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रोजगार पैदा करने वाला हो एफडीआई (पत्रिका)

भारत की अर्थव्यवस्था में एक अनोखा अंतर्विरोध दिखाई दे रहा है। बीते कुछ दशकों में, खास तौर से विकासशील देशों में यह पाया गया है कि मेक्रो इकॉनोमिक्स में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आर्थिक विकास और रोजगार सृजन के लिए रामबाण है। ज्यादा एफडीआई आने का मतलब देश की आर्थिक नीतियों की स्वीकार्यता के साथ […]

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क्या रोजाना पेट्रोल-डीजल मूल्य बदलाव उचित है?

सरकार ने तय किया है कि 16 जून 2017 से सरकारी पेट्रोल कंपनियां पेट्रोल-डीजल के दामों में रोजाना फेरदबदल करेंगी। इसकी सूचना अखबारों, एसएमएस आदि के जरिए ग्राहकों तक पहुंचाई जाएगी। क्या इस फैसले का ग्राहकों को लाभ मिलेगा? या मात्र कंपनियां ही फायदे में रहेंगी, ग्राहकों के हाथ कुछ नहीं आने वाला? यदि कंपनियों […]

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यह खामोशी क्यों?

आर्थिक सुधारों की लम्बी-चौड़ी कवायद के बावजूद रोजगार के अवसरों में कमी देश की आर्थिक सेहत के लिए शुभ संकेत नहीं माना जा सकता रिजर्व बैंक के सर्वे के मुताबिक नौकरी के मामले में देश 2013 के बाद सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। तमाम सरकारी दावों के बावजूद मेक इन इण्डिया और स्टार्ट […]

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बंगला मोह सबसे न्यारा

व्यंग्य राही की कलम से रामलीला प्रदर्शन में सर्वप्रथम नारदमोह लीला खेली जाती है। सब जानते हैं कि देवर्षि नारद का मोहभंग करने के लिए विष्णु ने मोहिनी बन उन्हें मोहित कर लिया और मुंह कपि यानी बंदर सा बनाकर स्वयंवर में भेज दिया था। जैसे नारद को रूप मोह हुआ, एक कंजूस को धन […]

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ब्रिटेन के चुनावों में कंजर्वेटिव पार्टी बहुमत पाने में विफल गठबंधन सरकार बनाने की कोशिशें

डेविड कैमरून द्वारा जनमत संग्रह के जरिए यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के बाहर आने के बाद प्रधानमंत्री पद से त्यागपत्र देने के परिणामस्वरूप कंजर्वेटिव पार्टी की ‘टैरेसा मैरी मे’ 1& जुलाई, 2016 को ब्रिटेन की दूसरी महिला प्रधानमंत्री बनीं। उनसे पहले ‘आयरन लेडी’ के नाम से प्रसिद्ध मारग्रेट थैचर 4 मई 1979 से 28 नवम्बर […]

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ब्रिटेन से निकले जनादेश के मायने

ब्रिटेन के मतदाताओं ने खंडित जनादेश ही नहीं दिया, पूरे यूरोप के समीकरणों को उलझा दिया है। प्रधानमंत्री थेरेसा मे को उस धारा की उपज माना जाता था, जो ब्रेग्जिट यानी ब्रिटेन को यूरोपीय संघ से अलग करने के आंदोलन से पैदा हुई थी। उन्हीं की कंजरवेटिव पार्टी के पिछले प्रधानमंत्री डेविड कैमरन नहीं चाहते […]

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विकास की बड़ी जिम्मेदारी है इस आयोग पर

एन के सिंह तीन साल पहले योजना आयोग को खत्म करके उसकी जगह एक थिंक टैंक के तौर पर नीति आयोग का गठन किया गया था। आलोचक यह सवाल अब तक उठाते हैं कि क्या यह बदलाव मुनासिब साबित हुआ? इस सवाल का जवाब ढूंढ़ने से पहले यह बताना चाहूंगा कि योजना आयोग के तीन […]

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पेरिस समझौते से हटकर अपना प्रभाव खो देगा अमेरिका

पेरिस जलवायु समझौते से अमेरिका का हटना विश्व के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि अमेरिका विश्व में दूसरे नंबर का कार्बन उत्सर्जक देश है। 196 देशों ने सहमति-पत्र पर हस्ताक्षर किए थे, परंतु जून 2017 तक सिर्फ 148 देशों ने इसकी पुष्टी की है। हालांकि ट्रम्प ने यह भी कहा है कि वे इस […]

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पश्चिम बंगाल में ममता की भाषा और भाषा की ममता

पश्चिम बंगाल के दर्शनीय किंतु अशांत रहने वाले पहाड़ी जिले दार्जीलिंग में हिंसा का भड़कना मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की भाषा नीति का विरोध तो है ही इसके पीछे ममता के राजनीतिक वर्चस्व को चुनौती देने और अपना वर्चस्व कायम रखने की कोशिश भी है। यह बात न तो गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के नेता विमल गुरंग […]

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हरिशंकर परसाई के खजाने से: लाल बुझक्कड़

हरिशंकर परसाई विपक्ष हमेशा जनता के सामने इसी बात का रोना रोता रहता है कि जो भी खराब कराया वह सत्ता पक्ष ने कराया। और विपक्ष यदि सत्ता में आ जाए तो भी इसी तरह का रोना रोता रहे तो एक दिन जनता यह जरूर सोचने लग जाती है कि सभी खराब और अच्छा फलां […]

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आंदोलन की आंच

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के मंदसौर दौरे के साथ ही किसान आंदोलन को लेकर सियासी तापमान चढ़ गया। भाजपा की निगाह में राहुल का दौरा किसानों के मुद्दे का राजनीतिकरण करने का प्रयास है। केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू ने इसे फोटो अवसर यात्रा कह कर राहुल के दौरे का मजाक उड़ाने की भी कोशिश की। […]

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