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झारखण्ड विद्दुत सप्लाई तकनिकी श्रमिक संघ लगातार 60 दिनों से अनशन पर

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रांची : संजय दास

झारखण्ड विद्दुत सप्लाई तकनीकी श्रमिक संघ अपनी पांच सूत्री मांग को लेकर राजभवन के समक्ष आज 60 दिनों से अनशन पर बैठे हुए हैं, लेकिन सरकार है कि कोई सुध नहीं ले रही है |

संघ ने झारखण्ड उर्जा विकास निगम लिमिटेड के समक्ष मांग रखी है कि निगम में कार्यरत लगभग 3000 दैनिक वेतनभोगी कर्मी 10-15 वर्षों से लगातार सेवा एवं बलिदान देते आये हैं. बलिदानियों कि विधवा महिलाएं भी शामिल है, जिन्हें सरकार कि नुनतम मजदूरी भी आज तक नहीं मिल सका है. निगम द्वारा जोखिम भरे कार्य भी आर्थिक शोषण साथ-साथ मानसिक दबाव से करवाया जाता है. निगम उन्हें नियमित करने के बजाय ठेकेदारों के अधीन बेच रही  है, जबकि पूर्व की सरकार में निगम प्रबंधक के कार्मिक निदेशक एवं उर्जा मंत्री के द्वारा लिखित एकरारनामा है कि 15 दिनों के अन्दर सभी दैनिक वेतनभोगी मजदूरों को ट्रेड टेस्ट के द्वारा स्थाई किया जाएगा.

दिनांक 09.05.2017 को निगम मुख्यालय धुर्वा में  निगम प्रबंधक के समक्ष संघ ने सहानुभूतिपूर्वक अपनी बातों को रखी थी, लेकिन निगम ने उनकी बातों पर गोर कर हल करने के बजाय उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया. संघ के  अध्यक्ष श्री भानु कुमार, महामंत्री श्री तारकेश्वर यादव, कोषाध्यक्ष श्री अभिजित कुमार तथा संगठन सचिव मोo नईम अंसारी ने बताया कि दैनिकभोगी मजदुर निगम के अन्दर वर्षों से विभिन्न पदों पर कार्य करते आ रहे हैं. दैनिकभोगी कर्मी लगातार अपना 24 घंटा देकर निगम की सेवा निर्बध्य बिजली व्यवस्था बहाल रख अपनी भूमिका निभाते आ रहे हैं. इतने कम मानदेय में जोखिम भरा कार्य करना असंभव है वहीँ दूसरी तरफ निगम के नियमित कामगारों का समान पद पर वेतनमान 30 से 40,000/= तक है साथ ही मृत्यु हो जाने पर उनके आश्रितों को मुआवजा तथा अनुकम्पा पर नौकरी भी दी जाती है लेकिन दैनिक वेतन भोगी कर्मियों को ऐसी कोई सुविधाएँ नहीं दी जाती जाती.  कार्य के दौरान इनकी मृत्यु हो जाने पर इनके आश्रित दर-दर कि ठोकर खाने को विवश हो जाते हैं.

ये पिछले 10 वर्षों से सिर्फ सम्भावना एवं आश्वासन पर समय व्यतीत कर रहे हैं और विगत वर्षों में सैकड़ों कर्मिक काल के गाल में समा गए, और निगम प्रबंधक मूकदर्शक बनी हुई हैं.

ये हमारी झारखण्ड सरकार की बिडम्बना नहीं तो क्या 60 दिनों से लगातार अनशन पर बैठे रहने के बावजूद कोई ठोस पहल या समाधान अबतक नहीं निकाला जा रहा है बल्कि इन्हें इनके हाल पर जीने-मरने को छोड़ दिया गया है. जिसके कारण सभी दैनिक भोगी कर्मियों में काफी रोष व असंतोष पनप रहा है.

संघ कि प्रमुख्य 5 मांगे :

  1. सभी मानव दिवस कर्मियों को स्थाई किया जाए.
  2. निगम के द्वारा मानव दिवस कर्मियों को आउट सौर्सिंग में देने की नीति को बंद करे.
  3. मृत मानव दिवस कर्मी के आश्रितों एवं विद्धुत स्पर्शाघात से अपाहिज मानव दिवस कर्मी को सीधा समायोजन किया जाए.
  4. पूर्व सरकार के द्वारा मानव दिवस कर्मी के नियमतिकरण का जो एकरारनामा निगम द्वारा किया गया है, उसे लागु किया जाए.
  5. निगम में कार्यरत मजदुर जो वर्षों से बिना मानदेय के निगम को सेवा देते आ रहे हैं उन्हें संपूर्ण मानव दिवस के रूप में भुगतान किया जाए |

This post was written by sanjay dash.

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