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डॉ. अम्बेडकर
बहुसंख्यक उपजातियों वाले दलित सबकी हकमारी करने लगे जिस कारण महादलित की चर्चा होने लगी

डॉ. अम्बेडकर (बाबा साहेब) का मिशन अधूरा : दुर्गेश यादव”गुलशन”

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डॉ. अम्बेडकर (बाबा साहेब) का मिशन अधूरा : दुर्गेश यादव”गुलशन”

डॉ. अम्बेडकर के निधन के बाद दलितों के पढ़े-लिखे तबके और बहुसंख्यक उपजातियों वाले दलित सबकी हकमारी करने लगे जिस कारण महादलित की चर्चा होने लगी। आज हिन्दू धर्म की चातुर्वर्ण्य व्यवस्था सभी वर्गों को प्रभावित किये हुए है। उच्च वर्ण में चार जातियों का प्रभुत्व तो है ही, पिछड़े वर्गों में भी चार ही जातियों का वर्ण व्यवस्था बन गयी। उसी तरह दलितों में भी चातुर्वर्ण्य व्यवस्था घर कर गयी है। क्या बाबासाहेब का यही सपना था? क्या उनका यही संदेश है?

आज समाज का एक बड़ा हिस्सा मानवीय अधिकारों को प्राप्त करने के लिए जद्दोजहद कर रहा है। वर्णाश्रम और जाति व्यवस्था पर टिके जिन मूल्यों को हमारे बिखरते समाज ने अपना रखा है उसे गम्भीर चुनौती मिल रही है। इसके नवजागरण को दबाने और कुचलने के प्रयास हो रहा है। सामन्तवादी और मनुवादी प्रवृतियां सभी के सामाजिक जीवन के रग-रग में प्रवाहित हो रही है। दोमुंही बाते और आचरण सार्वजनिक जीवन मे घुल मिल गया है। वह उसे तेजी से विषाक्त बना रहा है। श्रम प्रतिष्ठित होने के लिए लगातार संघर्ष कर रहा है। दलितों का यह तबका हाड़तोड़ मेहनत करने वाले श्रमिक है, ईमानदार है और झूठी तथा दम्भी जातीय प्रतिष्ठा की भावना से मुक्त है। ये लोग नए समाज के अग्रदूत होंगे, जहाँ श्रम पूज्यनीय और सेवा प्रतिष्ठित होगी।

डॉ. अम्बेडकर के सामाजिक क्रांति का मिशन अभी पूरा नही हुआ है। उसमें बहुत काम बाकी है, सफर लम्बा है तथा रास्ता आसान नही है।बाबा ने हमे रास्ता दिखाया,एक स्पष्ट दिशा दी, निर्देश दिए और उसे पूरा करने की जिम्मेदारी अगली पीढ़ी को सौपते हुए यह कहा था कि “मैंने तुम्हारे लिए जो कुछ भी किया है, वह बेहद मुसीबतों, अत्यंत दुखो और बेशुमार विरोधियों का मुकाबला करके किया है।यह कारवां आज जिस जगह पर है,मैं इसे बड़ी मुसीबतों के साथ लाया हूं। तुम्हारा कर्तव्य है कि यह कारवां सदा आगे ही बढ़ता रहे,बेशक कितनी रुकावट क्यों न आये। यदि मेरे अनुयायी इसे आगे न बढ़ा सकें तो उसे यही छोड़ दे पर किसी भी हालत में पीछे न जाने दे।आप लोगो से मेरा यही संदेश है।

डॉ. अम्बेडकर के मिशन को आगे बढ़ाने की महती जिम्मेदारी उन पर है जो उनके आंदोलन से लाभान्वित होकर बेहतर स्तिथ में है। उन्हें यह अहसास होना चाहिए कि उनके नीचे अभी भी बहुत बड़ी संख्या वैसे लोगो की है जो लगभग गुलामी जैसा जीवन व्यतीत कर रहे है। इसके अतिरिक्त इसका दायित्व देश के उन प्रबुद्ध लोगो पर भी आती है,जो देश के लिए सोचते है। अम्बेडकर का मिशन देश की एकता,अखंडता और खुशहाली का है, सारे भारतीय समाज की भलाई का है। उनका मिशन भारतीय समाज को रूढ़ियों, अंधविश्वासो और जड़ताओं से मुक्त कर उदार, बौद्धिक और वैज्ञानिक समाज बनाने का है। उसके लिए सबका सहयोग चाहिए,सिर्फ दलित-पिछडो का नही। उनके मिशन को पूरा करने की दिशा में किया जाने वाला प्रयत्न ही बाबा साहेब डॉ. अम्बेडकर के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। द्वारा-दुर्गेश यादव”गुलशन” (लेखक भारतीय मूलनिवासी संगठन मध्यप्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष है।)

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