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बेटा-बेटी का भेदभाव भूलें, दो बच्चे पर कराएं बंध्याकरण : स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी

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मेदिनीनगर : बेटा-बेटी के भेदभाव को लोग भूल जाएं। दो बच्चे होने के बाद तत्काल बंध्याकरण कराएं। छोटा परिवार ही खुशहाल परिवार बनता है। अक्सर देखा जाता है कि तीन-चार बेटियां जन्म लेने के बाद कई लोग बेटा का इंतजार करते हैं। हर क्षेत्र में अब बेटियां आगे निकल रही हैं। इसलिए बेटा-बेटी में भेदभाव खत्म करना होगा।

उक्त बातें सूबे के स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी ने कही। वे मंगलवार को स्थानीय सदर अस्पताल में आयोजित परिवार स्थिरता पखवारा के उद्घाटन समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। इससे पहले मंत्री व अन्य अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप जलाकर पखवारा का उद्घाटन किया। इसकी अध्यक्षता सिविल सर्जन डॉ. कलानंद मिश्रा व संचालन डीपीएम प्रवीण ¨सह ने किया। मंत्री ने कहा कि बेटियों के लिए सरकार की ओर से कई महत्वपूर्ण योजनाएं चलाई जा रही हैं। मंत्री चंद्रवंशी ने कहा कि आजादी के बाद से पलामू मे मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए किसी नहीं नहीं सोचा। मंत्री बनते ही गृह जिला होने के कारण इस ओर कड़ी मशक्कत की। अब हालत है कि पलामू में मेडिकल कॉलेज का निर्माण चल रहा है। डेढ़ वर्ष के बाद यहां मेडिकल कॉलेज में बच्चे नामांकन लेंगे। जिला परिषद उपाध्यक्ष संजय ¨सह ने कहा कि लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा लेने के लिए अस्पताल में आइसीयू, लिफ्ट, मेडाल आदि की बेहतर व्यवस्था की गई है। यहां डायलेसिस की व्यवस्था है।

इसके बावजूद यह क्रियाशील नहीं हैं। नतीजा मरीजों को परेशानी होती है। उन्होंने मंत्री से आग्रह किया है कि सदर अस्पताल में अविलंब डायलेसिस की व्यवस्था को संचालित करें। सिविल सर्जन डॉ. कलानंद मिश्रा ने कहा कि पलामू के पुरुषों में नसबंदी के प्रति जागरूकता का अभाव है।

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