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विलुप्त हो चुकी सरस्वती नदी के बहाव क्षेत्र का कुओं की मदद से पता किया जायेगा

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नयी दिल्ली 20 जुलाई (भाषा) विलुप्त हो चुकी सरस्वती नदी के जीर्णोद्धार के लिये हरियाणा सरकार के सरस्वती धरोहर बोर्ड और तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) के बीच आज समझौता किया गया। इसके तहत सरस्वती नदी के प्रवाह मार्ग में ओएनजीसी द्वारा 100 कुंये बनाकर नदी के प्रवाह की संभावनाओं का पता लगाया जायेगा।

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और केंद्रीय पैट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान की उपस्थिति में ओएनजीसी के साथ सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किये गये। इसके तहत सरस्वती नदी के जीर्णोद्धार की इस परियोजना में केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय की एंजेसी वैपकॉस सलाहकार के रूप में कार्य करेगी। खट्टर ने बताया कि जीर्णोद्धार योजना के तहत वैपकॉस द्वारा नदी मार्ग का सर्वेक्षण किया जाएगा। इसके पहले ओएनजीसी द्वारा सरस्वती नदी के प्रवाह मार्ग पर दस कुंये खोद कर भूमिगत जल की संभावनाओं का पता लगाया जायेगा। प्रधान ने सरस्वती नदी के जीर्णोद्धार के लिए हरियाणा सरकार द्वारा किये जा रहे कार्यों की प्रशंसा करते ही हुये कहा कि नदी के प्रवाह मार्ग पर कुओं की संख्या 100 तक बढ़ायी जाएगी।

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इस मौके पर खट्टर ने सरस्वती नदी को भारतीय उपमहाद्वीप का वैदिककालीन गौरव बताते हुये कहा कि इसकी खोज के लिए यमुनानगर जिले में सरस्वती नदी के उद्गमस्थल आदिबद्री से गुजरात तक कई पुरातत्ववेत्ताओं ने यात्राएं की हैं। नदी के वजूद को तलाशने के लिये की गयी इन यात्राओं के अनुभव के आधार पर हरियाणा सरकार द्वारा वर्ष 2015 में गठित हरियाणा सरस्वती धरोहर बोर्ड का मुख्य उद्देश्य इस नदी का जीर्णोद्धार कर इसके प्राचीन स्थलों को विश्वस्तर पर धार्मिक पर्यटन केन्द्रों के रूप में विकसित किया जाना है। नदी को पुनः प्रवाहित करने के लिये इसके प्रवाह मार्ग पर बांधों व सरोवरों का निर्माण किया जायेगा।

पीटीआई-भाषा

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