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झारखंड बीजेपी में दीपक प्रकाश व बाबूलाल के पदार्पण से स्थिति सुधरने के बजाय और बिगड़ी

14 बरस वनवास काट लौटे बाबूलाल, न उपचुनाव जीत पा रहे हैं और न ही दे पा रहे है पार्टी को दिशा

झारखंड बीजेपी
  • झारखंड बीजेपी – बाबूलाल व दीपक प्रकाश के नेतृत्व क्षमता को लेकर पार्टी के भीतर उठने लगे हैं कई सवाल
  • सांगठनिक फैसले व तीन उपचुनावों में लगातार मिली हार है मुख्य वजह 

झारखंड, 2019 – झारखंड की राजनीति में माना जा रहा था कि सत्ता से बेदखल बीजेपी, हार के कारणों का ईमानदारी से मंथन करेगी. और राज्य के ज़मीनी मुद्दों पर केन्द्रित हो फिर से राजनीति में अपनी साख़ को कायम करेगी. झारखंड बीजेपी में बड़े स्तर पर बदलाव भी हुए. जहाँ जेवीएम का विलय कर बाबूलाल मरांडी को पार्टी में शामिल किया गया. दीपक प्रकाश जैसे नेता को पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष का महत्वपूर्ण पद दिया. लेकिन, मौजूदा दौर में, झारखड बीजेपी का प्रदर्शन सोच से बिकुल उलट है. पार्टी राज्य के ज़मीनी मुद्दों से जुड़ाव बनाने के बजाय और दूर हो चुकी है. और उसके राजनीति में जुबानी ठिठोली, झूठ-भ्रम, मौकापरस्ती जैसी मानसिकता एक मात्र सच हो चला है.

तमाम परिस्थितियों के बीच कहा जा सकता है कि, दीपक प्रकाश व बाबूलाल के झारखंड बीजेपी में पदार्पण के बाद पार्टी की मुश्किलें घटने के बजाय बढ़ गयी हैं. और दोनों दिग्गज नेताओं के एंट्री के दौर से पार्टी में शुरू हुई अंतर कलह अब थमने का नाम नहीं ले रहा है. कार्यकर्ता मजबूरी बस चुप जरुर हैं, लेकिन अंदरखाने की हकीकत यह है कि दोनों महारथियों के कार्यशैली से पार्टी में अंतर विरोध के चरम पर पहुँच चुका है. बताया जाता है कि अंतर कलह का मुख्य वजह, दीपक प्रकाश और बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व शैली व उनकी नीतियां है. 

सांगठनिक बदलाव का फायदा ज़मीनी कार्यकर्ताओं के बजाय चंद चुनिन्दों को ही मिला 

पार्टी कार्यकर्ताओं का मानना है कि बाबूलाल व दीपक प्रकाश के नेतृत्व में झारखंड बीजेपी को लगातार चुनाव में हार मिल रही है. साथ ही पार्टी के पुराने समर्पित कार्यकर्ता, दिग्गज नेता-बुद्धजीवी व जेवीएम से आए नेताओं को दरकिनार किया जा रहा है. जिससे वह खुद को ठगा व गौण महसूस कर रहे हैं. ज्ञात हो, कमान संभालते ही दोनों बड़े नेताओं ने पार्टी में कई बड़े संगठनात्मक बदलाव के फैसले लिए. 

चूंकि, फैसले का फायदा सिर्फ चंद चुनिन्दा नजदीकियों को मिला है, इसलिए पार्टी के कार्यकर्ता – नेता फैसले से नाखुश हैं. जो पार्टी के भीतरी मुख्य वजह भी है. इस सच्चाई का बयान प्रेस कॉन्फ्रेंस में बैठने को लेकर पदाधिकारियों के बीच तीखी नोकझोंक का दृश्य कर देती है. जहाँ एक प्रदेश प्रवक्ता और पार्टी के मीडिया विभाग के पदाधिकारी दीपक प्रकाश की उपस्थिति में आपस में उलझ पड़े और मामले में प्रदेश अध्यक्ष का हस्तक्षेप न करना सत्य पर मुहर लगाती है. 

पार्टी कार्यकर्ताओं का यह भी मानना है कि दीपक प्रकाश के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद बनने के बाद उनके नेतृत्व में गिरावट आयी है. वह न कार्यकर्ताओं की शिकायतों को सुन रहे हैं बल्कि पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज भी कर रहे हैं. वहीं बीजेपी से नाता तोड़ जेवीएम का गठन करने वाले बाबूलाल मरांडी का भाजपा में वापसी बहुतों को नहीं भा रहा है. साथ ही अधिकांश बीजेपी नेता व कार्यकर्ता को बाबूलाल के साथ जेवीएम से आये अन्य नेताओं से भी निराशा है. क्योंकि, भाजपा में पार्टी के ज़मीनी नेताओं से अधिक आज जेवीएम से आये बाबूलाल के सहयोगियों की पार्टी में पूछ अधिक हो चली है.

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