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हेमंत सोरेन
झारखण्ड प्रदेश में सरकार का सर्कस शो जारी!

झारखण्ड प्रदेश में सरकार का सर्कस शो जारी! – हेमंत सोरेन

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हेमंत सोरेन
झारखण्ड प्रदेश में सरकार का सर्कस शो जारी! – हेमंत सोरेन

हेमंत सोरेन  झारखण्ड के पूर्व मुखिया ने प्रेस कांफ्रेंस कर बताया कि राज्य में “सर्कस का शो” जारी है। अभी ‘‘माईनिंग शो’’ चल रहा है। इसके बाद ‘‘सरकार के तीन वर्ष पूरे होने का शो’’ चलेगा। इसकी भी तैयारी प्रारंभ हो गयी है। इसके बाद गोड्डा में ‘‘अडाणी का शो’’ शुरु होने वाला है। आपको पता होगा, इस सरकार ने कुछ वर्ष पूर्व ही ‘‘मेगा फुड पार्क’’ का उद्घाटन बडे ताम-झाम से किया था,  जा कर देखिये, वहां कुछ हो भी रहा है क्या? गोड्डा में जमीन अधिग्रहण का काम भी अबतक शुरु नहीं हुआ है, रैयतों को मुआवजे की राशी भी नहीं मिल पाया है और वहां पर करोड़ों रुपये खर्च कर शिलान्यास का ड्रामा सरकार करने की तैयारी में है।

लिट्टीपाड़ा चुनाव के ठीक पहले राजमहल में प्रधानमंत्री का कार्यक्रम आयोजित कर चुनाव को प्रभावित करने का प्रयास किया गया था, उसका परिणाम तो सरकार देख चुकी है और गोड्डा में भी जो ड्रामा सरकार करने जा रही है, उसका परिणाम भी देखेगी। बिना मुआवजा दिये, यदि रैयतों की जमीन पर शिलान्यास हुआ, तो फिर से गोड्डा के किसानों का खुन बहाकर जबरदस्ती जमीन लेने की पृष्ठभूमि तैयार होगी। बांग्लादेको बिजली देने के लिए सरकार झारखण्ड के किसानों पर गोली चलायेगी। सरकार को ये समझना चाहिए कि गरीब किसानों का खुन बहाकर लोकतंत्र में निवे और व्यापार की पटकथा नहीं लिखी जाती है।

झारखण्ड में कानून व्यवस्था का आलम ये हे कि यहाँ आम लोगों की तो बात छोड़ ही दीजिए, जिनका नाम अखबारों में भी नहीं छपता। भाजपा के ही नेताओं की हत्या हो रही है! लोगों को अनाज नहीं मिल रहा है। भूख से लोगों के साथ साथ बेटियां भी मर रहीं है और जनता की गाढ़ी कमाई के अरबों रुपये ये सरकार “सर्कस शो’’ पर खर्च हो रही हैं।

उन्होंने ये भी कहा कि पूरे राज्य में लोकतंत्र को लट्ठतंत्र में बदल दिया गया है। गाली-ग्लौज, बद्तमीजी और भय, सरकार की भाषा हो गयी है। उन्होंने दावे के साथ कहा कि एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र के संपादक को खास समाचार छापने के कारण सरकार से धमकियां मिली । उन्हें ये कहा गया कि आपको साल में 12 करोड रुपये का विज्ञापन इसलिए नहीं दिया जाता है कि आप सरकार के विरोध में खबरें छापें। लोकतंत्र के लिए, इससे दुःखद स्थिति नहीं हो सकती है कि अखबार एवं मीडिया को जनता का हथियार बनने के बदले उसे शासक का कवच बनने के लिए बाध्य किया जा रहा है।

उन्होंने  याद दिलाते हुए कहा कि लालपुर, रांची में एक छात्रा की हत्या हुई थी और छात्रा के पिता ने मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार लगायी थी, तो मुख्यमंत्री के द्वारा उस दुःखी पिता को कितने गंदे तरीके से अपमानित और जलील किया गया था। अब गाली-ग्लौज की भाषा को मुख्यमंत्री ने राजभाषा बना दिया है। आप ये समझ सकते हैं कि किस प्रकार से इस राज्य का प्रशासनतंत्र ध्वस्त हो चुका है। इसके लिए पूर्ण रुप से मुख्यमंत्री जिम्मेवार है। उनका अमर्यादित आचरण, उनकी हताशा को दर्शाता है। संवैधानिक पद पर बैठे लोगों से मर्यादित आचरण की अपेक्षा जनता करती है।

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