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अन्तराष्ट्रीय दलित खिलाड़ी

अन्तराष्ट्रीय दलित खिलाड़ी को क्यों प्रताड़ित कर रही है रघुबर सरकार  

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अन्तराष्ट्रीय दलित खिलाड़ी को प्रताड़ित करती भाजपा 

हमारे समाज के चेहरे पर आज भी जाति व्यवस्था और जातिगत उत्पीड़न एक बदनुमा दाग है। साथ ही एक ऐसी त्रासदी भी है जो ख़त्म होने के बजाय भाजपा के शासनकाल में तीव्रता से सड़ाँध मारती दिखती रही। वैसे तो देशभर में दलितों को कुएँ में स्नान करने के कारण, नवविवाहित जोड़े को मन्दिर की सीढ़ियाँ चढ़ने के कारण ना सिर्फ बुरी तरह मारा-पीटा जाता रहा है बल्कि उसे नंगा करके घुमाया जाता है व वीडियो भी बनाकर वायरल किया जाता रहा है। जब इससे भी दिल न भरा तो इनका आर्थिक-सामाजिक बहिष्कार तक किया जाता रहा। लेकिन यह त्रासदी तब और भी भयावह हो जाता है जब सरकारी तंत्र इन्हें खुले तौर पर इन्हें प्रताड़ित करने से न चुके।

रिपोर्ट: प्रतिभा चाहे गाँव में छुपी हो या शहर में, विकट परिस्थितियों में भी बिना मोहताज हुए दुनिया के समक्ष प्रस्तुत हो ही जाती है। ऐसा ही कुछ हजारीबाग, कटकमसांडी प्रखंड, असधिर ग्राम के एक दलित ड्राइवर धनेश्वर राम के पुत्र आकाश कुमार रबिदास ने 24 फरवरी से 2 मार्च तक देहरादून में पहली राष्ट्रीय मास्टर गेम्स शूटिंग चैम्पियनशिप में एक व्यक्तिगत स्वर्ण और एक टीम सिल्वर जीत कर कथन को सच कर दिखाया था। इस गौरवपूर्ण कहानी में दिलचस्प पहलु यह था कि इस जवान ने झारखंड के 30 वर्षों की प्रथा को एक उधार ली हुई राइफल के सहारे मात दी और यह अन्तराष्ट्रीय दलित खिलाड़ी इस राज्य का एकमात्र अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज बन गया।

आकाश ने जर्मनी, कुवैत, चेक गणराज्य और दक्षिण कोरिया में कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया और कुवैत में जूनियर एशियन मीट के दौरान व्यक्तिगत कांस्य पदक भी जीते। इस अंतरराष्ट्रीय मीट प्रतिस्पर्धा में सफल रहने के कारण उन्हें राइफल प्रदान की गई। वानगी देखिये जो रायफल की राशि उसे फरवरी में ही मिल जानी चाहिए थी वह चप्पल के साथ एड़ियाँ भी घीस जाने के बावजूद अबतक नहीं मिल सका है।

आकाश के समाज के लोगों का कहना है कि उसे दलित बिरादरी के होने के कारण सरकार घृणावस उसके साथ ऐसा कर रही है। यह सरकार ब्राह्मणवाद विचारधारा से ग्रसित है और वह नहीं चाहती कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर किसी दलित बच्चे का नाम चमके। मौजूदा भाजपा और उसके अनुषंगी दल जातिगत भेदभाव का फायदा उठाकर आपस में लड़ाती रही हैं और घोषित तौर पर सत्ता में आने के बाद आरक्षण को सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से ख़त्म व एससीएसटी एक्ट को कमज़ोर करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाती रही।

मसलन, जो सरकार खुद का चेहरा चमकाने के लिए किसी भी योजना की आधे से ज्यादा राशि विज्ञापन पर कुर्बान कर देती हो व जनता को राष्ट्रवाद समझाते हुए अपने चहेते पूंजीपतियों पर सब्सिडी के नाम पर अरबों लूटती हो, वह सरकार दलित-आदिवासी, खिलाड़ी, युवा, विद्यार्थी, किसान, गरीब, छोटे व्यापारी आदि को अधिकार देने के नाम पर इतना बेबस क्यों नजर हैं? जाहिर है ऐसे में एक झारखंडी अन्तराष्ट्रीय दलित खिलाड़ी के साथ भाजपा सरकार द्वारा ऐसा बर्ताव किया जाना उसके राजनैतिक दिवालियेपन को दर्शाता है।

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