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आर्थिक सुधारों की लम्बी-चौड़ी कवायद के बावजूद रोजगार के अवसरों में कमी देश की आर्थिक सेहत के लिए शुभ संकेत नहीं माना जा सकता रिजर्व बैंक के सर्वे के मुताबिक नौकरी के मामले में देश 2013 के बाद सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। तमाम सरकारी दावों के बावजूद मेक इन इण्डिया और स्टार्ट […]

यह खामोशी क्यों?

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आर्थिक सुधारों की लम्बी-चौड़ी कवायद के बावजूद रोजगार के अवसरों में कमी देश की आर्थिक सेहत के लिए शुभ संकेत नहीं माना जा सकता रिजर्व बैंक के सर्वे के मुताबिक नौकरी के मामले में देश 2013 के बाद सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। तमाम सरकारी दावों के बावजूद मेक इन इण्डिया और स्टार्ट […]

This post was written by ajit gupta.

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