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हमारे समय के दो पहलू

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सत्यव्रत
बुरा है हमारा यह समय

क्योंकि

हमारे समय के सबसे सच्चे युवा लोग

हताश हैं,

निरुपाय महसूस कर रहे हैं खुद को

सबसे बहादुर युवा लोग

सबसे ज़िन्दादिल युवा लोगों के

चेहरे गुमसुम हैं

और

आँखें बुझी हुई।

एकदम चुप हैं

सबसे मज़ेदार किस्सागोई करने वाले

युवा लोग,

एकदम अनमने से।

बुरा है हमारा यह समय

एक कठिन अँधेरे से

भरा हुआ,

खड़ा है

सौन्दर्य, नैसर्गिक, गति और जीवन की

तमाम मानवीय परिभाषाओं के ख़िलाफ़,

रंगों और रागों का निषेध करता हुआ।
अच्छा है हमारा यह समय उर्वर है

क्योंकि यह निर्णायक है

और इसने

एकदम खुली चुनौती दी है

हमारे समय के सबसे उम्दा युवा लोगों को,

उनकी उम्मीदों और सूझबूझ को,

बहादुरी और ज़िन्दादिली को,

स्वाभिमान और न्यायनिष्ठा को।

“खोज लो फ़िर से अपने लिए,

अपने लोगों के लिए

जिन्हें तुम बेइन्तहां प्यार करते हो,

और आने वाले समय के लिए

कोई नयी रौशनी”

-अन्धकार उगलते हुए

इसने एकदम खुली चुनौती दी है

जीवित, उष्ण ह्रदय वाले युवा लोगों को।

कुछ नया रचने और आने वाले समय को

बेहतर बनाने के लिए

यह एक बेहतर समय है,

या शायद, इतिहास का एक दुर्लभ समय।

बेजोड़ है यह समय

जीवन-मरण का एक नया,

महाभीषण संघर्ष रचने की तैयारी के लिए,

अभूतपूर्व अनुकूल है

धारा के प्रतिकूल चलने के लिए।

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