in , ,

अम्बेडकर आवास योजना : सरकार ने विधवायों को उनके आवास से वंचित रखा

अम्बेडकर आवास योजना jharkhand

डॉक्टर भीम राव अंबेडकर की 125वीं जयंती के अवसर पर झारखंड की रघुबर सरकार ने केंद्र के इशारे पर, समाज की विधवाओं के लिए “ अम्बेडकर आवास योजना ” की शुरूआत मीडिया के विज्ञापन समेत ढोल-नगाड़े बजा कर की थी। इस योजना को जन कल्याणकारी योजना बताते हुए सरकार ने झारखंड की विधवाओं को पहाड़ी क्षेत्रों में घर बनाने के लिए 75 हजार व अन्य क्षेत्रों में घर बनाने के लिए 70 हजार रुपये वित्तीय सहायता प्रदान करने की घोषणा की थी। साथ ही मौजूदा सरकार ने यह भी कसीदे पढ़े थे कि यह योजना झारखंडी समाज में समानता और सामंजस्य बनाने में मील का पत्थर साबित होगी जिससे संविधान में अंकित विकास के पैमाने को साकार किया जा सकेगा। अम्बेडकर आवास योजना का उद्देश्य विधवाओं के पति की मृत्यु के बाद उनकी ज़िंदगी आसान बनाने के दृष्टिकोण से वाकई यह एक बढ़िया योजना थी।

एक आरटीआइ के ज़वाब के अनुसार सरकार द्वारा अम्बेडकर आवास योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2016 से 2019 तक लगभग 19,000 घरों को बनाने का लक्ष्य रखा गया था, जबकि 21574 विधवाओं ने रजिस्टर किया जबकि 17486 विधवाओं की भूमि चयनित हुई, लेकिन अब जब यह सरकार वेंटिलेटर पर अंतिम सांसे ले रही है तो आंकड़े बता रहे है कि अबतक ये मात्र 1452 घर ही बन पाए हैं जो कुल योजना का केवल 8 प्रतिशत है। साथ ही पूरे प्रदेश में में स्थिति यो दयनीय है ही लेकिन पाकुड़, पलामू, कोडरमा, जामताड़ा व् गढ़वा में इस योजना की स्थिति बहुत ही गंभीर है, जबकि पहले इन्सटॉलमेंट भुक्तान में साहेबगंज व् रांची की स्थिति खराब रही तो अंतिम में दुमका, साहेबगंज पूर्वी सिंहभूम की स्थिति अति दयनीय रही। ऐसे में यह दिन की उजाले की तरह स्पष्ट है क़ी मोदी-रघुबर सरकार कि यह योजना भी जुमले से अधिक कुछ भी नहीं है।

बहरहाल, उपरोक्त आँकड़े मोदी-रघुबर मंडली के दावों की हकीकत बयाँ करने के लिए काफी हैं। यह साबित कर रहे हैं कि मोदी-रघुबर सरकार द्वारा जन-कल्याण, भ्रष्टाचार के ख़ात्मे, आदि के नाम पर की जाने वाली कार्यवाहियाँ केवल ड्रामेबाज़ी ही निकली हैं। एक तरफ जहाँ मोदी-रघुबर के ड्रामेबाज़ी के कारण यहाँ की विधवाओं को आवास से वंचित रहना पड़ा है और जो थोड़े बहुत मिले भी उसमे बिचौलियों की ही बल्ले-बल्ले रही। पूरे प्रकरण में जहाँ एक तरफ योजना के प्रति ड्रामा-मण्डली ने उदासीन रवैया दिखाया तो वहीँ उन्होंने क़ानून व्यवस्था को ताक पर रखते हुए देशी-विदेशी पूँजीपतियों को फ़ायदा पहुंचाया। और मोदी-रघुबर सरकार ने अन्य योजनायों की भांति इस योजना को भी बीच मझधार में छोड़ने वाली अपनी रघु कुल रीत यहाँ भी दोहरायी

What do you think?

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Loading…

0
चुनाव

चुनाव की उड़ान :  उदय मोहन पाठक (संपादक)

generic medicine

Generic Medicine : जेनेरिक दवाएं आज क्यों बेअसर हो गयी है