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झारखंड में बिजली की हालत करेगी रघुबर सरकार की बत्ती गुल
झारखंड में बिजली की हालत

झारखंड में बिजली की हालत करेगी रघुबर सरकार की बत्ती गुल

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झारखंड में बिजली की हालत 

झारखंड में बिजली सुधार के नाम पर रघुबर सरकार लंबी-लंबी फेंकती रही हैं, कभी कहती है कि राज्य के पूरे गांवों में बिजली पहुंचा दी गई है, कभी कहती हैं कि काम जारी है, कभी कहती है कि बिजली की सेवा, नवम्बर तक सामान्य हो जायेगी, पर लक्षण वैसे दिखते नहीं। अभी की स्थिति ठीक इसके विपरीत नज़र आती है। झारखण्ड में बिजली की समस्या बद से बदतर होती जा रही है।

झारखंड में बिजली संचार झारखण्ड DISCOM (झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड) पर निर्भर करता है। जब देशभर के DISCOM को उधार मुक्त करने और संचार में होने वाले नुकसान को कम करने के लिए केंद्र ने UDAY योजना आरंभ की तो झारखण्ड इस योजना को मंजूरी देने वाला पहला राज्य बना। तमाम कोशिशों के बावज़ूद झारखण्ड DISCOM की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है, साथ ही तकनीकी एवं व्यवसायिक नुकसान, योजना द्वारा निर्धारित लक्ष्य से कोसो दूर है।

  • DISCOM के आंकड़ों के अनुसार पिछले 10 महीनो से लगातार झारखण्ड में सबसे ज्यादा बिजली की कटौती हुई है। हर महीने पूरे प्रदेश में औसतन 95:21 घंटे बिजली की कटौती होती है। दूसरे राज्यों से तुलना करने पर झारखंड का पिछड़ापन साफ़ नज़र आता है। वहीँ पूरे देश का औसत देखें तो हर महीने औसतन केवल 7:52 घंटे ही बिजली की कटौती होती है।
  • साल दर साल ये आंकडें और बदतर होते जा रहे है। पिछले साल की तुलना में इस साल प्रदेश में और भी अधिक बिजली कटौती दर्ज की गयी है।

झारखण्ड प्रदेश में अपार प्राकृतिक सम्पदा होने के बावजूद यहाँ बिजली उत्पादन का दर रघुबर राज में लगातार गिरता जा रहा है। जो झारखण्ड प्रदेश की बिजली उत्पादन क्षमता 2015 में 2579.86 MW थी, वह भाजपा सरकार के 3 साल में घट कर, 2017-18 में 1762.06 MW रह गयी है।

इसी का नतीजा है कि झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड ने बिजली की दरों में 30 फीसदी बढ़ोतरी करने का फैसला लिया है। इतना ही नहीं बोर्ड ने दरों में एकरूपता लाने की कवायद करते हुए ग्रामीण और शहरी उपभोक्ताओं के लिए समान दर निर्धारित करने का फैसला किया  है। हालांकि इसका कारण प्रतिवर्ष बिजली खरीदने और बेचने में 2200 करोड़ के रिसोर्स गैप को बताया जा रहा है।

एक ओर जहाँ बिहार जैसे पिछड़े राज्य के DISCOM योजना का फायदा उठा कर साल दर साल अपने नुकसान को कम कर रहें है, वहीँ झारखण्ड DISCOM के सुस्त रवैये के कारण यह नुकसान बढ़ता जा रहा है। और अपने सुस्त रवैये से रघुबर सरकार इस नुकसान का बोझ भोली-भाली आम जनता पर थोप रही है। कुल मिलाकर JBVNL और सरकार के फैलाये हुए रायते का खामियाजा झारखंडी जनता को भुगतना पड़ेगा।

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