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बौद्ध या कार्लमार्क्स

वामपंथ को अपना दुश्मन मानना छोड़ें अंबेडकरवादी !

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अंबेडकरवादी अपना सबसे बड़ा दुश्मन वामपंथीयों को मानते हैं, आए दिन सोसल मिडिया पर अपना भड़ास निकालते रहते हैं वामपंथीयों के खिलाफ, लेकिन जब कोई मुसीबत आती है, या संघ समर्थीत केन्द्र सरकार द्वारा किसी अंबेडकरवादी नेता को गैर कानूनी तरीके से प्रताड़ीत करती तब अंबेडकरवादी लोग वामपंथीयों से कहने लगते हैं आखिर वामपंथी चुप क्यों हैं.. अरे भाई या तो आप वामपंथीयों का घेषित प्रतिद्वंदी बन जाओ या मददगार समझो.. दोनो एक साथ तो बिल्कुल नहीं चल सकता है, आप चाहते क्या हैं.. वामपंथी आपकी गालियां सुनते रहें, और वक्त वेवक्त आपके साथ संघ के खिलाफ लड़ते भी रहें.. जब संघ के खिलाफ लड़ना हीं है वामपंथीयों को तो आपके साथ मिलकर क्यों लड़े, जब वामपंथ संघ से लड़ता है ते आप अंबेडकरवादी मौखिक समर्थन भी नहीं देते हैं और कहते हैं की संघ और वामपंथ एक हीं है.. जब संघ और वामपंथ एक हीं है वामपंथ से आशा करते हीं क्यों करते हैं अंबेडकरवादी .. मुट्ठी भर तो बच्चे हैं वामपंथी, फिर भी इनसे बड़ी उम्मीद क्यों लगाए रहते हैं अंबेडकरवादी.. वामपंथीयों ने कोई ठेका तो नहीं ले ऱखा है अंबेडकरवाद को बचाने के लिए .. मैं अंत में यही कहना चाहूंगा की प्रिय अंबेडकरवादी मित्र ..ताली एक हाथ से नहीं बजती है, दोनो हाथों को परिश्रम करना पड़ता है तब जाकर एक गुंज सुनाई देती है.. अगर संघ परिवार(आरएसएस) के खिलाफ लड़ना है तो वामपंथ और अंबेडकरवाद को बराबर जिम्मेदारी निभानी पड़ेगी. .!

अमित कुमार 

This post was written by amit kumar.

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