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Uday Mohan Pathak

प्रणाम : चारेां महानुभावों को मेरा प्रणाम! –उदयमोहन पाठक (अधिवक्ता)

प्रणाम

एक किसान कही जा रहा था। रास्ते में उसे चार आदमी मिले। किसान ने उन्हें स्वभाववश प्रणाम किया और आगे बढ़ गया। कुछ आगे बढ़ते ही चारों यह कहकर आपस में लड़ने लगे कि किसान ने मात्र उसे प्रणाम किया। उन्होंने किसान को बुलाकर पूछा भाई तुमने किसे प्रणाम किया? …

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हे नारद, मेरी सुनो (कविता) – उदय मोहन पाठक (अधिवक्ता)

हे नारद

हे नारद ‘ : आजादी के इतने वर्ष बीत जाने जाने के बाद भी जब शोषित, पीड़ित, गरीब, लोगों को देखता हूँ तो मन में एक भाव आता है कि कोई ऐसा बहुजन हिताय कार्य करने वाला मसीहा अवतरित हो जो इनके पीड़ा को हर ले और समाज में समानता …

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हर साल की भांति इस साल भी (व्यंग्य) –उदयमोहन पाठक (अधिवक्ता)

हर साल की भांति इस साल भी

हर साल की भांति इस साल भी यह संवाद सूनते-सुनते अरसा गुजर गया। कभी उकताहट होती है कि लोग इसे बदलते क्यों नहीं? एक जगह ग्रामीण मेला लगा हुआ था। मेले में ही माइॅक से आवाज गूँज रही थी। ‘‘ हर साल की भांति इस साल भी’ सुनकर अच्छा लगा …

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ढूंढते रह जाओगे… (अपनी छोटी-बड़ी समस्यायों के समाधान) -उदय मोहन पाठक

ढूंढते रह जाओगे...

ढूंढते रह जाओगे… दस-दस फीट के दस गड्ढे खेादने के बजाय एक सौ फीट का कुआॅं खोद लो, पानी जरूर मिलेगा। अन्यथा छोटे-छोटे गड्ढों में पानी ढूॅंढ़ते रह जाओगे कम उम्र से ही लोग अपनी छोटी-बड़ी समस्या के समाधान के लिए ईश्वर को ढूंढते रहते हैंं, शायद कभी किसी समस्या …

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सहज व्यापार : यह व्यवसाय बहुत ही लाभप्रद है – उदयमोहन पाठक (अधिवक्ता)

सहज व्यापार

सहज व्यापार : एक सज्जन हाल में ही गुरु-दीक्षा लेकर आए। दो-चार सप्ताह तक उनमें शिष्यत्व का भाव रहा। एक सच्चे सेवक की भाँति, जो भी उनके समीप जाता, उसके समक्ष गुरुवचन की थाली परोस देते। जब उन्हें पता चला कि उनके करीबी लोग उनकी बातों से प्रभावित हो रहे …

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सरकार आपनार की दरकार

सरकार आपनार की दरकार लेबर कोरे अर्जन करी निज परिवारेर भरण पोषण करी सुखी  आमार घर  संसार सरकार आपनार की दरकार आमार बो स्वप्न सुंदरी आमार छेले एमोन परी बाल लीला देखी आनंद भारी प्रभु लीला ते भ्रमित संसार सरकार आपनार की दरकार आमार माँ प्रत्यक्ष देवी आमार बाबा समाज …

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