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आकाश के नीले चंदोवे के नीचे दम तोड़ती ईमान (व्ययंग)-अंकित कुमार 

आकाश

“आज तो अपना अर्धशतक पूरा करके रहूँगा…”, जंगली हाथियों के हमले की ख़बर अख़बार में पढ़ते ही आकाश के मन में इच्छा प्रबल हो गई। वो भूल गया कि पिछली बार उसने ऐसा सोचा था तो उसके पिताजी ने मना करते हुए उसकी बंदूक भी छीन लिया था। रात के अंधेरे में दबे पाँव आकाश घर से निकल पड़ा, कुछ ही पलों में वह गाँव के बाहर उस छोर पर था जहां की ज़िक्र अख़बार में था। सितारों की झिलमिलाती पलकें, सफ़ेद शुक्र तारा धुँधली-धूमिल किंतु मौजूद, सारे पक्षी चहचहाना बंद कर घोसलों में नींद के आगोश में जा चुके थे। बिलकुल काली और शांत रात, हाँ कभी-कभी हवाओं के शोर शांति में विघ्न ज़रुर डाल रही थी। 

वह हौले हौले हिम्मत बटोरते हुए आगे बढ़ रहा था, अभी कुछ दूर आगे ही गया था कि उसे हाथियों का झुंड दिख गया। उसने अपने जिस शिकार पर ध्यान केन्द्रित किया वह झुंड में सबसे छोटा था, जिसकी सुरक्षा ख़ुद हथिनी कर रही थी। आकाश ने बंदूक ताना और सीधा गोली दाग दिया। उसकी आवाज़ शांति को चीरती हुई  दूर तक गयी, हाथी का बच्चा तड़पता कराहता जमीन पर गिरा था, और बाकी हाथियों के बीच खलबली मच गयी, वे ईधर-उधर भागने लगे। आवाज़ सुन रेंजर रामलाल भागता हुआ वहाँ पहुंचा और आकाश को पकड़ लिया। आकाश ने उसे चेतावनी दी, “तुम बहुत बड़ी भूल कर रहे हो…मैं कौन हूँ तुम्हें पता नहीं है”। उसने जवाब में कहा कोई भी हो आप लेकिन हाथियों को नहीं मार सकते और उसने उसे अपने घर में बंद कर दिया।

 उसने सोचा कि उसे उसके इस काम पर प्रशंसा मिलेगी शायद कुछ इनाम भी मिल जाए, उधेड़बुन में सो गया। लेकिन सुबह उसे पुलिस ने जगाया और पकड़ा कर थाने ले आई। सामने रोब जमाते एसएसपी साहब बैठे थे, हवलदार को हुक्म हुआ लिखो यह  रेंजर बच्चों के अपहरण कांड में शामिल है, सबूत के तौर पर अपहृत बच्चा इसके घर से पाया गया है। रेंजर को समझ कुछ नहीं आ रहा था, वह टकटकी निगाह से साहब को देखे जा रहा था, कि अचानक सब पलट कैसे गया…, फ़िर उसकी नजर मेज पर रखी सूटकेस पर पड़ी, और समझ गया कि नोटों की वजन ईमान से अधिक होती है।  

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  1. ईमान, वायु में मिलने वाली ऑक्सीजन के जैसी है जिसकी मात्रा कम तो है लेकिन सब सही है।

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