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आदिवासियों-मूलवासियों के साथ भाजपा ने फिर किया विश्वासघात

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आदिवासियों-मूलवासियों के साथ ऐसा क्यों किया इस सरकार ने 

देश में पुलवामा आतंकी हमले की घटना के बाद जो कुछ हो रहा है उस पर ठीक से विचार करते हुए आग्रह है कि वह इस लेख को ध्यान से पढ़ें और विचार करें। सेक्युलर, तरक्की पसंद, लोकतांत्रिक चेतना वाले नागरिकों को विचार करना और भी ज़रुरी हो जाता है। इस मुद्दे पर संदेह करने के पर्याप्त कारण हैं! पुलवामा हमले के बाद मोदी और उनके सभी मंत्री-सांसद धुँआधार रैलियाँ कर रहे हैं! आलम तो यह था कि सर्वदलीय बैठक बुलाकर मोदीजी खुद रैली में चले गए। भाजपा के मंत्री और सांसद मारे गए जवानों के शवों के साथ रोड शो कर रहे हैं! यहाँ तक कि मुख्य धारा की मीडिया भी बहती गंगा में हाथ धोते हुए लाशों पर बैठ टीआरपी महाभोज में जुटी है!

खुद को तथाकथित हिंदुत्ववादी कहने वाले साइबर गुंडे और भाड़े के टट्टू जो जनता के दबाव में मुद्दाविहीन हो पिछले कुछ महीनों से शांत थे, वे इस मामले को लेकर पूरी आक्रामकता के साथ सोशल मीडिया पर सक्रिय हो गए हैं! केवल दो नारे दे रहे हैं, “आम चुनाव को रोक दो और पाकिस्तान को ठोंक दो” और दूसरा “देश को बचाना है, मोदीजी को फिर से लाना है!” धार्मिक आधार पर वोटों का ध्रुवीकरण तेज़ी से हो रहा है! और उन्मादी देशभक्ति की लहर पर सवार होकर फिर से सत्ता तक पहुँचने के प्रयास किये जा रहे हैं! और वन अधिनियम में आये फैसले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।

13 फरवरी को उच्चतम न्यायालय में वनाधिकार अधिनियम के तहत सुनवाई हुई जिसमे न्यायालय ने 20 फरवरी को आदेश में कहा कि अगली सुनवाई होने तक जंगलों में वन पट्टे पर बसने वाले आदिवासियों-मूलवासियों को बल पूर्वक हटा दिया जाए। गौरतलब है कि 13 फरवरी को सरकार के तरफ से वन में बसने वाले गरीब आदिवासियों के पक्ष रखने कोई नहीं गया। केंद्र सरकार वनाधिकार कानूनों को षडयंत्र के तहत शिथिल करने का काम इसलिए कर रही है ताकि भू-माफियाओं, खनन माफियाओं को सहयोग किया जा सके।

वन क्षेत्र में खनन के लिए पहले ग्राम सभा की मंजूरी जरूरी होती थी परन्तु अब इस सरकार ने उस नियम को हाशिये पर धकेल बिना ग्राम सभा के अनुमति के खनन पट्टा भू-माफियाओं, खनन माफियाओं को दिए जा रहे हैं। और यह बड़े पैमाने पर किये जा रहे हैं। इस मुद्दे पर सरकार के कोई पक्ष न रखने से स्पष्ट प्रतीत होता है कि झारखंड के 24 हजार आदिवासियों-मूलवासियों परिवार और देश भर में लगभग 10 लाख परिवार से अधिक यह चंद पूंजीपति और माफिया इन्हें अधिक प्यारे है, इसलिए इस सरकार ने आम गरीब आदिवासियों-मूलवासियों को छोड़ कर माफिया का साथ दिया।

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