Breaking News
Home / न्यूज़ पटल / एडिटोरियल / आर्टिकल / रिजर्व केटेगरी के बाद ओपन केटेगरी होती है, जनरल नही!

रिजर्व केटेगरी के बाद ओपन केटेगरी होती है, जनरल नही!

Spread the love

*हमारा देश भारत है, हिंदुस्तान नही!*

*–दुर्गेश यादव “गुलशन”* भारतीय संविधान में लिखे India शब्द का अनुवाद मनुवादी लोग “हिंदुस्तान” करते है। किन्तु संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ0 भीमराव अंबेडकर ने हमे आगाह किया है, कि India का अर्थ “भारत” होगा, हिंदुस्तान नही। इसलिये हमें अपने देश को हिंदुस्तान नही बल्कि भारत ही बोलना चाहिए। इसी प्रकार आरक्षण के संदर्भ में मनुवादी लोग एक शब्द प्रयोग करते है, *”जनरल कटेगरी”* जो कि बहुत ही गलत है। इसको हमे *’ओपेन कटेगरी’* शब्द प्रयोग करना चाहिए। यदि 22.5% रिजर्वेशन एस0सी0 और एस0टी0 के लिए है और 27% रिजर्वेशन ओबीसी के लिए है तो बाकी जो 50.50% बचता है, वह ओपेन कटेगरी में आता है, न कि जनरल कास्ट के लिए रिजर्व है। भारतीय संविधान के अनुसार रिजर्वेशन एस0सी0 के लिए है,एस0टी0 के लिए है और ओबीसी के लिए है। जनरल कास्ट के लिए कोई भी रिजर्वेशन नही है। इस रिजर्वेशन के बाद जो 50.50% की वैकेंसी बचती है, वह ओपेन कटेगरी में आती है। उसमें एस0सी0 को भी हिस्सा मिल सकता है, एस0टी0 को भी मिल सकता है और ओबीसी को भी मिल सकता है। ये बाते हमे हमेशा ध्यान में रखना चाहिए। अभी जो उत्तरप्रदेश में आरक्षण का मामला है, उसमे परीक्षा के तीन मेथड लागू थे। पहला प्री परीक्षा, दूसरा मेंन परीक्षा और तीसरा इंटरव्यू होता है। इसमें इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि रिजर्वेशन के बाद जो 50.50% सीटें बचती है तो जो एस0सी0, एस0टी0 और ओबीसी के बच्चे जो रिजर्व केटेगरी की कट ऑफ लिस्ट से ज्यादा नम्बर लाते है, उनको ओपेन कटेगरी में रखना चाहिए। ओपेन केटेगरी को जनरल कटेगरी कहकर स्वर्णो के लिए रिजर्व नही बनाना चाहिए। ये हमारे समाज के पढ़े लिखे लोगो मे भी गलतफहमी है। हमारे समाज के वकीलो में भी गलतफहमी है और हमारे समाज के बुद्धिजीवी वर्ग में भी यह गलतफहमी है कि हम उसको ‘ओपेन कटेगरी’ कहने के बजाय ‘जनरल कटेगरी’ मानते है। इसका मतलब है कि ये जनरल कास्ट के लिए रिजर्व है। जबकि ऐसा नही है। हमे किसी से बात करते समय या बोलते समय, यह ध्यान में रखना चाहिए कि हमे जनरल कटेगरी कहने के बजाय ‘ओपन कटेगरी’ कहना चाहिए। इस ओपन कटेगरी में सभी का हिस्सा होता है। चाहे वह एस0सी0 का हो, चाहे एस0टी0 का हो, चाहे वह ओबीसी का हो या स्वर्ण हो। जागते भी रहो और जगाते भी रहो!

 

*दुर्गेश यादव “गुलशन”*

प्रदेश अध्यक्ष *भारतीय मूलनिवासी संगठन*

मध्य प्रदेश। मो.7581038809

This post was written by sanjay dash.

The views expressed here belong to the author and do not necessarily reflect our views and opinions.

About sanjay dash

Check Also

सत्ता के बूट

मौजूदा सत्ता के बूट (जूते) भारतीय संविधान से भी मजबूत

Spread the love68Sharesक्या मौजूदा सत्ता के बूट (जूते) भारतीय संविधान से भी ज्यादा मजबूत हैं  …