in , , , ,

फिर भी जीना सीख लिया : क्या तुम जिन्दा हो? -उदयमोहन पाठक, अधिवक्ता

फिर भी जीना सीख लिया
फिर भी जीना सीख लिया : मुझे जिन्दा देखकर वे सहम गए। बोले, क्या तुम वाकई जिन्दा हो? मैंने कहा कोई शक

फिर भी जीना सीख लिया : मुझे जिन्दा देखकर वे सहम गए। बोले, क्या तुम वाकई जिन्दा हो? मैंने कहा कोई शक। बोले यकीन नहीं होता। मैंने तुम्हारे जीने के सारे रास्ते बंद कर दिये। तुम्हारी कमाई और महंगाई के बीच बड़ा फासला बनाया, तुम्हें रोजगार से विमुख किया ताकि तुम्हारा अस्तित्व ही मीट जाये पर तुम जिन्दा कैसे? मुझे लागा कि यह आदमी कुछ देर मुझे और देखेगा तो पागल हो जायेगा। उसेन मुझे नहीं कोई भूत-प्रेत देख लिया है। में इस पचड़े में पडऩे से बेहतर वहां चल देना बेहतर समझा। जैसे ही मैं जाने के लिए मुडा, वह चिल्लाकार बोला- मैंने फेक्ट्री के धुंआ से और कचड़े से तुम्हारे जमीन को बंजर बनाया, यहां तक की प्रदूषण से पेड़-पौधों तक को क्षति पहुंचाया। विकास के नाम पर प्रदूषण फैलाया जिससे तुम अपंग और रोगी संतोनों के पिता बने। हवा में जहर फैलाया ताकि तुम अनेक रोगों से परेशान रहे। तुम्हें नौकरी पर नहीं रखा ताकि तुम सपरिवार भूखे मरो। शिक्षा की व्यवस्था को आधुनिकता के नाम पर चौपट किया, शिक्षा को महंगा किया ताकि तुम्हारे बच्चे अशिक्षित रह जाये । तुम तो अंगुठा लगाते हो, तुम्हारे बच्चे भी अंगुठा लगाए। दवा कम्पनियां ने दवा के दाम बढ़ाये, डॉक्टरों ने उंची फीस रखी, सरकारी अस्पताल की व्यवस्था चौपट कर दी ताकि तुम एडिय़ा रगडक़र मरो। तरह-तरह के अंधविश्वास फैलाये ताकि तुम उसमें फंसे रहो। तुम्हें आपस में लड़ाया ताकि तुम कोर्ट कचहरियों में परेशान होते रहो। तुम्हारी बस्ती उजाड़ी ताकि तुम खानाबदोष जिन्दगी जी सको। फिर भी तुम जिन्दा हो।

मैंने कहा कि फिर भी जीना सीख लिया, अब मेरी भी कुछ बातें सुन लो कि मुझे भी रोज मरने की आदत है। तुम जितना भी जुल्म ढो लो मैं मरूंगा नहीं क्योंकि मैंने भी वही करना शुरू कर दिया है, जो तुम करते आए हो। तुमलोगों ने ही मुझे बताया कि आधा काम कर किस तरह पूरी मजदूरी ली जाती है। किस तरह सरकारी जमीन पर कब्जा जमाकर अपनी बस्ती बसायी जाती है? किस तरह प्रकृति की शोद में पल-बढक़र प्रकृति प्रदत्त आयुर्वेदिक जड़ी-बुटियां खाकर स्वस्थ रहा जाता है। किस तरह गरीब बनकर सरकारी रासन खाकर पेट भरा जाता है? किस तरह बच्चों को सरकारी विद्यालय भेजकर मुफ्त की किताब कॉपियां, साईकिल, भोजन के साथ शिक्षा प्राप्त किया जा सकता है? अब तो कानून के जानकार सरकारी योजना के तहत हमलोगों को कानून की जानकारी देते हैं। हमलोगों को शिक्षित कर सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित करते हैं। हम लिख-पढ़ नहीं सकते लेकिन सरकारी हमें मुफ्त में मिलती है और उसका हमलोग लाभ भी उठा रहे है। तुम मुझे क्या मार सकोगे? हममें परिस्थिति से लडऩे की क्षमता है। यही क्षमता हमें जिन्दा रहने की प्रेरणा देती है।

 हममें परिस्थिति से लडऩे की क्षमता है। यही क्षमता हमें जिन्दा रहने की प्रेरणा देती है। फिर भी जीना सीख लिया

What do you think?

Comments

Leave a Reply

One Ping

  1. Pingback:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Loading…

0

एक लड़की के लिए मूल अधिकार पाना दुश्वार

भारत छोड़ो आन्दोलन

भारत छोड़ो आन्दोलन में झारखण्डवासियों की भूमिका : महेश अमन