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हॉस्पिटल में डॉक्टर नहीं मिले तो सिविल सर्जन पर होगी कार्रवाई

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राँची : टीपू खान : मुख्य सचिव राजबाला वर्मा ने सभी जिलों के सिविल सर्जनाें को सभी हॉस्पिटलों एवं स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टरों एवं पारा मेडिकल स्टॉफ की उपस्थिति सुनिश्चित करने के ऑर्डर दिए हैं। उन्होंने कहा है कि यदि डॉक्टर और पारा मेडिकल स्टॉफ अनुपस्थित पाये गये तो इसके लिए सिविल सर्जन जिम्मेदार होंगे। चीफ सेक्रेटरी ने आज स्वास्थ डिपार्टमेंट की रिव्यू मीटिंग में ये बातें कहीं।

सीएस ने कहा कि किसी भी राज्य में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं विकास का मेरुदंड होती हैं और स्वास्थ्य सेवा अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे यह सुनिश्चित करना हमारा पहला दायित्व होना चाहिये। वर्मा ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया कि जिला स्तर पर 24 घंटे आपात चिकित्सा दल किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिये तैयार रहना चाहिये। इसे विभाग सुनिश्चित करें।साथ ही मुख्य सचिव ने कहा कि संथाल परगना के गोड्डा, पाकुड़, दुमका तथा साहिबगंज से कालाजार जैसी गंभीर बीमारी को जड़मूल से नष्ट करने के लिये अभियान मोड में लगातार काम करने की जरूरत है। चूंकि इन इलाकों में स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता का अभाव है, इसलिये सुदूर ग्राम में रहने वाले ग्रामीणों को बीमारी से बचने के लिये उपाय बताये जायें।

कालाजार के मरीजों को छह हजार की सहायता : कालाजार के मरीजों को रोडमैप के अनुसार चिकित्सा सेवा को उपलब्ध करायी जाये और उन्हें 6000 रूपये की सहायता राशि तुरंत उपलब्ध कराई जाय। मुख्य सचिव ने पदाधिकारियों को निदेश दिया कि मिट्टी के बने हुए घर की ऐसी दीवार जो बराबर अंधेरे में रहती हैं, जहां कालाजार के कीटाणु आसानी से पलते हैं वहां नियमित अंतराल पर दवाओं का छिड़काव हो इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो। मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य में मलेरिया की रोकथाम के लिये अगस्त माह से वर्ल्ड बैंक की ओर से उपलब्ध कराये जाने वाले 63 लाख 80 हजार मच्छरदानी का वितरण कराया जायेगा। विभाग इसका वितरण और इसके उपयोग का पर्यवेक्षण करें।

मलेरिया से बचाव के हों उपाए : जागरूकता और एहतियात बरतने से मलेरिया से बचा जा सकता है। दुख की बात है कि एक लाख से अधिक मलेरिया के मरीज प्रतिवर्ष पाये जाते हैं तथा इनमें से कई की जान चली जाती है। समीक्षा के क्रम में मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य में टीबी के मरीज नियमित दवाओं का सेवन करें इस हेतु डोर टू डोर कैंपेन चलायें तथा टीबी के मरीजों की पहचान कर उन्हें दवा उपलब्ध कराई जाय। साथ ही कम्यूनिटी वॉलंटियर को प्रशिक्षित करें और ऐसे मरीजों के बलगम के नमूनों का संग्रह करायी जाय जिन्हें दो सप्ताह से अधिक तक खांसी की शिकायत है ताकि प्रखंड स्तर पर उपलब्ध माइक्रो स्कोप सेंटर में जांच की जा सके।

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