देश परिचित है (अभी भी ये खुद केंद्र सरकार की गुलामी से संघर्ष कर रही है )

C.B.I. पिछले पाँच वर्षो से JPSC नियुक्ति घोटले कि जाँच कर रही है और उसकी जाँच शायद घोटले में नियुक्त लोगो के रिटायर (60 वर्ष) के बाद भी पूरी ना हो पाये क्योकि C.B.I. तो केन्द्र सरकार के पिंजरे में बंद तोता है, ऐसा मै नही भाजपा कहा करती थी जब UPA की सरकार केंद्र में थी, जो शायद सही प्रतीत होता नजर भी आ रहा है क्योकि 2014 से तो केंद्र में भाजपा की ही सरकार है और C.B.I. रिपोर्ट JPSC घोटले लूल बटा जीरो है।
C.B.I. की लचर जाँच पद्दति का ही यह परिणाम है कि JPSC अब तकनीकि घोटाला करने पर अड़ा है। JPSC घोटले से अफसरो, नेताओ ने सबक लिया कि अब वो खुल्लम खुल्ला सीट का खरीद फरोख्त साथ नही देंगे सिर्फ और सिर्फ तकनीकि रूप से घोटाले में ही सहयोग करेंगे, जो कि वर्तमान में JPSC/JSSC/अन्य संस्था कर रही है।
चुकी राज्य का कोई नेता, दल इस घोटले के बारे में मौन धारण किये है इसलिये मै भी कुछ नही बोलूँगा।

अब सवाल आरक्षण घोटाले कि 50% अनारक्षित (Unreserved) सीटो में से अगर झारखंड सरकार यहाँ के जेनरल (10 से 15%) के लिये जनसंख्या के अनुपात में ही आरक्षण की व्यवस्था करे (कानूनी रूप से यह सम्भव भी है) तो निश्चित तौर पर झारखंड के आदिवासी, दलितो व पिछड़ो को कोई आपत्ति नही होगी क्योकि राज्य के स्थानीय जेनरल वर्ग वाले भी हमारे ही भाई बंधु है अलग झारखंड राज्य निर्माण के लिये इनका भी खून बहा, इन्होंने ने भी कुर्बानियाँ दी है ।

लेकिन झारखंड सरकार को यहाँ के ST, SC, OBC के साथ यहाँ के जेनरल युवाओ को भी नौकरी नही देना चाहती।
सरकार को 50% जेनरल तो चाहिये लेकिन वो यहाँ के नही बल्कि Up, बिहार, हरियाणा आदि राज्यो के होने चाहिये। मतलब साफ है –
झारखंड को लूटखंड बनाना ताकि यहाँ कभी कोई स्थानीयता की बात कहने का साहस न करे ।

पिछड़ा वर्ग समुदाय के लिये इससे ज्यादा शर्म कि बात क्या होगी कि राज्य का मुख्यमंत्री के साथ देश का प्रधानमंत्री भी पिछड़ा वर्ग समुदाय से हो और दोनो जगहो पर पूर्ण बहुमत की एक ही दल की सरकार हो और JPSC जैसी भ्रष्ट संस्था घोषणा कर दे कि ” आरक्षण नही देंगे। ” और आरक्षण की माँग करने वाले मानस रंजन साहू, प्राप्तांक – 204 , श्रेणी – B.C.1 को पुलिस गोली मार देती है। जबकि अनारक्षित वर्ग का कट ऑफ मार्क्स 206 ही है।

सोचनीय प्रश्न ये भी है कि JPSC द्वारा लिखित रूप में यह घोषणा करने का अधिकार किस सदन, अधिकारी, विधानसभा, न्यापालिका द्वारा दिया कि ” प्रारंम्भिक परीक्षा में ST , SC , OBC को आरक्षण नही दिया जायेगा।”

 JPSC के पास सिर्फ परीक्षा लेने का अधिकार है या आरक्षण के सम्बन्ध में नीति बनाने का।

 JPSC झारखंड हाइकोर्ट से डीसाईड L.P.A. No. 467/2015 का हवाला दे रहा है उसमे कही नही लिखा गया है कि P.T. परीक्षा में आरक्षण नही दिया जायेगा। JPSC झूठ बोल रहा है।

L.P.A. 467/2015 यह कहा गया कि “आरक्षण के सम्बन्ध में निर्णय लेने का अधिकार सिर्फ राज्य सरकार को है। ”

विचारणीय प्रश्न यह है कि JPSC जैसी भ्रष्ट और झूठी संस्था को आखिर राज्य सरकार के किन अधिकरियो व जनप्रतिनिधिओ का संरक्षण प्राप्त है क्योकि ये भ्रष्ट संस्था वगैर सरंक्षण के तकनीकि घोटाला करने पर अड़ा है यह बात समझ से परे है।

यक्ष प्रश्न है कि झारखंड सरकार भी 50% नियुक्तियो में झारखंड राज्य के बाहर के लोगो को देने पर अड़ा हुआ क्यो है। क्यो 50% अनारक्षित पदों पर यहाँ के जेनरलो को नियुक्त नही करना चाहती ? सभी नियुक्तियो में सरकार ऐसी नीतियों का निर्माण क्यो कर रही है कि राज्य के ST , SC, OBC के साथ स्थानीय जेनरलो की पीढ़ी तक बर्बाद हो जाये

क्यो 50% अनारक्षित रिक्तियों पर सरकार स्कूलो में पढ़ाने वाले शिक्षको को बाहर से ला रही है?
क्यो थानो में सिपाही और दारोगा की बहाली बाहर के राज्यो से करवाने पर तुली है ?
क्यो ब्लॉक के BDO/CO, सचिवालय के कर्मियो की 50% बहाली बाहर के राज्यो से करने हेतु नीतियाँ बना रही है?
IAS/IPS तो पहले से बाहर का भर रखा है क्या इसी कारण बाहरी बहाली प्रक्रिया जारी है ?

वर्तमान स्थिति त्रासद है तो सोचिये अगर राज्य के लगभग 3 लाख कुल सरकारी नौकरियो में अगर 1.5 लाख सरकारी नौकरियाँ राज्य के बाहर के लोगो से भर दिया जायेगा तब अगले 10-20 वर्षो बाद इस राज्य कि क्या दुर्दशा होगी?

कुल मिलाकर इशारा एक ओर ही है कि ST, SC, OBC को आरक्षण नही देना ताकि यहाँ के अनारक्षित वर्ग में बाहर के लोगो को बहाल कर भविष्य के शोषण व शासन की किलेबंदी की जाये।

अजय चौधरी
(आरक्षण अधिकार मोर्चा) 

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