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सूरज कुमार बौद्ध

बहुजन समाज के नेताओं के नाम खुला खत…..

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श्रद्धेय बहुजन समाज के नेतागणों,

       जैसा कि आप सभी इस बात से वाकिफ हैं कि भाजपा ने बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया है। उनके नाम की घोषणा करते हुए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि भाजपा और एनडीए यह आशा करते हैं कि दलित के घर जन्म लेने वाले कानूनविद और संघर्ष करके सार्वजनिक जीवन में मुकाम हासिल करने वाले रामनाथ कोविंद सर्वसम्मत राष्ट्रपति होंगे। सवाल यह है कि रामनाथ कोविंद ने अनुसूचित जाति/जनजाति समाज के हितों के लिए आज तक कौन सा संघर्ष किया है? संघ की शाखा में जाने वाला एवं भाजपा नेतृत्व की गुलामी स्वीकार करने वाला कोई भी बहुजन समाज मे जन्मा नेता अंबेडकरवादी नहीं कहा जा सकता है। उधर कांग्रेस ने भी प्रतिक्रिया की राजनीती खेलते हुए राष्ट्रपति पद हेतु मीरा कुमार को उम्मीदवार घोषित कर दिया। मुझे एक बात समझ नहीं आती है कि कांग्रेस अगर अनुसूचित जाति/जनजाति की हितैसी थी तो 2012 में मीरा कुमार को राष्ट्रपति पद हेतु क्यों नहीं उतारा? दरअसल यह दोनों की संकुचित मानसिकता का प्रदर्शन है।
        आखिर क्या वजह है कि रोहित वेमुला की हत्या, ऊना का बर्बर कांड, फरीदाबाद में बच्चों को आग के हवाले करने वाला विभत्स कांड, सहारनपुर में तलवारों से काटे गए गरीब और उनकी जल रही झोपड़ियों एवं बहुजन समाज की बहन-बेटियों की इज्जत से खिलवाड़ किये जाने…. जैसी दिन-प्रतिदिन घट रही घटनाओं पर चुप्पी साधने वाले भाजपाइयों को अचानक दलित प्रेम कैसे याद आ गया? इसी तरह हजारों मुसलमानों को मौत के घाट उतारे जाने की घटना पर चुप्पी धारण करने वाले जातिवादियों का तब भी मुस्लिम प्रेम जगा हुआ था जब डॉ0 ए0 पी0 जे0 कलाम को राष्ट्रपति पद हेतु नामांकित किया गया था। लेकिन ऐसा करने से क्या आरएसएस और भाजपाई मुस्लिमों के हितैषी बन गए? इस बार भी रोहित वेमुला हत्याकांड, ऊना का बर्बर कांड एवं सहारनपुर जातीय आतंकवादी हिंसा आदि घटनाएं घटित होने के बाद बहुजनो का ध्यान भटकाने के लिए भाजपा ने अनुसूचित जाति के रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया है। तो क्या रामनाथ कोविंद का नाम घोषित करने से भाजपा अनुसूचित जाति की हितैषी बन जाएगी? हमारे ख्याल से नहीं, कभी भी नहीं। वर्ष 2010 में महिला आरक्षण में OBC को अलग से आरक्षण देने की मांग पर इन्ही रामनाथ कोविंद ने कहा था कि हम आरक्षण में आरक्षण को स्वीकार नहीं करेंगे। हम 33% महिलाओं के आरक्षण के भीतर आरक्षण को स्वीकार नहीं करेंगे।
        आज समय की यही मांग है कि हमें SC/ST/OBC और अल्पसंख्यक वर्गीकरण को स्वीकार करते हुए बहुजन/मूलनिवासी अवधारणा के तहत एक साथ मिलकर काम करना चाहिए। राष्ट्रपति पद हेतु घोषित उम्मीदवार का SC/ST/OBC अथवा अल्पसंख्यक होना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि उसके अनुसूचित जाति का होने के साथ-साथ उसको ज्योतिबा फुले, माता सावित्री बाई फुले, बिरसा मुंडा, उदादेवी पासी, बाबा साहेब डॉ0 भीमराव आंबेडकर, पेरियार ई0 व्ही0 रामास्वामी नायकर, ललई सिंह यादव एवं मान्यवर कांशीराम आदि महापुरुषों का अनुयायी भी होना चाहिए। 
       अतः सभी बहुजन समाज के नेताओं यथा बहन मायावती (बसपा), लालू प्रसाद यादव (राजद), नीतीश कुमार व शरद यादव (जदयू), वामन मेश्राम (बामसेफ), इं0 डी0 प्रकाश गौतम (भारतीय मूलनिवासी संगठन), प्रीता हरित (बहुजन सम्यक संगठन), असउदुद्दीन ओवैसी (मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन), विजय मानकर (एपीआई)…… आदि सभी बहुजन चिंतकों को आपस में विचार विमर्श करके राष्ट्रपति पद हेतु सुयोग्य एवं कर्मठ जस्टिस कर्णन का नाम घोषित करना चाहिए। जिन्होंने छाती ठोककर कहा था कि मैं बाबा साहेब डॉ0 भीमराव आंबेडकर का दत्तक पुत्र हूँ। जस्टिस कर्णन रामनाथ कोविंद से कही बड़े कानूनविद, उनसे बेहतर एवं योग्य और अम्बेडकरवादी उम्मीदवार है। यदि किन्ही कारणोंवश जस्टिस कर्णन के नाम पर किसी को कोई आपत्ति हो तो बहुजन हितों से जुड़े मुद्दों पर संसद में दहाड़ने वाले और मूलनिवासी अवधारणा पर भाजपा (सत्ता पक्ष) के राजनाथ सिंह गृह मंत्री जैसे चोटी के नेताओं की हमेशा बोलती बंद करने वाले मल्लिकार्जुन खड़गे के नाम पर विचार किया जा सकता है। यही नहीं ‘जनहित याचिका’ का न्यायिक व्यवस्था में पदार्पण करने में अहम भूमिका निभाने वाले सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश के0 जी0 बालकृष्णन अथवा संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ0 भीमराव अंबेडकर के सुपौत्र प्रकाश राव अम्बेडकर के नाम पर भी विचार किया जा सकता है। जस्टिस कर्णन की तरह ही के0 जी0 बालकृष्णन और प्रकाश राव अम्बेडकर भी कानून के बड़े ज्ञाता हैं।
      आज मूलनिवासी समाज अपने आप को राजनीतिक रूप से अनाथ महसूस कर रहा है। आप सभी उनके नेतृत्व की उम्मीद हैं। अतः आप सभी बहुजन समाज के नेताओं से हमारा निवेदन है कि राष्ट्रपति पद हेतु आप सभी एवं सम्पूर्ण विपक्ष को 1-जस्टिस कर्णन, 2-मल्लिकार्जुन खड़गे, 3-के0 जी0 बालकृष्णन 4-प्रकाश राव अम्बेडकर के नाम पर गंभीरता से विचार करते हुए इन्ही में से किसी एक व्यक्ति को राष्ट्रपति का उम्मीदवार घोषित करना चाहिए।
        यह सभी चारों नाम मनुवाद, पाखंडवाद एवं भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष की एक जिंदा मिसाल हैं।आपका औऱ हमारा यह कदम बहुजन समाज की एकता के लिये एक क्रांतिकारी पहल होगी।
जय भीम, जय भारत, जय मूलनिवासी।
द्वारा- सूरज कुमार बौद्ध
(लेखक भारतीय मूलनिवासी संगठन के राष्ट्रीय महासचिव हैं।)

 

This post was written by suraj kumar bauddh.

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