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डब्ल्यूएचओ ने 27 जून 2017 को देशों को नई सलाह जारी की

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विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 27 जून 2017 को देशों को नई सलाह जारी की है जिसमें टीबी, एचआईवी और हेपेटाइटिस के लिए बहु-रोग परीक्षण उपकरणों के उपयोग की सिफारिश की गयी है।

जीनएक्सपर्ट नामक एक एकल डिवाइस का टीबी और एचआईवी संक्रमणों का निदान करने और मात्रात्मक रूप से एचआईवी और हेपेटाइटिस सी वायरल लोड को मापने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। भारत ने हाल ही में राष्ट्रीय क्षय रोग कार्यक्रम के लिए 600 जीनएक्सपर्ट मशीनों की खरीद की है।

डब्ल्यूएचओ इन माइक्रोवेव ओवन के आकार की स्टेट ऑफ़ आर्ट अत्याधुनिक पोर्टेबल मशीनों के इस्तेमाल की सिफारिश की है। हालांकि, अधिकांश देशों ने उन्हें बहु-रोग परीक्षण के लिए उपयोग नहीं किया है।

जीनएक्सपर्ट मशीन को प्रारम्भ में टीबी और राइफैम्पिसिन प्रतिरोध का पता लगाने के लिए विभिन्न देशों के द्वारा खरीदा गया था। दिसंबर 2010 में डब्ल्यूएचओ की प्रारंभिक सिफारिश के बाद इसका इस्तेमाल एचआईवी और हेपेटाइटिस सी वायरल लोड को मापने के लिए किया जाने लगा।

टीबी रोग के निदान के लिए अत्यधिक लाभप्रद:

इस उपकरण में जिस टीबी की जानकारी माइक्रोस्कोप और एक्स रे में नहीं मिलती है। उसकी भी जानकारी इस उपकरण में आसानी से मिल जाती है। इस उपकरण से खास कर नवजात बच्चों में होने वाली टीबी की जानकारी मिल जाती है। चूंकि इस उपकरण में टीबी के कीटाणुओं को कई गुणा अधिक विकसित कर दिखाने की क्षमता है।

मशीन का प्रयोग:

जिस मरीज को टीबी है या होने की आशंका है। उस मरीज के बलगम को कार्टेज में लेकर जीन एक्सपर्ट उपकरण में रखा जाता है। इस उपकरण में बलगम के डीएनए को कई गुणा विकसित कर दिखाने की क्षमता होती है। सबसे कठिने जिस बच्चे को टीबी होता है, उसका बलगम लेना काफी मुश्किल होता है। ऐसी परिस्थिति में जो बच्चे खांसते हैं, उनकी खांसी से निकलने वाले बलगम को कार्टेज में लेकर जांच के लिए उपकरण में रखना पड़ता है।

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