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आसमानी आफत से सालाना जाती हैं सैंकड़ों जान

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                                                                                  “आइये बारिशों का मौसम है।,

                                                                                  इनदिनों चाहतों का मौसम है”

 

 

बिटटू खान

 

बारिश का मौसम यूँ तो सुहावना होता है,कलाकारो, गायकों और कवियों की माने तो रोमांस और प्यार के लिए बरसात के मौसम को प्रतीक के रूप में माना जाता है। वैसे भी भारी गर्मी झेलने के बाद बारिश की फुहार इंसान के साथ साथ सभी जीवों को भली लगती है और सभी प्राणी इसका आनन्द उठाते हैं।

पर सुहावने मौसम के साथ साथ इस मौसम के कुछ साइड इफ़ेक्ट्स भी हैं। जो कई बार प्राण घातक भी सिद्ध होती हैं। जिसमे सर्वप्रमुख है ठनका गिरना या बज्रपात होना।

झारखंड में आसमानी आफत की वजह से सालाना सैंकड़ों जान चली जाती हैं। हर साल सैंकड़ों जानें वज्रपात से जाती हैं. राज्य सरकार के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने लोगों को सतर्क रहने के लिए दिशा निर्देश जारी किया है। कई ऐसे उपाय हैं जिन्हें अपना कर घर या बाहर  ठनके से बचाव किया जा सकता है.

 

 बिजली गिरनों को लेकर कई भ्रांतियां भी फैली हुई हैं।

पहले ऐसा माना जाता था कि पूर्व जन्म का पाप ढो रहे लोगों पर बिजली गिर गई जिससे उनको मुक्ति मिल गई। इसलिए लोग ऐसे लोगों को सहानुभूति के नजर से नहीं देखते थे, लेकिन समय के साथ मान्यताएं कमजोर पड़ने लगी अब इन बातों का कोई महत्व नहीं रह गया। लेकिन अभी भी बिजली गिरने को लेकर कई तरह की भ्रांतियों चर्चा में रहती है।

भ्रांतियां

– गोबर पर गिरने से गोबर सोना बन जाता है।

– मकान पर गिरने से छत की सरिया अष्टधातु की हो जाती है।

– पीपल, पाकड़, बरगद, तरकुल जैसे पेड़ों पर बिजली ज्यादा गिरती है

– किसी चीज पर बिजली गिरने के बाद वहां दोबारा नहीं गिरती।

 -बिजली चमकने पर जोर से खांसने पर बिजली आसपास नहीं गिरेगी।  इत्यादि।

 

ठनका यानि आसमानी बिजली गिरना एक प्राकृतिक आपदा है। इससे गिरने से रोका तो नहीं जा सकता है। लेकिन जानकार बताते हैं कि सावधानी बरतने से ठनका से होने वाले जानमाल के नुकसान से कुछ हद तक बचा जा सकता है।

आकाशीय बिजली अक्सर जानलेवा साबित होती है। खेतों में काम करने वाले, पेड़ों के नीचे पनाह लेने वाले, तालाब में नहाते समय बिजली चमकने पर इसकी आगोश में आने की संभावना अधिक रहती है। पर कुछ उपाय ऐसे हैं जिससे आकाशीय बिजली से बचा जा सकता है।  सभी घरों एवं विद्यालयों में तड़ित चालक लगवाया जाना इसका सबसे प्राथमिक उपाय है।

 

जब आप घर के भीतर हों तो बिजली से संचालित उपकरणों से दूर रहें, तार वाले टेलीफोन का उपयोग नहीं करना चाहिए। खिडकियां व दरवाजे बंद कर दें बरामदे और छत से दूर रहें। इसके अलावा ऐसी वस्तुएं जो बिजली के सुचालक हैं उनसे भी दूर रहना चाहिए। धातु से बने पाइप, नल, फव्वारा, वाश बेसिन आदि के संपर्क से दूर रहना चाहिए। इसी तरह जब आप घर के बाहर हैं तो भी आपको कुछ एहतियात बरतने चाहिए।

 

 ऐसे करें बचाव जब घर के भीतर हों

  • बिजली के उपकरणों से दूर रहें. मोबाइल का उपयोग नहीं करें.
  •  खिड़की दरवाजे बंद कर दें. छत, बालकोनी या बरामदे से दूर रहें.
  • धातु से बने पाइप, नल, फव्वारे, वाश बेसिन आदि से दूर रहें.
  •   बिजली मैकेनिक से कहकर घर में तडि़त चालक (यह एक प्रकार का एंटीना होता है, जो बिजली के दौरान अर्रि्थग का काम करता है.) लगवाना चाहिए।

ये बरतें सावधानी

  • – आंधी आते ही टीवी, रेडियो, कंप्यूटर सभी का मोडेम और पॉवर प्लग निकाल दें।
  • – घर में सारे पर्दे लगा देने चाहिए.
  • – इलेक्ट्रिक अप्लाएंसेस को ऑफ कर देना चाहिए।
  • – इस दौरान मोबाइल यूज करने से बचें.
  • – नंगे पैर फर्श या जमीन पर कभी खड़े ना रहें।
  • – बिजली उपकरणों से दूर रहें.
  • – बादलों के गरजने के समय घर के अंदर हैं तो घर के अंदर ही रहें।
  • – बिजली पैदा करने वाली चीजों से दूरी बनाकर रखें रेडिएटर, फोन, धातु के पाइप, स्टोव इत्यादि.
  • – पेड़ के नीचे या खुले मैदान में जाने से बचें।

जानकार बताते हैं कि धरती पर पहुंचने पर आकाशीय बिजली बेहतर कंडक्टर(सुचालक)को तलाशती है, जिससे वह गुजर सके। धातु और पेड़ बेहतर सुचालक होते हैं। बिजली अक्सर इन्हीं में से पृथ्वी में जाने का रास्ता चुनती है।  बारिश खासकर जब बादल चमकते हों तो पेड़ के नीचे खड़ा नहीं होना चाहिए। धातु से बनी वस्तु से भी दूरी बनाकर रखना चाहिए। मोबाइल का उपयोग नहीं करना चाहिए।मोबाइल की तरंग से भी आकाशीय बिजली उसकी तरफ आकर्षित होती है। जिससे उसकी चपेट में आने की आशंका काफी रहती है।

 

 ऐसे करें बचाव जब हों घर से बाहर

 

  • ठनका गिरने की आशंका हो तो पेड़ के नीचे नहीं खड़े हों.
  • बिजली के खंभों से दूर रहें.
  • जंगल में हैं तो नीचले स्थान या घाटी क्षेत्र में रहें.
  • तलाब, नदी, पोखर आदि में हैं तो तत्काल बाहर आ जाएं.
  • किसी पहाड़ी की चोटी पर नहीं रहें
  • आप घर के बाहर हों, तो ऊंचे वृक्ष के समीप नहीं रहें. चूंकि ऊंचे वृक्ष बिजली को आकर्षित करते हैं.
  • बरसात होने के बाद जहां पर ठनका गिरने की संभावना हो वहां पर ठनका से बचाव के लिए सूखी जमीन खोजकर उसी स्थान पर ठहरना चाहिए।
  • समूह में खड़े होने के बजाय अलग- अलग हो जाएं।
  • किसी मकान में आश्रय लेना बेहतर है।
  •  सफर के दौरान अपने वाहन में ही रहें। मजबूत छत वाले वाहन में रहें, खुली छत वाले वाहन की सवारी न करें।
  • बाहर रहने पर धातु से बने वस्तुओं का उपयोग न करें। बाइक, बिजली या टेलीफोन का खंभा तार की बाड़ और मशीन आदि से दूर रहें।
  • तालाब और जलाशयों से दूर रहें यदि आप पानी के भीतर हैं, अथवा किसी नाव में हैं तो तुरंत बाहर आ जाएं ।
  • सिर के बाल खड़े हो जाएं तो समझिए बिजली गिरेगी
  • यदि आकाशीय बिजली चमक रही है और आपके सिर के बाल खड़े हो जाएं व त्वचा में झुनझुनी होने लगे तो फौरन नीचे झुककर कान बंद कर लें। क्योंकि यह इस बात का सूचक है कि आपके आसपास बिजली गिरने वाली है।

 

गाज गिरने पर क्या करें

बिजली का झटका लगने पर जरूरत के अनुसार व्यक्ति को सीपीआर, कार्डियो पल्मोनरी रेसिटेंशन यानि कृत्रिम सांस देनी चाहिए। तत्काल प्राथमिक चिकित्सा देने की व्यवस्था करनी चाहिए।

तो “आइये बारिशों का मौसम है” इस मौसम का खुलकर आनन्द लें और साथ रखें कुछ सावधानियां ताकि हम सुरक्षित भी रहे।

 

 

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