Breaking News
Home / न्यूज़ पटल / आर्थिक जगत / दिवाला और दिवालियापन संहिता को समझें

दिवाला और दिवालियापन संहिता को समझें

Spread the love

दिवाला और दिवालियापन संहिता, 2016 (कोड) अभी हाल ही में समाचार पृष्ठों की सुर्ख़ियों में था, जब भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने उन 12 मेगा डिफॉल्टरों  के खातों की पहचान की, जो भारतीय बैंकिंग प्रणाली में 7.11 लाख करोड़ रुपये की कुल सकल गैर-निष्पादित आस्तियों (एनपीए) का लगभग 25% था।

दिवालियापन संहिता क्या है?

एक कंपनी दिवालिया तब कहलाती है, अगर वह अपने लेनदारों (बैंक, आपूर्तिकर्ताओं आदि) को कर्ज चुकाने में असमर्थ है। कुछ भारतीय कंपनियों द्वारा कर्ज चुकाने की अक्षमता के परिणामस्वरूप बैंकिंग प्रणाली में एनपीए का बड़ा ढेर बन गया है। बुरे ऋण के रूप में फंसे गए पैसे को मुक्त करने के लिए एक तंत्र बैंकिंग सिस्टम के लिए महत्वपूर्ण है। दिवाला और दिवालियापन संहिता (आईबीसी) बुरे ऋण से बचाने के लिए बनाया एक सक्षम हथियार है।

आईबीसी एक ऐसा अधिनियम है जो संकटग्रस्त निगमों, साझेदारी फर्मों और कर्ज में फंसे व्यक्तियों को फिर से संगठित करने और दिवालियापन संकल्प चुनने के लिए एक समयबद्ध तरीके से उनकी संपत्ति के मूल्य को अधिकतम करने के लिए मदद करता है।

यह संसद द्वारा 11 मई, 2016 को पारित किया गया था, 28 मई 2016 को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली और उसी दिन आधिकारिक गजट में अधिसूचित किया गया।

आईबीसी के तहत प्रक्रिया:

दिवालियापन प्रक्रिया शुरू करना: बैंकों सहित कोई भी लेनदार, नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) के साथ एक याचिका दाखिल करके बकाएदारों के खिलाफ दिवालिएपन की कार्यवाही शुरू कर सकता है।

आईपी की नियुक्ति: महत्वपूर्ण अधिकारों के साथ एक दिवालिया पेशेवर (आईपी) नियुक्त किया जाता है जो दोषी कंपनी पर नियंत्रण रखकर प्रक्रिया में सहायता कर सकता है।

लेनदारों की समिति का गठन: उधारदाताओं और किसी भी अन्य पार्टी के हित का प्रतिनिधित्व करने के लिए एक लेनदार समिति बनाई गई है जो कंपनी के डिफ़ॉल्ट के कारण से प्रभावित हुई है।

अधिस्थगन अवधि: डिफ़ॉल्ट मुद्दे पर एक व्यावहारिक समाधान के साथ आने के लिए आईपी को 180 दिन का समय मिलता है। समयरेखा को अन्य 90 दिनों तक बढ़ाया जा सकता है।

About Oshtimes

Check Also

झामुमो आई.टी. सेल्स

आई.टी. सेल्स : झारखंड में सोशल-मीडिया की लडाई में झामुमो सब पर भारी

Spread the love285Sharesझारखंड में फासीवादियों ने जहाँ एक तरफ गोदी मीडिया के माध्यम से अपने …