in , , , , , , , ,

आदिम जनजातियां हासिये पर: इनके हक़ के लिए बुलंद आवाज की जरूरत!

आदिम

वर्तमान झारखंड में अनुसूचित जनजाति की सूची के अंतर्गत 32 जनजातियों में से 9 आदिम जनजाति की श्रेणी में आते हैं। झारखंड में 1961 के दशक में इन जनजातियों का आबादी करीब 2,50,000 थी जो वर्तमान घटकर महज 2,00,000 के भीतर रह गई है। अद्यतन आंकड़े के अनुसार इस समय में 79 हजार आदिम जनजाति परिवार हैं।

अनुसूचित जनजाति : बेदिया, बाथुड़ी, चेरो, गोंड, गोड़ाईत, खरवार, किसान, कोरा, लोहरा, महली, खोंड, मुंडा, उरांव, कोल, कवर, बैगा, करमाली, हो, भूमिज, संथाल, खड़िया, बंजारा, चिक बड़ाईक

आदिम जनजाति : बिंझिया, असुर, बिरहोर, बिरजिया, माल पहाड़िया, सौरिया पहाड़िया, कोरवा, सबर, परहिया

आदिम जनजाति
आदिम जनजातियों की स्थिति दयनीय

आदिम जनजातियों की संख्या कम होने के कारण वे अपना संख्या बल पर खुद के लिए विधायक चुनने में असमर्थ है और सांसद चुनने की बात तो इनके लिये कल्पना से परे है। झारखण्ड के 12 जिले पूर्ण रूप से पांचवी अनुसूचित क्षेत्र है और तीन जिले आंशिक रूप से पांचवी अनुसूचित क्षेत्र हैं।

रांची जिला, लोहरदगा जिला, गुमला जिला, सिमडेगा जिला, लातेहार जिला, पूर्वी सिंहभूम जिला, पश्चिमी सिंहभूम जिला, सराइकेला –खरसावाँ जिला, पाकुड़ जिला, जामतारा जिला, दुमका जिला, साहेबगंज जिला, पलामू जिला– सतबरवा प्रखंड की रबदा और बकोरिया पंचायतें, गढ़वा जिला –भंडरिया प्रखंड, गोड्डा जिला–सुन्दरपहाड़ी और बोवारिजोर प्रखंड।

संवैधानिक प्रावधान है कि जिस राज्य में पांचवी अनुसूचित क्षेत्र हैं वहां आदिवासी सलाहकार परिषद् का गठन किया जाना अनिवार्य है। साथ ही आदिवासियों के हित से सम्बंधित नीति एवं कानून बनाते समय इस आदिवासी सलाहकार परिषद से परामर्श लेना संवैधानिक रूप से अति आवश्यक है। परन्तु व्यावहारिक रूप से इनदिनों झारखंड में ऐसा होता नहीं देखा जा रहा है।

ऐसी स्थिति में सवाल इस बात का है कि संसदीय प्रणाली में इन आदिम जनजातियों की आकांक्षाओं और आशाओं को व्यक्त करने के लिए इनका प्रतिनिधित्व कौन करेगा? आदिवासी सलाहकार परिषद् में इनका एक भी प्रतिनिधि मौजूद नहीं होने की स्थिति में अब इनके लिये आवाज कौन उठाएगा? अबतक के नीति और नियम निर्धारण प्रक्रिया में उन्हें शामिल न कर योजनाओं और कार्यक्रमों को सीधे उनपर थोप दिए जा रहे है। इन आदिम जनजातियों के लिए एक प्राधिकरण का गठन किया जाना चाहिए जो इनके लिए बनाये जाने वाले कल्याणकारी योजनाओं और कार्यकर्मों में सलाह, निष्पादन और निगरानी में हिस्सेदारी सुनिश्चित करे।

What do you think?

Comments

Leave a Reply

GIPHY App Key not set. Please check settings

Loading…

0
झारखंड भाजपा

झारखंड भाजपा ने स्पष्ट कर दिया कि उनका अगला मुख्यमंत्री भी गैर आदिवासी !

खरसावाँ गोलीकांड

खरसावाँ गोलीकांड : आजाद भारत का झारखण्डी जलियावाला बाग़ काण्ड