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साइबर संकट (जनसत्ता)

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सैंतालीस दिनों के भीतर एक बार फिर हुए साइबर हमले से कई मुल्कों के सरकारी विभागों और निजी संस्थाओं में सर्वर ठप हो गया और कामकाज रुक गया। विडंबना यह है कि अमेरिका, ब्रिटेन और रूस जैसे तकनीक में काफी आगे बढ़े देशों के वैज्ञानिक भी इस मर्ज का न तो कोई इलाज तलाश पाए हैं और न ही हमलावर-हैकरों की कोई सुरागकशी कर पा रहे हैं। इसलिए माना जा रहा है कि यह खतरा अभी और बढ़ सकता है। साइबर विशेषज्ञों ने बताया है किकंप्यूटरों को लॉक करने का यह खेल कुछ दुष्ट लोग फिरौती वसूलने के लिए कर रहे हैं। यों यह खेल किसी दिन आतंकी समूह या किसी देश के विद्रोही गुट भी कर सकते हैं। मंगलवार को जो रेंसमवेयर हमला हुआ उसमें यूक्रेन और रूस सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं, लेकिन अमेरिका के भी कई सर्वर इसकी चपेट में आए हैं। भारत के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ गुलशन राय ने किसी शिकायत से इनकार किया है, लेकिन सबसे बड़े कंटेनर पोर्ट जेएनपीटी के एक टर्मिनल का संचालन सर्वर ठप होने से रुक गया। जेएनपीटी के प्रवक्ता ने कहा कि संचालन सुचारुकरने के लिए परंपरागत तरीके से काम करना पड़ा।
आइटी विशेषज्ञों ने इस वायरस की पहचान ‘गोल्डन-आइ’ या ‘पैटव्रैप’ के रूप में की है। यह पिछले साल सामने आए ‘पेट्वा’ का ही उन्नत रूप है। इससे सबसे ज्यादा प्रभावित यूक्रेन हुआ, जहां पूरा बैंकिग सिस्टम ठप हो गया। विमान सेवाएं भी बाधित हुर्इं। यूक्रेन और रूस की अस्सी से ज्यादा कंपनियां प्रभावित हुर्इं। इसके अलावा डेनमार्क, ब्रिटेन और अमेरिका की कई दिग्गज कंपनियों के सर्वर ठप हो गए। असल में, यह पिछले महीने हुए वानाक्राई रेंसमवेयर जैसा हमला है। विशेषज्ञों का मानना है कि वायरस पिछली कमजोरियों का ही फायदा उठा रहा है। हेलेंस्की स्थित एक साइबर सुरक्षा कंपनी ने दावा किया है कि एक बार फिर वानाक्राई हर ओर दहशत फैला रहा है।
यूक्रेन की एक मीडिया कंपनी के मुताबिक हमलावरों ने उनका सिस्टम अनलॉक करने के लिए तीन सौ बिटकॉइन की फिरौती मांगी है। अमेरिका में एक बिटकॉइन की कीमत 1710 डॉलर और भारतीय मुद्रा में 1.09 लाख रुपए है। बिटकॉइन एक तरह की आभासी मुद्रा है। जैसे यूरो, डॉलर, रुपए आदि खरीदे जा सकते हैं, वैसे ही इसे भी खरीदा जा सकता है। इसका इस्तेमाल हवाला, आतंकी गतिविधियों और कालेधन को बदलने में ज्यादा हो रहा है। आॅनलाइन भुगतान के अलावा, इसे परंपरागत मुद्रा में भी बदला जा सकता है। इसकी खरीद-बिक्री के लिए एक्सचेंज भी हैं। कंप्यूटर नेटवर्क के जरिए इस मुद्रा से, बिना किसी मध्यस्थ के, लेन-देन किया जा सकता है। इसे डिजिटल वालेट में रखा जाता है। भारत के संदर्भ में माना जाता है कि चीनी और पाकिस्तानी हैकर अक्सर हमले की फिराक में रहते हैं। इसलिए सावधानी बहुत जरूरी है। हालांकि भारत सरकार ने पिछले साइबर हमले के बाद ही उच्चस्तरीय समिति बना दी थी, लेकिन जानकारों का कहना है कि खतरा बना हुआ है। इसके निशाने पर सभी तरह के छोटे-बड़े उद्योग आ सकते हैं। एहतियाती तौर पर कहा जा रहा है कि अनजाना मेल या लॉटरी से संबंधित मेल खोलने की कोशिश न करें। एंटी वायरस को अपडेट करते रहें।

सौजन्य – जनसत्ता।

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