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पत्रकार मयंक कुमार
पत्रकार के घर घुसकर उन्हें एवं उनके परिवार को मारने की कोशिश

पत्रकार के घर घुसकर उन्हें एवं उनके परिवार को मारने की कोशिश -मयंक कुमार

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ब्यूरो वाराणसी। रोहनिया थाना अंतर्गत ग्राम – देऊरा, पोस्ट- काशीपुर, जिला- वाराणसी का मयंक कुमार पुत्र बाल गोविंद राम मूल निवासी एवं पेसे से पत्रकार है। काफी दिनों से इनके ही गांव के रहने वाले, कमला पटेल, फुल गेना पति शारदा पाल, लालमनी पाल पति लल्लन पाल, मंजू पाल पत्नी छोटे पाल के द्वारा दिनांक 6 / अक्टूबर /2017 की शाम लगभग 5:00 बजे के करीब इनके माता लाल मनी देवी जो घर का कुछ सामान लेने के लिए घर के ही बगल में एक दुकान पर गई हुई थी पर साजिश के तहत हमला किया गया, जो कि एक ही परिवार की हैं, जिसमें मनी देवी को गंभीर चोटे आई। किसी तरह वे अपनी जान- माल की रक्षा करते हुए घर पहुंची।  परंतु ये औरतें इनकी माता एवं परिवार को मारने के लिए लगातार इनके घर में घुसने का प्रयास कर रही थी।

मयंक कुमार ने बताया कि इनके द्वारा यथा-कथित उन अराजक लोगों के गलत कामों पर रोक लग रही है, जिसके कारण ये लोग लगातार इन्हें जान से मारने की धमकी और इनके ऊपर आते-जाते निगरानी रखवाना एवं धमकियाँ देना अपराधियों का आए दिन का काम हो गया है, मयंक कुमार ने इसकी शिकायत कई बार रोहनिया थाने में की है परंतु अभी तक इनके ऊपर कोई भी कार्यवाही नहीं की गई है। परिणामस्वरूप इनका मनोबल ऊंचा हो रहा है।

मयंक कुमार ने आगे पुलिस को दिए आवेदन में बताया कि आरोपियों के ही परिवार का अश्वनी पाल उर्फ विंदू पर मारपीट मोबाइल छिनैती, आती-जाती लड़कियों को छेड़ना एवं नेशनल हाईवे पर लूटपाट जैसे कई वारदात में लिप्त रहे है। हाल ही में रोहनिया पुलिस ने अश्वनी पाल की गिरफ्तारी की थी। अश्वनी पाल द्वारा लगातार मुझे ट्रेस किया जा रहा है और दिनांक 6 /10 /2017 को अश्वनी पाल अपने पूरे परिवार समेत एक बड़ी घटना को अंजाम देने का प्रयास किया। जिसकी वीडियो रिकॉर्डिंग टेप कर ली गई है और तत्काल मयंक ने 100 नंबर डायल करके पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी।

अब मयंक कुमार ये सवाल उठते है कि उनके  एवं उनके परिवार के ऊपर लगातार यथा – कथित अराजक किस्म के लोगों द्वारा हमला हो रहा है परंतु पुलिस प्रशासन ने अभी तक उनलोगों की गिरफ्तारी क्यों नहीं की? जबकि वीडियो रिकॉर्डिंग भी मौके पर मौजूद है अब सच लिखने पर पत्रकारों के घर में घुसकर वारदात को अंजाम देने की कोशिश हो रही हैी। प्रशासन क्यों चुप है?

यहां पर एक बड़ा सवाल पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर और उठती है जब पत्रकार समाज में हो रहे गलत कार्यों का सच अपनी जान की परवाह किए बगैर उजागर करते हैं तो इनकी सुरक्षा के साथ हमेशा खिलवाड़ क्यों होता है। पत्रकार अपने कलम के माध्यम से समाज में हो रहे अराजकता पर अंकुश लगाने का कार्य करती हैं तो पत्रकारों की सुरक्षा प्रशासन क्यों नहीं कर पाती? प्रशासन क्यों नहीं इन अपराधियों पर अपनी  शिकंजा कसती हैं!

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