Breaking News
Home / न्यूज़ पटल / एडिटोरियल / आर्टिकल / हम भी तो बनें स्मार्ट (हिन्दुस्तान)

हम भी तो बनें स्मार्ट (हिन्दुस्तान)

Spread the love

सरकार सभी शहरों के समग्र विकास की योजना के मकसद से शुरू की गई स्मार्ट सिटी की कल्पना में एक कदम और आगे बढ़ी। स्मार्ट शहरों की एक और सूची जारी हुई, जिसमें उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद, झांसी और अलीगढ़ के साथ बिहार के पटना और मुजफ्फरपुर और उत्तराखंड की राजधानी देहरादून भी शामिल हैं। तिरुवनंतपुरम सबसे ऊपर और छत्तीसगढ़ की नई राजधानी नया रायपुर दूसरे नंबर पर है। योजना के संभावित सौ शहरों में से अब तक नब्बे का चयन हो चुका है। सूची में जम्मू-कश्मीर की दोनों राजधानी जम्मू और श्रीनगर को तो जगह मिल गई है, पर उत्तर प्रदेश का वीवीआईपी माना जाने वाला शहर रायबरेली का नंबर इस बार भी नहीं आया। इस बार 40 शहरों के नाम की उम्मीद थी, पर बंगाल और मुंबई के इस रेस से खुद को बाहर कर लेने के कारण दस शहरों का चयन आगे के लिए मुल्तवी हो गया है। इस बार चयनित शहरों में से 26 ने अपने प्लान में शहरी गरीबों के लायक आसान अवासीय योजनाओं, 26 ने स्कूल और अस्पताल, तो 29 ने सड़क परियोजनाओं को अपनी प्राथमिकता में रखा है।
इस योजना का आशय ऐसे शहर विकसित करने से है, जहां पानी, बिजली और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं की बहुत बेहतर व्यवस्था होगी। कचरा प्रबंधन से लेकर यातायात, ई-गवर्नेंस, नागरिक सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उच्च प्राथमिकता में होंगी। यानी सब कुछ स्मार्ट होगा। योजना की घोषणा मोदी सरकार के पहले बजट में हुई थी, जिसके तहत चुने गए शहरों को अगले पांच साल तक हर वर्ष सौ करोड़ की मदद का वादा है। परिकल्पना यह है कि अगले पांच साल की अवधि में एक लक्ष्य लेकर इन शहरों में ऐसी विश्व स्तरीय सुविधाएं दे दी जाएं कि ये बाकी के लिए मिसाल बन जाएं। इसीलिए इसमें वर्ल्ड क्लास ट्रांसपोर्ट सिस्टम के साथ 24 घंटे बिजली-पानी, सरकारी विभागों में सिंगल विंडो सिस्टम, स्मार्ट एजुकेशन सिस्टम, अच्छे पर्यावरण और बेहतर सुरक्षा के साथ सुरुचिपूर्ण मनोरंजन का वादा है।
यहां सबसे जरूरी सवाल है कि क्या यह सब सरकार की योजनाओं और उसकी फंडिंग मात्र से हो जाएगा? कोई भी बदलाव तभी संभव है, जब उसे स्वीकार करने वाले लोग स्वयं को बदलें। मसलन, पर्यावरण के अनुकूल और स्वच्छता की कसौटी पर हम तभी खरे उतर पाएंगे, जब हम अपने आसपास और अपनी जिम्मेदारियों का ख्याल रखेंगे। अब तक हम सब कहीं न कहीं इसे नजरअंदाज करते आए हैं। इसके लिए हमें सरकारी और गैर-सरकारी का भेद भी अपनी सोच से मिटाना होगा। एक बात और, जिसके लिए सबको तैयार रहना होगा। विकास हमेशा अपना मोल मांगता है। यानी बुनियादी सुविधाएं बदलेंगी, तो स्वाभाविक है कि इन सुविधाओं के स्मार्ट व सतत-व्यावहारिक उपभोग के लिए आपको न सिर्फ स्मार्ट बनना होगा, वरन विकास की मूलभूत शर्त के अनुरूप इसके लिए कुछ भुगतान को भी तैयार रहना होगा। ठीक उसी तरह, जैसे कोई एक्सप्रेस वे बन जाने के बाद आपकी राह आसान होती है, आपका समय और ईंधन बचता है और व्यवस्था इसके लिए आपसे टोल टैक्स के रूप में एक छोटा सा भुगतान लेती है। जाहिर है, शहरों को स्मार्ट बनाने की प्रक्रिया में स्वच्छ जल के लिए नए ट्रीटमेंट प्लांट लगाने होंगे, निर्बाध बिजली के लिए बिजली घरों के अलावा छोटे स्तर पर न सिर्फ वितरण केंद्र बढ़ाने होंगे, बल्कि मूलभूत इन्फ्रास्ट्रक्चर भी बदलना होगा। स्वाभाविक है कि इससे सुविधाएं कई गुना परिष्कृत और बेहतर होकर सामने आएंगी। इसके लिए हमें मानसिक तौर पर भी तैयार रहना होगा। कोई भी स्मार्ट योजना तभी फलीभूत हो पाएगी।

सौजन्य – हिन्दुस्तान।

About Oshtimes

Check Also

बेरोज़गार हैं 40 प्रतिशत

बेरोज़गार हैं 40 प्रतिशत, कौन है इसका जि़म्मेदार? -मुनीश मैन्दोला

Spread the love32Sharesसरकार का 2 करोड़ प्रति वर्ष नयी नौकरियों के सृजन का वादा भी …