Breaking News

आध्यात्म

आध्यात्म

शायद ही दुनिया में ऐसा कोई इंसान होगा जिसने गौतम का नाम न सुना हो। ज्यादातर लोग उन्हें बुद्ध के नाम से जानते हैं। इस धरती पर कई बार आध्यात्म की एक बड़ी लहर सी आई है। बुद्ध खुद ऐसी ही एक आध्यात्मिक लहर रहे हैं। संभवत: वह धरती के सबसे कामयाब आध्यात्मिक गुरु थे – उनके जीवन काल में ही उनके साथ चालीस हजार बौद्ध भिक्षु थे और भिक्षुओं की यह सेना जगह-जगह जाकर आध्यात्मिक लहर पैदा करती थी।

यशोधरा ने बच्चे को उनके सामने रखा, बच्चा लगभग आठ साल का था। उन्होंने बच्चे को बुद्ध के सामने रखते हुए कहा, ‘इसके लिए आपकी क्या विरासत है? आप और आपकी आध्यात्मिक बकवास! आप इसे क्या देकर जाएंगे?

उन दिनों उन इलाकों में आध्यात्मिक प्रक्रिया सिर्फ संस्कृत में ही सिखाई जाती थी, और संस्कृत भाषा की सुविधा एक खास वर्ग को ही उपलब्ध थी। दूसरों के लिए यह भाषा सीखना वर्जित था, क्योंकि इस भाषा को ईश्वर के पास पहुंचने का जरिया माना जाता था। हर किसी की पहुंच वहां तक नहीं थी। बुद्ध ने पालि भाषा में अपनी शिक्षा रखी जो उस समय की बोलचाल की भाषा थी। इस तरह उन्होंने हर तरह के लोगों के लिए आध्यात्मिकता के दरवाजे खोल दिया। और फिर आध्यात्मिकता ने एक विशाल लहर का रूप ले लिया।

एक रात वह अपनी पत्नी- अपनी युवा पत्नी और नवजात शिशु को छोडक़र आधी रात को घर से निकल पड़े। वो एक राजा की तरह नहीं निकले, बल्कि एक चोर की तरह निकले थे- रात में घर छोडक़र गए थे। यह कोई आसान फैसला नहीं था। वह एक ऐसी पत्नी से दूर नहीं जा रहे थे, जिसे झेलना उनके लिए मुश्किल हो रहा हो। वह ऐसी स्त्री से दूर जा रहे थे, जिससे वह बहुत प्यार करते थे। वह नवजात बेटे से दूर जा रहे थे, जो उन्हें बहुत प्यारा था। वह अपनी शादी की कड़वाहट की वजह से नहीं भाग रहे थे। वह हर उस चीज से भाग रहे थे, जो उन्हें प्रिय थी। वह महल के ऐशो-आराम से, एक राज्य के राजकुमार होने से, भविष्य में राजा बनने की संभावना से, वह उन सभी चीजों से भाग रहे थे, जिन्हें हर आदमी आम तौर पर पाना चाहता है। लेकिन वे अपनी जिम्मेदारियों से भागने वाले कोई कायर नहीं थे। यह एक इंसान के साहस और ज्ञान की तड़प का परिणाम था। उन्होंने अपना महल, अपनी पत्नी, अपना बच्चा, अपना सब कुछ त्याग दिया और ऐसी चीज की खोज में लग गए, जो अज्ञात थी।

महाप्रभु शिव जी के 18 रूप और नामों की कहानी।

शिव की लीलाओं की तरह शिव की महिमा भी अपरंपार है, जिसकी वजह से शिव के नाम भी निराले और अनेक हैं। पुराणों में शिव को कई नामों से पुकारा गया है, जिसका संबंध किसी न किसी घटना या उद्वार से जुड़ा हुआ है। कौन से नाम शिव के क्यों …

Read More »

सल्लेख यानी कडा तप 

सल्लेख किसे कहते हैं ?  सुख विहार क्या हैं?  शान्त विहार क्या हैं?  एक समय तथागत बुद्ध श्रावस्ती में अनाथपिण्डिक के आराम जेतवन में विहार करते थे।  वहां पर उन्होंने आयुष्मान महाचुन्द के एक प्रश्न का समाधान करते हुए कहा – –  ” संसार में आत्मवाद अथवा लोकवाद को लेकर …

Read More »

जात न पूछो साधु की पूछ लीजे ज्ञान…

” जात न पूछो साधु की पूछ लीजे ज्ञान, मोल करो तलवार का पड़ा रहने दो म्यान ” ये बातें मैंने नहीं कही बल्कि कबीर दास जी ने वर्षों पहले ही ये कह दिया था . लेकिन उन्होंने ये बात क्यों कहा था इसका पता करना जरूरी है ; शायद …

Read More »

​तीनदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन का आगाज आज से 

रूना शुक्ला। देश-विदेश से पहुंचेंगे कई विद्वान,जनता के वास्तु-ज्योतिष की भी होगी चर्चा आम जनता  6 से 9 बजे तक विद्वानों से मिल सकेंगे रांची : रांची में अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन का आयोजन  हरमू स्थित दिगम्बर जैन भवन  आयोजित की जा रही है ।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधानसभा अध्यक्ष दिनेश …

Read More »

आज के सुविचार

इस बात की चिंता मत करो की लोग आपके बारे में क्या सोचते हैं , वो तो इसमे ही व्यस्त है की आप उनके बारे मे क्या सोचते हैं……. This post was written by sanjay dash. The views expressed here belong to the author and do not necessarily reflect our …

Read More »

आज के सुविचार

जीवन का सबसे बड़ा गुरु वक्त होता है, क्योंकि वक्त जो सिखाता है, वो कोई नहीं सिखा सकता………….. This post was written by sanjay dash. The views expressed here belong to the author and do not necessarily reflect our views and opinions.

Read More »

ब्रह्मचर्य का जीवन जीना सहज है

कामवासना मानवमन की सबसे बड़ी दुर्बलता है । जिन तीन तृष्णाओं के कारण वह भवनेत्री में बंधा रहता है उसमें कामतृष्णा प्रथम है , प्रमुख है । माता पिता के काम संभोग से मानव की उत्पत्ति होती है । अतः अंतर्मन की गहराइयों तक कामभोग का प्रभाव छाया रहता है …

Read More »