Breaking News
Home / न्यूज़ पटल / फेयरवेल पार्टी

फेयरवेल पार्टी

Spread the love

 

“ओफ्फो आकाश तुम मुझे घूरना बंद करो।”

“एक तो साड़ी में तुम ऐसा क़यामत ढा रही हो और कहती हो..”

“देखो ऐसे वाहियात शब्द मेरे लिए मत कहा करो।”

“अरे तुम तो गुस्सा हो गयी। मेरा मतलब तो ये था कि तुम बहुत सुंदर लग रही हो।”

स्कूल की फेयरवेल पार्टी। जिसकी तैयारी पूरे एक महीने पहले से कर रही थी मैं। मुझे सबसे सुंदर दिखना था। इतनी सुन्दर जितनी कोई भी न लगे। इतनी सुन्दर की आकाश मुझे देखे तो देखता रह जाए।

आकाश मेरे साथ पढता था। हम दोनों ने तय किया था कि ग्रेजुएशन में हिस्ट्री को ऑनर्स सब्जेक्ट लेंगे।और फिर साथ में आर्कियोलॉजिक्ल सर्वे ऑफ इंडिया में नौकरी करेंगे। फिर हमारी शादी हो जायेगी। और फिर बच्चे भी हो जायेंगे। मुझे हमेशा से बेटा चाहिए था। और आकाश को बेटी। कहता था बिलकुल मेरी जैसी बेटी चाहिए उसे।

आकाश इंट्रोवर्ट था। जल्दी घुलता मिलता नहीं था लोगों से। और मैं.. मैं तो उतावली रहती थी नए नए लोगो से दोस्ती करने के लिए।परीक्षा की तैयारी हम साथ ही करते थे पर हर परीक्षा में वो एक प्रश्न छोड़ आता था जिससे मुझे उससे ज़्यादा नम्बर आएं। ये बात स्कूल के टीचर्स भी बखूबी समझते थे और घर वाले भी। ग्यारहवीं और बारहवीं दोनों में मैं अपनी कक्षा में पहले स्थान पर रही। और वो दूसरे पर। जबकि पढ़ने में वो मुझसे कहीं बेहतर था।

वो नहीं आना चाहता था फेयरवेल में।

“यार कुर्ता पैजामा नहीं पहनना मुझे”

“ऐ आकाश अब तुम मेरे अरमानों पे पानी डालोगे क्या?”

“मैंने जो नयी साडी खरीदी है उसका क्या। और इतने लंबे जो बाल किये हैं। तुम्हें पता है मुझे लंबे बाल नहीं पसंद। इतनी तैयारी की है मैंने और तुम नहीं आओगे। मैं फोटो किसके साथ खिचाऊंगी फिर?मैं मार दूँगी तुम्हें। तुम्हें आना है बस।”

“अरे वो शोभित आएगा न” आकाश ने मुझे छेड़ते हुए कहा

“तो? तो शोभित आएगा तो? मुझे क्या?”

“तो तुम उसके साथ फ़ोटो खिंचवा..”

“आकाश आई विल ड्रिंक योर ब्लड” कहते हुए मैं उसे मारने को लपकी और वो शैतान दौड़ते हुए कैंटीन की तरफ भाग गया।

16 फ़रवरी 2013

उस दिन मैंने काले रंग की साड़ी पहनी थी। आकाश को मेरे ऊपर काला रंग बहुत जचता था न। सब जहाँ खाने पीने और मौज मस्ती में व्यस्त थे वहीँ आकाश मुझे खींच कर ऊपर क्लासरूम में ले गया था।

“धत पागल क्या हुआ तुम्हें। चलो न नीचे। सब गलत सोचेंगे। और अगर कहीं मिस सिन्हा ने देख लिया तो गज़ब..”

“चुप” कहते हुए उसने मेरे होंठो पे ऊँगली रख दी थी। और मैं.. मेरी तो सांसें ही रुक गयी थीं पल भर के लिए।

“आकाश”

मैंने तेजी से धड़कते दिल को थामना चाहा था।

फिर न जाने उसे क्या हुआ कि मेरा हाथ पकड़ कर दौड़ते हुए मुझे नीचे ले गया। और फिर स्टेज पर चढ़ के झूमते हुए गाने लगा-

‘तुम ही हो, अब तुम ही हो, ज़िन्दगी अब तुम ही हो’

शिखा कहती है मैं उस वक़्त टमाटर की तरह लाल हो गयी थी। सब हैरान थे इतना चुप रहने वाला आकाश आज स्टेज पर चढ़ के गाना गा रहा है। और इसका पूरा क्रेडिट भी मुझे ही दिया गया था। उस दिन हम न जाने कितनी देर तक डांस करते रहे थे। दुनिया से बेखबर, बेपरवाह।

शाम को घर लौटते वक़्त मैंने रेलवे लाइन के किनारे रुकने की ज़िद की थी। कितना अच्छा लगता था न- हरी हरी घास। दूर तक फैला हुआ सन्नाटा। और बीच बीच में उस सन्नाटे को बेधती हुई इंजन की सीटी और “हम”। एक दूसरे के हाथों में हाथ रखे सुनहरे भविष्य की कल्पना में खोये ‘हम’।

तभी अचानक मेरा ध्यान गया-

“आकाश मेरा पर्स। शायद कहीं गिर गया। चार हज़ार थे उसमें। मम्मी बहुत डाँटेगी।”

उसने इधर उधर देखा और फिर थोड़ा आगे बढ़ा।

“पटरियों पर गिरा आयी हो। देखो वो है उधर। सारा ध्यान साड़ी पर ही है आज तुम्हारा” कहते हुए वो आगे बढ़ा और

“आकाश….”

“आकाश!!!”

मैं स्तब्ध रह गयी। बुत बन गयी थी मैं। मालगाडी जा चुकी थी। और आकाश भी। सारे सपने,सारे वादे छोड़कर चला गया था मेरा आकाश।

आकाश! तुमने मुझे सब कुछ सिखाया था पर तुम्हारे बिना जीना नहीं सिखाया। पर देखो न फिर भी जिंदा हूँ। मैंने तुम्हारा मोहल्ला छोड़ दिया। शहर छोड़ दिया। उन पटरियों को न जाने कब का पीछे छोड़ आयी जहाँ तुम थे, तुम्हारी यादें थीं। पर तुम्हें मैं अब तक क्यों नहीं छोड़ पायी आकाश!

तुम्हें गये पूरे चार साल हो गए। पर ऐसा लगता है जैसे मानो कल की बात हो। तुम, मैं,हरी घास,पटरियां और सन्नाटा। बस काश उसमें तुम्हारा पटरियों पर जाना मैं रोक देती,तुम्हारे पाँव मोड़ देती तो कितना सुखमय होता न आज हमारा जीवन। तुम क्या गये मेरी तो ज़िन्दगी ही चली गयी।

जानते हो। कल फेयरवेल है मेरे कॉलेज में। नहीं मैं स्कॉटिश चर्च में नहीं हूँ। स्टीफेंस भी नहीं गयी। कैसे जाती? तुम जो नहीं थे। मैंने हिस्ट्री नहीं लिया।और मैं अब आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया में नौकरी भी नहीं करना चाहती।

कॉलेज में सब जगह फेयरवेल की ही बातें चल रही थी।

“तुम कल फेयरवेल में किस कलर की साडी पहनोगी?”

“काली साड़ी। कल मैं रौशन के साथ घूमने भी जाउंगी। उसे मुझ पर काला रंग बहुत जंचता है।” मैंने सुना और..

“आकाश!”

आज चार साल बाद फिर तुम्हारा नाम आया मेरी जुबां पर। आज फिर मैंने वो काली साड़ी निकाली । वही तो है मेरे पास तुम्हारी आखिरी याद। उसे छुआ था तुमने अपने हाथों से।

ये काली साड़ी मेरी ज़िन्दगी को हमेशा के लिए काला कर गयी।

कमरे में दम घुट रहा था तो बाहर निकली। बरामदे में खड़े होकर चाँद को देखने की चाहत बाहर ले आयी थी। अक्सर देखा करती हूँ इसे चेतना शून्य हो कर। कभी कभी तुम दिख जाते हो ना। चाँद के पीछे से झांकता हुआ तुम्हारा मुस्कुराता चेहरा। काफी होता है मुझे जीने के लिए मजबूर कर देने को। वरना तुम्हारे पास आने की चाहत ने न जाने मुझसे अब तक क्या क्या करवा दिया होता।

मैंने दीवार से सटते हुए नज़रें उठायीं और.. आह! दीवार खुरदरी है। मेरी ज़िंदगी भी तो खुरदरी हो गयी है इसी दीवार की तरह। काली साड़ी मेरे हाथों में किसी गठरी की तरह मुड़ी हुई सीने से चिपकी थी। आसमान को देखा। वह भी काला था इस मनहूस साड़ी की तरह।

हर किसी के कमरे से फेयरवेल की तैयारियों की आवाज़ आ रही थी। मुझे चार साल पहले का अपना वो एक महीना याद आया जिसमें मैंने सबसे सुंदर दिखने के लिए तैयारियाँ की थीं।

पर अब? अब किसके लिए दिखूं सबसे सुंदर। आकाश तो..

मैंने आंसुओं के उमड़ते हुए वेग को रोका और कमरे के भीतर आ गयी। उस काली साडी को परत दर परत खोला और उसके साथ ही मेरी ज़िंदगी की कई परतें खुलती चली गईं। आज फिर अटैची के सारे कपडे उलटाकर अपनी पुरानी डायरी निकाली। तुम्हारी तस्वीर! तुम आज भी वैसे ही हो। मैं कितना बदल गयी। पहले से मोटी हो गयी हूँ। चश्मा भी चढ़ गया है अब तो। अब मैं तुम्हारी क़यामत नहीं रही।

तुम्हें निहारते निहारते मन फिर उन्हीं पटरियों के बीच घूमने लगा जहाँ कभी तुम्हारे कंधे पे सर रखकर मैंने घंटों बिताये थे अपना कल बुनते हुए। पर किसे पता था कि इस कल को मुझे अकेले ही ढोना पड़ेगा।

न जाने क्या आया मन में कि मैंने झट से साड़ी पहन ली और फिर तुम्हारी तस्वीर को सीने से चिपकाये घंटों अरिजीत सिंह के उसी गाने को गाकर नाचती रही जिसे तुमने मेरे लिए गाया था.. चार साल पहले!

 

 

साभार : निधि श्री

This post was written by sanjay dash.

The views expressed here belong to the author and do not necessarily reflect our views and opinions.

About sanjay dash

Check Also

सुदेश महतो

सुदेश महतो सरकार में रहकर भी सीएनटी/एसपीटी के संशोधन को रोकने में नाकाम

Spread the love6Sharesसिल्ली और गोमिया को लेकर सत्ताधारी दल भाजपा और आजसू में टकराव तय …