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देश में ₹1 की सजा का इतिहास -विशेष 2020

सुप्रीम कोर्ट ने वकील प्रशांत भूषण को अवमानना के मामले में ₹1 का जुर्माने का सजा सुनाया

 

सुप्रीम कोर्ट ने वकील प्रशांत भूषण को अवमानना के मामले में ₹1 जुर्माने का सजा सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट के वकील और आप के पूर्व नेता प्रशांत भूषण ने भी कोर्ट का ₹1 की सजा स्वीकार कर लिया और पुनर्विचार के लिए याचिका दाखिल करने की बात कही।

सुप्रीम कोर्ट के लंबे इतिहास मे अनेक अवमानना के फैसले हुए, पर सुप्रीम कोर्ट ने बहुत ही महँगा और अतिआवश्यक समय लेकर एक ₹1 जुर्माने का कोई फैसला सुने हो, ऐसा नहीं दीखता है। अगर हिसाब लगाया जाए तो सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का फैसला देने में जितना वक्त लगाया, उसमें सैकड़ों ग़रीबों के पेंडिंग केस पर निर्णय और न्याय हो सकता था। 

देश का करोड़ों रुपया खर्च कर ₹1 का जुर्माना हासिल किया जाना अपने आप में इतिहास बन गया है। आज भारत में करोड़ों केश बकरी चुराने, मुर्गी मारने, जेब काटने यहाँ तक की खीरा चुराने के लिए लड़े जा रहे हैं। करोड़ों लोग इस तरह के छोटे-मोटे मामले में फंस कर आज वर्षों से जेल में सड़ रहे हैं। क्यों सुप्रीम कोर्ट ऐसे लोगों के लिए ₹1 का जुर्माना मुकर्रर कर उन्हें रिहा करने का फैसला नहीं सुनाती।

₹1 की सजा

क्या अब भविष्य में भी देशवासियों द्वारा कोर्ट अवमानना किए जाने पर ₹1 की ही सजा मुकर्र होगी

बड़ा सवाल यह है कि क्या एक आम आदमी द्वारा कोर्ट का अवमानना किए जाने पर भी सुपीम कोर्ट ₹1 का सजा सुनाती? और दूसरा बड़ा सवाल कि क्या अब भविष्य में कभी भी कोई देशवासी में यदि कोर्ट की अवमानना करने का गलती करता है, तो उसकी भी सजा केवल ₹1 ही होगी। 

मसलन, भारत में अगर इस देश की जन सामान्य लोगों को इतिहास लिखने का मौका मिलेगा, तो वे वर्तमान सरकार के इतिहास को किस रौशनाई से लिखेंगे यह कह पाना मुश्किल है। क्योंकि मौजूदा सरकार में लोकतंत्र को जिस तरह ध्वस्त कर आरजकता फैलाई गयी है। इसके चारों स्तंभों को एक-एक कर क्षतिग्रस्त करते हुए नयी पटकथा तैयार की गयी है, निश्चित ही तानाशाही राज का आगाज है। यदि देश बहुसंख्यक जनता अब भी नहीं चेतती है तो उन्हें परिणाम भुगतने के लिए जल्द तैयार हो जाना चाहिए।  -।।बिद्रोही।।

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