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विकास दिखना चाहिए (खरी-खरी) -उदय मोहन पाठक

विकास

चाहे परिस्थितियां जो भी हों, विकास स्वप्न के बजाय धरातल पर दिखना चाहिए। गर्मी का मौसम, बिजली और पानी की समस्या से परेशान लोग। दोनो के पीछे के कारण पानी की कमी है – जैसे डेमो और बड़े जलाशयों में पानी की कमी। बिजली कैसे पैदा हो? जलापूर्ति कैसे हो? …

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ऐसा आने वाला हो (कटाक्ष)  -उदय मोहन पाठक

उदय मोहन पाठक की कविता

ऐसा आने वाला हो  (कटाक्ष)  -उदय मोहन पाठक अब और नही हूँ, मैं कुछ भी कहने वाला। चुनावी समर अब है, अंत होने वाला सभी महारथियों का ध्यान सत्ता सुख की ओर राजतिलक की ओर लगता है कि यह प्रजातंत्र नही, राजतंत्र का सिंहासन पाना हो इन पांच सालों में …

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आई.टी. सेल्स : झारखंड में सोशल-मीडिया की लडाई में झामुमो सब पर भारी

झामुमो आई.टी. सेल्स

झारखंड में फासीवादियों ने जहाँ एक तरफ गोदी मीडिया के माध्यम से अपने विकास का झूठा प्रचार कर जनता को भ्रमित करने का प्रयास किया तो वहीं सोशल-मीडिया जैसे व्हाट्सऐप, फेसबुक ‍ट्विटर, यूट्यूब इत्यादि के ज़रिए तरह-तरह की झूठी खबरें फैला लोगों के बीच नफ़रत को बढ़ाने का काम किया …

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ज्योतिराव फुले-स्त्री मुक्ति व जाति उन्मूलन आन्दोलन के मजबूत योद्धा

ज्योतिराव फुले

ज्योतिराव फुले – स्त्री मुक्ति के पक्षधर व जाति उन्मूलन आन्दोलन के मजबूत योद्धा को उनके जन्‍मदिवस पर नमन, जिन्होंने मानवता को पुनर्जीवित करने के लिए अपना तमाम जीवन समर्पित कर दिया। लगभग 170 वर्ष पहले फुले ने बालिकाओं के लिए पहला विद्यालय खोलने का निर्णय लिया था। विधवा विवाह …

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Generic Medicine : जेनेरिक दवाएं आज क्यों बेअसर हो गयी है

generic medicine

आज इलाज के लिए दवाएँ, जाँच की विभिन्न तकनीकें व ऑपरेशन के विकसित तरीक़े मौजूद हैं। ला इलाज बीमारी को छोड़ दें, तो भी इलाजयोग बीमारियों की वजह से हर साल करोड़ों लोग मर रहे हैं। जैसे- इलाज और दवाओं के महँगा होना, सरकार द्वारा सही ढंग से स्वास्थ्य सेवाएँ …

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अम्बेडकर आवास योजना : सरकार ने विधवायों को उनके आवास से वंचित रखा

अम्बेडकर आवास योजना jharkhand

डॉक्टर भीम राव अंबेडकर की 125वीं जयंती के अवसर पर झारखंड की रघुबर सरकार ने केंद्र के इशारे पर, समाज की विधवाओं के लिए “ अम्बेडकर आवास योजना ” की शुरूआत मीडिया के विज्ञापन समेत ढोल-नगाड़े बजा कर की थी। इस योजना को जन कल्याणकारी योजना बताते हुए सरकार ने …

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चुनाव की उड़ान :  उदय मोहन पाठक (संपादक)

चुनाव

देश का सबसे बड़ा त्योहार चुनाव आ चुका है। लोग चुनाव परिचर्चा में जुड़ गए हैं। ये परिचर्चा फाग की मस्ती की तरह है। कहीं रंग भरी परिचर्चा है, तो कहीं कीचड़ से सनी हुई। होली में ऐसा प्रतीत हुआ कि सभी नेतागण पूरी तरह से होली के मूड में …

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अन्तराष्ट्रीय दलित खिलाड़ी को क्यों प्रताड़ित कर रही है रघुबर सरकार  

अन्तराष्ट्रीय दलित खिलाड़ी

अन्तराष्ट्रीय दलित खिलाड़ी को प्रताड़ित करती भाजपा  हमारे समाज के चेहरे पर आज भी जाति व्यवस्था और जातिगत उत्पीड़न एक बदनुमा दाग है। साथ ही एक ऐसी त्रासदी भी है जो ख़त्म होने के बजाय भाजपा के शासनकाल में तीव्रता से सड़ाँध मारती दिखती रही। वैसे तो देशभर में दलितों …

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फ़ेक-न्यूज़ व्हाट्सप्प के गलियारे से निकलकर विज्ञान के शोधालय तक पहुंचा

फ़ेक-न्यूज़

फ़ेक-न्यूज़ अब अपना चोला बदलता हुआ  फ़ेक-न्यूज़ यानि झूठ को सच बनाने का खेल, व्हाट्सप्प से निकलकर अब विज्ञान के शोधालय तक का सफ़र तय कर चुका है। आपको याद होगा 2014 में प्रधान-सेवक ने अपने बयान में गणेश जी को प्लास्टिक सर्जरी का पहला उदाहरण बताया था। उसके बाद …

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मौजूदा सत्ता के बूट (जूते) भारतीय संविधान से भी मजबूत

सत्ता के बूट

क्या मौजूदा सत्ता के बूट (जूते) भारतीय संविधान से भी ज्यादा मजबूत हैं  विकास के नाम पर भारत में आज नैतिकता के पतन की जो बेचैनी वर्तमान सत्ता में देखी जा रही है यकीनन ऐतिहासिक है और हिंदुस्तान के गरिमा को कलंकित करती है। कहते हैं कि राजनीति में सत्ता …

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13 पॉइण्ट विभागीय रोस्टर के ख़ि‍लाफ़ देश भर के एससी/एसटी/ओबीसी सड़क पर

आज के मौजूदा भाजपा सरकार में ‘रोस्टर’ शब्द भी दफ्तरों से निकल कर सड़कों पर ठुमके लगा रहा है। 13 पॉइण्ट विभागीय रोस्टर सिस्टम के ख़ि‍लाफ़ पुरे देश भर में एससी/एसटी/ओबीसी व बुद्धिजीवी आन्दोलन कर रहे हैं। ऐसे में इसके पहलुओं को समझना बेहद ज़रूरी हो जाता है। आरक्षण के …

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घरेलू मज़दूरों को आखिर न्याय कब देगी यह सरकार

घरेलू मज़दूरों

सोशल अलर्ट की 2008 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार देश भर में घरेलू मज़दूरों की कुल संख्या 10 करोड़ के क़रीब थी। जो कि बढ़ते शहरीकरण के वजह से अबतक लगभग तीगुनी हो गयी होगी। इसमें अधिक संख्या औरतों की है, साथ ही निसंदेह लाखों बच्चे भी शामिल हैं। …

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युद्ध की ज़रूरत जितनी मोदी को है उतनी ही इमरान खान को भी

युद्ध की ज़रूरत

युद्ध की ज़रूरत फासीवादी सरकारों को क्यों  आज सीमित युद्ध की ज़रूरत जितनी भाजपा-मोदी को है उतनी ही इमरान खान को भी है। उसके पॉपुलिस्ट नारों की भी हवा मोदी के जुमलों की तरह चन्द महीनों में ही निकल गयी है। आवाम अब उसे सेना की कठपुतली समझती है। भारत …

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आदिवासियों-मूलवासियों के साथ भाजपा ने फिर किया विश्वासघात

आदिवासियों-मूलवासियों

आदिवासियों-मूलवासियों के साथ ऐसा क्यों किया इस सरकार ने  देश में पुलवामा आतंकी हमले की घटना के बाद जो कुछ हो रहा है उस पर ठीक से विचार करते हुए आग्रह है कि वह इस लेख को ध्यान से पढ़ें और विचार करें। सेक्युलर, तरक्की पसंद, लोकतांत्रिक चेतना वाले नागरिकों …

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महागठबंधन के फोर्मुले से प्रतीत होता है कि कांग्रेस भाजपा को हलके में ले रही है

झारखंड महागठबंधन

खबर सुर्खियां बटोर रही है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के घर बैठ कर झारखंड के तमाम विपक्षी दलों ने महागठबंधन के फॉर्मूले की गुत्थी सुलझा लिया है़। इस फार्मूले के अंतर्गत कांग्रेस -7,  झामुमो -4, झाविमो -2 एवं राजद -1 सीट पर आम सहमति से चुनाव लड़ेंगे। यह भी कहा …

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Unemployment : सरकार के दावों के बावजूद बेरोजगारी का गहराता संकट

Unemployment

भारतीय जनता पार्टी ने 2014 के चुनाव प्रचार में रोजगार को मुख्य मुद्दा बनाया था। हर साल राज्य में रोजगार (Unemployment) के भरमार या अवसर निर्माण के नाम पर कई योजनाओं की शुरुआत की। ऐसे में सरकार द्वारा सीएमआईई की रिपोर्ट सार्वजनक न करना यही साबित करता है कि सेंटर …

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कडक चाय का मायना ही देश में अब बदल चुका है – jharkhandkhabar

कडक चाय

कडक चाय का मायना ही देश में अब बदल चुका है। सुब्हमण्य स्वामी जेटली को ही सबसे बडे अपराधी बता रहे हैं तो योगी कह रहे है कि मोदी तो कभी राम मंदिर बनाना ही नहीं चाहते। गडकरी इशारा करते है, कारपोरेट उनके पीछे खडा हो जाये तो वे मोदी …

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अभाविप (ABVP) में आदिवासी छात्रों के होने के राजनीतिक मायने

अभाविप ( ABVP )

सरकार ने पारा शिक्षकों से सीधा कहा हड़ताल समाप्त किये बिना कोई बात नहीं होगी जैसे ख़बरों के बीच रांची विश्व विद्यालय छात्र संघ चुनाव में कुल 80 पदों के लिए चुनाव हुए जिसमे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के प्रत्यासियों ने 80 पदों में से 42 पदों में जीत कर …

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खरसावाँ गोलीकांड : आजाद भारत का झारखण्डी जलियावाला बाग़ काण्ड

खरसावाँ गोलीकांड

अलग झारखण्ड राज्य के लिए हमारे पूर्वज नौजवानों ने आजाद भारत की सबसे बड़ी शहादत ‘खरसावाँ गोलीकांड’ में दी, जिसे आनेवाली हजारों पीढियां ससम्मान याद करती रहेगी। साथ ही जब भी कभी कोई गलत मंशा से झारखण्ड में कदम रखेगा, खरसावाँ गोलीकांड के शहीदों की राजनीतिक चेतना और समर्पण से …

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आदिम जनजातियां हासिये पर: इनके हक़ के लिए बुलंद आवाज की जरूरत!

आदिम

वर्तमान झारखंड में अनुसूचित जनजाति की सूची के अंतर्गत 32 जनजातियों में से 9 आदिम जनजाति की श्रेणी में आते हैं। झारखंड में 1961 के दशक में इन जनजातियों का आबादी करीब 2,50,000 थी जो वर्तमान घटकर महज 2,00,000 के भीतर रह गई है। अद्यतन आंकड़े के अनुसार इस समय …

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