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आई.टी. सेल्स : झारखंड में सोशल-मीडिया की लडाई में झामुमो सब पर भारी

झामुमो आई.टी. सेल्स

झारखंड में फासीवादियों ने जहाँ एक तरफ गोदी मीडिया के माध्यम से अपने विकास का झूठा प्रचार कर जनता को भ्रमित करने का प्रयास किया तो वहीं सोशल-मीडिया जैसे व्हाट्सऐप, फेसबुक ‍ट्विटर, यूट्यूब इत्यादि के ज़रिए तरह-तरह की झूठी खबरें फैला लोगों के बीच नफ़रत को बढ़ाने का काम किया …

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ज्योतिराव फुले-स्त्री मुक्ति व जाति उन्मूलन आन्दोलन के मजबूत योद्धा

ज्योतिराव फुले

ज्योतिराव फुले – स्त्री मुक्ति के पक्षधर व जाति उन्मूलन आन्दोलन के मजबूत योद्धा को उनके जन्‍मदिवस पर नमन, जिन्होंने मानवता को पुनर्जीवित करने के लिए अपना तमाम जीवन समर्पित कर दिया। लगभग 170 वर्ष पहले फुले ने बालिकाओं के लिए पहला विद्यालय खोलने का निर्णय लिया था। विधवा विवाह …

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चुनाव की उड़ान :  उदय मोहन पाठक (संपादक)

चुनाव

देश का सबसे बड़ा त्योहार चुनाव आ चुका है। लोग चुनाव परिचर्चा में जुड़ गए हैं। ये परिचर्चा फाग की मस्ती की तरह है। कहीं रंग भरी परिचर्चा है, तो कहीं कीचड़ से सनी हुई। होली में ऐसा प्रतीत हुआ कि सभी नेतागण पूरी तरह से होली के मूड में …

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अन्तराष्ट्रीय दलित खिलाड़ी को क्यों प्रताड़ित कर रही है रघुबर सरकार  

अन्तराष्ट्रीय दलित खिलाड़ी

अन्तराष्ट्रीय दलित खिलाड़ी को प्रताड़ित करती भाजपा  हमारे समाज के चेहरे पर आज भी जाति व्यवस्था और जातिगत उत्पीड़न एक बदनुमा दाग है। साथ ही एक ऐसी त्रासदी भी है जो ख़त्म होने के बजाय भाजपा के शासनकाल में तीव्रता से सड़ाँध मारती दिखती रही। वैसे तो देशभर में दलितों …

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13 पॉइण्ट विभागीय रोस्टर के ख़ि‍लाफ़ देश भर के एससी/एसटी/ओबीसी सड़क पर

आज के मौजूदा भाजपा सरकार में ‘रोस्टर’ शब्द भी दफ्तरों से निकल कर सड़कों पर ठुमके लगा रहा है। 13 पॉइण्ट विभागीय रोस्टर सिस्टम के ख़ि‍लाफ़ पुरे देश भर में एससी/एसटी/ओबीसी व बुद्धिजीवी आन्दोलन कर रहे हैं। ऐसे में इसके पहलुओं को समझना बेहद ज़रूरी हो जाता है। आरक्षण के …

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युद्ध की ज़रूरत जितनी मोदी को है उतनी ही इमरान खान को भी

युद्ध की ज़रूरत

युद्ध की ज़रूरत फासीवादी सरकारों को क्यों  आज सीमित युद्ध की ज़रूरत जितनी भाजपा-मोदी को है उतनी ही इमरान खान को भी है। उसके पॉपुलिस्ट नारों की भी हवा मोदी के जुमलों की तरह चन्द महीनों में ही निकल गयी है। आवाम अब उसे सेना की कठपुतली समझती है। भारत …

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कडक चाय का मायना ही देश में अब बदल चुका है – jharkhandkhabar

कडक चाय

कडक चाय का मायना ही देश में अब बदल चुका है। सुब्हमण्य स्वामी जेटली को ही सबसे बडे अपराधी बता रहे हैं तो योगी कह रहे है कि मोदी तो कभी राम मंदिर बनाना ही नहीं चाहते। गडकरी इशारा करते है, कारपोरेट उनके पीछे खडा हो जाये तो वे मोदी …

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खरसावाँ गोलीकांड : आजाद भारत का झारखण्डी जलियावाला बाग़ काण्ड

खरसावाँ गोलीकांड

अलग झारखण्ड राज्य के लिए हमारे पूर्वज नौजवानों ने आजाद भारत की सबसे बड़ी शहादत ‘खरसावाँ गोलीकांड’ में दी, जिसे आनेवाली हजारों पीढियां ससम्मान याद करती रहेगी। साथ ही जब भी कभी कोई गलत मंशा से झारखण्ड में कदम रखेगा, खरसावाँ गोलीकांड के शहीदों की राजनीतिक चेतना और समर्पण से …

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आदिम जनजातियां हासिये पर: इनके हक़ के लिए बुलंद आवाज की जरूरत!

आदिम

वर्तमान झारखंड में अनुसूचित जनजाति की सूची के अंतर्गत 32 जनजातियों में से 9 आदिम जनजाति की श्रेणी में आते हैं। झारखंड में 1961 के दशक में इन जनजातियों का आबादी करीब 2,50,000 थी जो वर्तमान घटकर महज 2,00,000 के भीतर रह गई है। अद्यतन आंकड़े के अनुसार इस समय …

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ज्योतिराव फुले : क्यों दलित-आदिवासी-मूलवासी के प्रतीकों को भूल जाती है रघुवर सरकार ?

ज्योतिराव फुले स्त्री मुक्ति के द्योतक

ज्योतिराव फुले स्त्री मुक्ति के द्योतक : क्यों दलित-आदिवासी-मूलवासी के प्रतीकों याद करना भूल जाती है रघुवर सरकार ? ज्योतिराव फुले जी की पूण्यतिथि झारखंड में भी दलित संस्थाओं समेत कई अन्य सस्थानों ने मनाई, लेकिन अचंभित यह है कि झारखंड सरकार ने इन्हें याद करना जरूरी नहीं समझा। यह …

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झारखंड में बिजली की हालत करेगी रघुबर सरकार की बत्ती गुल

झारखंड में बिजली की हालत करेगी रघुबर सरकार की बत्ती गुल

झारखंड में बिजली की हालत  झारखंड में बिजली सुधार के नाम पर रघुबर सरकार लंबी-लंबी फेंकती रही हैं, कभी कहती है कि राज्य के पूरे गांवों में बिजली पहुंचा दी गई है, कभी कहती हैं कि काम जारी है, कभी कहती है कि बिजली की सेवा, नवम्बर तक सामान्य हो जायेगी, …

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जनता की भलाई के जगह अंबानी की भलाई करती मोदी सरकार

जनता की यह कैसी पेहरिदारी

महज चंद दिनों पहले जब प्रधानमन्त्री ने कथित रूप से उत्तर प्रदेश में परियोजनाओं की नींव रखने के क्रम में 50 बड़े पूँजीपतियों को सम्बोधित करते हुए कहा था कि ‘अगर नेक नीयत हो तो उद्योगपतियों के साथ खड़े होने में दाग़ नहीं लगता!’ उस समय पूरी देश की जनता …

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स्त्री मुक्ति के पक्षधर व जाति उन्मूलन आन्दोलन के योद्धा ज्योतिबा फुले

ज्योतिबा फुले

स्त्री मुक्ति के पक्षधर व जाति उन्मूलन आन्दोलन के योद्धा ज्योतिबा फुले आज ज्योतिबा फुले का स्मृतिदिन है। लगभग 169 वर्ष पहले ज्योतिबा फुले ने बालिकाओं के लिए पहला विद्यालय खोलने का निर्णय लिया था। विधवा विवाह का समर्थन, विधवाओं के बाल कटने से रोकने के लिए नाइयों की हड़ताल, …

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त्‍योहार समाज में अमीरों के लिए ‘स्‍टेटस सिंबल’ बनकर रह गये

त्‍योहार

होली-दिवाली-दशहरा---- सभी त्‍योहार समाज में अमीरों के लिए 'स्‍टेटस सिंबल' बनकर रह गये हैं। जिसकी गॉंठ में जितना पैसा, उसका त्‍योहार उतना ही रौशन और रंगीन। आम लोगों के लिए तो त्‍योहार बस भीषण तनाव ही लेकर आते हैं।

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अय्यंकली, फुले, पेरियार के आन्‍दोलनों का एक आलोचनात्‍मक विवेचन video

अय्यंकली, फुले, पेरियार के आन्‍दोलनों

जाति विरोधी आन्‍दोलन के तीन महत्‍वपूर्ण व्‍यक्तित्‍व अय्यंकली, फुले, पेरियार के आन्‍दोलनों का एक आलोचनात्‍मक विवेचन प्रिय साथियो, जाति प्रश्‍न पर हुई वर्कशॉप का आज छठा वीडियो अपलोड किया है। इस वीडियो में आधुनिक भारत के जाति विरोधी आन्‍दोलन के तीन महत्‍वपूर्ण व्‍यक्तित्‍व अय्यंकली, फुले, पेरियार के आन्‍दोलनों का एक …

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क्रान्ति ईश्वर-विरोधी हो सकती है लेकिन मनुष्य-विरोधी नहीं

क्रान्ति

क्रान्ति कोई मायूसी से पैदा हुआ दर्शन भी नहीं और न ही सरफ़रोशों का कोई सिद्धान्त है हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन का घोषणापत्र’ लाहौर कांग्रेस में बाँटे गये इस दस्तावेज़ को भगतसिंह और अन्य साथियों से विचार-विमर्श के बाद मुख्य रूप से भगवतीचरण वोहरा ने लिखा था। दुर्गा भाभी और …

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अछूत का सवाल : शहीद भगतसिंह का जाति के प्रति नजरिया

अछूत का सवाल

अछूत का सवाल : इन लेखों को कहीं आगे फॉरवर्ड करने से पहले खुद जरूर पढ़िए। WhatsApp/facebook पर लोगों की आदत होती है कि कोई अच्छी चीज देखते हैं तो फॉरवर्ड करते हैं और उसके बाद खुद ही भूल जाते हैं। भगत सिंह को सच्ची सलामी यही हो सकती है …

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असेम्बली में क्या वास्तव में बम फेंके गये थे, यदि हाँ तो क्यों?

असेम्बली

28 सितंबर को भारत के महान क्रांतिकारी शहीद भगत सिंह की जयंती है। भगत सिंह भारत के उन चंद क्रांतिकारियों में से हैं जिनका नाम देश का बच्चा बच्चा जानता है। हर चुनावबाज पार्टी भगत सिंह को याद करती है पर क्या सचमुच वो भगत सिंह के सपनों का भारत …

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भगत सिंह । मेरा साथी, मित्र और नेता (एक यादगार पल) : शिव वर्मा

भगत सिंह

एक दिन प्रात: जब मैं कमरे में बैठा कालेज का काम पूरा कर रहा था तो सुना बाहर पड़ोसी से कोई मेरा पता पूछ रहा है। अपना नाम सुनकर मैं बाहर निकल आया, देखा मैला शलवार-कमीज पहने कम्बल ओढ़े एक सिख नौजवान ( भगत सिंह ) सामने खड़ा है- लंबा कद, …

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न्यूजीलैंण्ड के एक लेखक ! भारत में व्यापक रूप से फैंलें भष्टाचार पर -विनोद कुमार

ब्रयान, न्यूजीलैंण्ड

दुनिया के भ्रष्टाचार मुक्त देशों में शीर्ष पर गिने जाने वाले न्यूजीलैंण्ड के एक लेखक ब्रायन ने भारत में व्यापक रूप से फैंलें भष्टाचार पर  एक लेख लिखा है। न्यूजीलैंण्ड का यह लेख सोशल मीडि़या पर काफी वायरल हो रहा है। न्यूजीलैंण्ड के इस लेख की लोकप्रियता और प्रभाव को …

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