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वैश्विक प्रेषित धन-प्राप्त करने वाली देशों की सूची में भारत का स्थान पहला

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यूएन की ताजा रिपोर्ट के अनुसार विदेश में काम करने वाले प्रवासी भारतीयों ने पिछले वर्ष भारत में 62.7 अरब डॉलर भेजे हैं। इस दौरान दूसरे देशों से धनराशि पाने (रिमिटेंस) के लिहाज से भारत ने चीन को पीछे धकेलते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया।

संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कार्यक्रम (आईएफएडी) के एक अध्ययन में यह बात सामने निकलकर आई है कि पूरे विश्व से लगभग 200 प्रवासियों ने भारत में अपने परिवारों को 445 मिलियन डॉलर भेजे। पिछले दशक के दौरान रेमीटेंस की दर 4.2 फीसदी की औसत वार्षिक वृद्धि से आगे बढ़ी है। 2007 में जहां यह 296 मिलियन डॉलर थी वहीं 2016 में बढ़कर यह 445 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गई।

2016 में रेमिटेंस हासिल करने वाले देशों में भारत 62.7 बिलियन डॉलर के साथ पहले नंबर पर है। इसके बाद चीन (61 बिलियन डॉलर), फिलीपींस (30 बिलियन डॉलर) और पाकिस्‍तान (20 बिलिनय डॉलर) का स्‍थान है। 2007 में भारत इस मामले में चीन के बाद दूसरे नंबर पर था। वैश्विक दृष्कोण से देखा जाए तो इस समय लगभग 200 मिलियन प्रवासी कामगार 800 मिलियन परिवारों को रेमिटेंस के जरिए मदद करते हैं। प्रवासी लोगों के जरिए विदेशों से भारत भेजा गया पैसा सुरक्षित व स्थायी भी होता है।

वाजिब है कि विदेशों में कार्यरत भारतीयों की ओर से भेजे गए धन की वजह से देश की अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है। भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था चीन को पीछे छोड़ रही है, जहां भारत की अर्थव्यस्था में तेजी का दौर है, जबकि चीन की अर्थव्यवस्था में मंदी जारी है। ऐसे में अर्थशास्त्रियों की ओर भारत के स्वर्णिम युग के आने की कही गयी भविष्यवाणी सच साबित होती दिख रही है।

भारत और चीन के बीच खुले तौर पर कई क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा लंबे समय से चली आ रही है, कुछ समय तक चीन की विश्व बिरादरी में बादशाहत का दौर था। हालांकि अब उसमें गिरावट का दौर शुरु हो चुका है। ऐसे में भारत की ओर से उस खाली जगह को भरा जा रहा है। यह भारत की विश्व पटल पर बढ़ती शक्ति को दर्शाता है।

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