डायनासोर विनाश करने वाले क्षुद्रग्रह के कारण धरती दो वर्षों तक अँधेरे में रही

डायनासोर विनाश करने वाले क्षुद्रग्रह के कारण धरती दो वर्षों तक अँधेरे में रही

डायनासोर को मारने वाले क्षुद्रग्रह के कारण पृथ्वी दो वर्षों तक अँधेरे में रही थी

एक अध्ययन में यह पाया गया है कि, करीब 66 मिलियन वर्ष पहले पहले पृथ्वी पर टकराकर डायनासोर प्रजाति का विनाश करने वाले विशाल क्षुद्रग्रह की वजह से यह धरती करीब दो वर्षों तक अँधेरे में रही थी। क्षुद्रग्रह की वजह से जंगलों में भयानक आग (दावानल) लग गयी थी, जिसके कारण वायु में भारी मात्रा में कालिख (राख) समाहित हो गयी थी।

इस घटना ने प्रकाश संश्लेषण को बंद कर दिया होगा और पृथ्वी गृह को तेजी से ठंडा कर दिया होगा एवं विभिन्न प्रजातियों के सामूहिक विलुप्त होने में योगदान दिया होगा जिसकी वजह से डायनासोरों के काल की समाप्ति हुयी होगी। अमरीकी नेशनल सेंटर फॉर एटमॉस्फिरिक रिसर्च (एनसीएआर) के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में इस अध्ययन ने क्रिटेशियस पीरियड के अंत में पृथ्वी की परिस्थितियाँ किस प्रकार की दिखाई दे रही होंगी, की एक समृद्ध तस्वीर को चित्रित करने के लिए एक कंप्यूटर मॉडल का इस्तेमाल किया।

नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज की पत्रिका प्रोसिडिंग्स में इस अध्ययन के निष्कर्ष प्रकाशित हुए। इस अध्ययन के परिणामों के माध्यम से हम यह बेहतर ढंग से समझ सकते हैं कि कुछ प्रजातियों की मृत्यु क्यों हुई, खासकर महासागरों में, जबकि अन्य जीवित रह गए।

वैज्ञानिकों का अनुमान है कि सभी गैर-एवियन डायनासोर सहित पृथ्वी पर सभी प्रजातियों में से तीन-चौथाई से अधिक, क्रेतेसियस-पैलोजन काल की सीमा पर गायब हो गए, एक घटना जिसे केपीजी (k Pg ) विलुप्ति के नाम से जाना जाता है।

प्राप्त सबूत यह बताते हैं कि विलुप्त होने का समय और एक बड़े क्षुद्रग्रह का पृथ्वी के युकाटन प्रायद्वीप पर टकराने का समय एक ही है। इस बात की पूरी संभावना है कि छुद्रग्रह की टक्कर से भूकंप, सूनामी, और यहां तक कि ज्वालामुखी विस्फोट भी हो गया होगा।

वैज्ञानिकों ने यह भी गणना की है कि टक्कर की ताकत ने पृथ्वी की सतह से ऊपर वाष्पीकृत रॉक को लॉन्च किया होगा, जहां यह छोटे कणों में संघनित हो गयी होगी। इन छोटे कड़ों को स्फेयरूल्स भी कहा जाता है।

जैसे स्फेयरूल्स पृथ्वी पर वापस गिर गए, इन्होने घर्षण की वजह से पृथ्वी पर अत्यधिक ऊँचा तापमान पैदा किया होगा जिसकी वजह से जंगलों में आग लगी होगी। भूगर्भीय रिकॉर्ड में स्फेयरूल्स की पतली परत दुनिया भर में पाई जा सकती है। शोधकर्ताओं ने एनसीएआर-आधारित समुदाय पृथ्वी प्रणाली मॉडल (सीईएसएम) का इस्तेमाल किया जिससे वैश्विक जलवायु पर कालिख के प्रभाव को देखा जा सके।

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