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विश्व के द्वारा बाल मृत्युदर को कम करने के लिए तेजी से करना होगा प्रयास 

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बाल अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था संयुक्त राष्ट्र चिल्ड्रन फंड (यूनिसेफ) के अनुसार, अगर विश्व के द्वारा बाल मृत्युदर को कम करने के लिए तेजी से प्रयास नहीं किए गए, तो 2030 तक लगभग 7 करोड़ बच्चों को अपनी पांच वर्ष की उम्र तक पहुंचने से पहले ही मौत का सामना करना पड़ेगा।

यूनिसेफ के नये अध्ययन के अनुसार, बच्चों के स्वास्थ्य और सबसे वंचित समुदायों के अस्तित्व के लिए निवेश में वृद्धि हुई है। यह कम वंचित समूहों पर 10 लाख यूएसडी के बराबर किए गए निवेश के दोगुना लोगों की जिंदगी बचाता है।

अध्ययन के अन्य प्रमुख तथ्य:

अध्ययन बताता है कि गरीब समूहों के बीच जीवन बचाने में किए गए सुधार, इन देशों में बाल मृत्युदर को गैर गरीब समूहों की तुलना में तीन गुना कम करने में मदद करती है। गरीब समूहों में मदद पहुंचना जीवन को बचाने के संबंध में 1.8 गुना ज्यादा प्रभावी रहता है।

इस अध्ययन के लिए छह प्रमुख स्वास्थ्य संबंधी व्यवधानों को चुना गया, ताकि उच्च प्रभाव वाले मातृत्व, नवजात और शिशु स्वास्थ्य व्यवधानों के संकेतों का पता चल सके। इसमें हैं, कीटनाशकों से लड़ने में सक्षम बिस्तर में उपयोग होने वाले जाल का प्रयोग, स्तनपान की जल्दी शुरुआत, प्रसवपूर्व देखभाल, सभी टीकाकरणों को लिया जाना, प्रसव के दौरान एक पेशेवर जन्म सेवक की उपस्थिति और डायरिया, बुखार और निमोनिया के दौरान बच्चे की देखभाल करना शामिल हैं।

यूनिसेफ के कार्यकारी निदेशक एंथोनी लेक ने कहा, “सबसे ज्यादा गरीब बच्चों के स्वास्थ्य में निवेश की शक्ति नए प्रमाणों को प्रस्तुत करती है, जोकि 2010 में यूनीसेफ द्वारा एक अनौपचारिक रूप से किए गए आंकलन को सही ठहराती है कि सबसे ज्यादा गरीब बच्चों के पास जीवन बचाव, उच्च प्रभाव वाले स्वास्थ्य व्यवधानों के साथ उच्च स्तर का निवेश पहुंचना अच्छे नतीजे देगा।”

अध्ययन की यह रिपोर्ट ऐसे समय में आया है, जब विश्व के तमाम देशों की सरकारें सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने की ओर लगातार प्रयासरत हैं।

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