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एतिहासिक

एतिहासिक समाचार

हम अपनी पुराकथाओं को भी अपना प्राचीन इतिहास ही मानते हैं; किंतु विद्वानों का एक वर्ग विदेशी सिद्धांतों के अनुसार उसे ‘मिथ’ अथवा ‘मिथ्या’ ही मानना चाहता है। अत: वह उसे अपना इतिहास नहीं मानता। परिणामत: पौराणिक उपन्यासों की, ऐतिहासिक उपन्यासों से एक पृथक् श्रेणी बन गई है। पुराकथाओं को अपना इतिहास मानते हुए भी मैं चाहूँगा कि पौराणिक उपन्यासों का वर्ग ऐतिहासिक उपन्यासों से पृथक् ही रहे। कारण ?

पौराणिक उपन्यास केवल एक काल विशेष की घटनाएँ ही नहीं हैं, उनकी अपनी एक मूल्य-व्यवस्था है। वे उपनिषदों के मूल्यों को चरित्रों के माध्यम से उपन्यास के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। जो उपन्यास पौराणिक काल, घटनाओं और चरित्रों पर आधृत तो हैं, किंतु उस मूल्य-व्यवस्था का अनुमोदन नहीं करते, उन्हें पौराणिक उपन्यास कहना उचित नहीं है। उनमें से अधिकांश तो पौराणिक मूल्य-व्यवस्था से अपरिचित अथवा उनके विरोधी लोगों द्वारा उन्हें ध्वस्त करने के लिए ही लिखे गए हैं।

खरसावाँ गोलीकांड : आजाद भारत का झारखण्डी जलियावाला बाग़ काण्ड

खरसावाँ गोलीकांड

अलग झारखण्ड राज्य के लिए हमारे पूर्वज नौजवानों ने आजाद भारत की सबसे बड़ी शहादत ‘खरसावाँ गोलीकांड’ में दी, जिसे आनेवाली हजारों पीढियां ससम्मान याद करती रहेगी। साथ ही जब भी कभी कोई गलत मंशा से झारखण्ड में कदम रखेगा, खरसावाँ गोलीकांड के शहीदों की राजनीतिक चेतना और समर्पण से …

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ज्योतिराव फुले : क्यों दलित-आदिवासी-मूलवासी के प्रतीकों को भूल जाती है रघुवर सरकार ?

ज्योतिराव फुले स्त्री मुक्ति के द्योतक

ज्योतिराव फुले स्त्री मुक्ति के द्योतक : क्यों दलित-आदिवासी-मूलवासी के प्रतीकों याद करना भूल जाती है रघुवर सरकार ? ज्योतिराव फुले जी की पूण्यतिथि झारखंड में भी दलित संस्थाओं समेत कई अन्य सस्थानों ने मनाई, लेकिन अचंभित यह है कि झारखंड सरकार ने इन्हें याद करना जरूरी नहीं समझा। यह …

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स्त्री मुक्ति के पक्षधर व जाति उन्मूलन आन्दोलन के योद्धा ज्योतिबा फुले

ज्योतिबा फुले

स्त्री मुक्ति के पक्षधर व जाति उन्मूलन आन्दोलन के योद्धा ज्योतिबा फुले आज ज्योतिबा फुले का स्मृतिदिन है। लगभग 169 वर्ष पहले ज्योतिबा फुले ने बालिकाओं के लिए पहला विद्यालय खोलने का निर्णय लिया था। विधवा विवाह का समर्थन, विधवाओं के बाल कटने से रोकने के लिए नाइयों की हड़ताल, …

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अय्यंकली, फुले, पेरियार के आन्‍दोलनों का एक आलोचनात्‍मक विवेचन video

अय्यंकली, फुले, पेरियार के आन्‍दोलनों

जाति विरोधी आन्‍दोलन के तीन महत्‍वपूर्ण व्‍यक्तित्‍व अय्यंकली, फुले, पेरियार के आन्‍दोलनों का एक आलोचनात्‍मक विवेचन प्रिय साथियो, जाति प्रश्‍न पर हुई वर्कशॉप का आज छठा वीडियो अपलोड किया है। इस वीडियो में आधुनिक भारत के जाति विरोधी आन्‍दोलन के तीन महत्‍वपूर्ण व्‍यक्तित्‍व अय्यंकली, फुले, पेरियार के आन्‍दोलनों का एक …

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क्रान्ति ईश्वर-विरोधी हो सकती है लेकिन मनुष्य-विरोधी नहीं

क्रान्ति

क्रान्ति कोई मायूसी से पैदा हुआ दर्शन भी नहीं और न ही सरफ़रोशों का कोई सिद्धान्त है हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन का घोषणापत्र’ लाहौर कांग्रेस में बाँटे गये इस दस्तावेज़ को भगतसिंह और अन्य साथियों से विचार-विमर्श के बाद मुख्य रूप से भगवतीचरण वोहरा ने लिखा था। दुर्गा भाभी और …

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अछूत का सवाल : शहीद भगतसिंह का जाति के प्रति नजरिया

अछूत का सवाल

अछूत का सवाल : इन लेखों को कहीं आगे फॉरवर्ड करने से पहले खुद जरूर पढ़िए। WhatsApp/facebook पर लोगों की आदत होती है कि कोई अच्छी चीज देखते हैं तो फॉरवर्ड करते हैं और उसके बाद खुद ही भूल जाते हैं। भगत सिंह को सच्ची सलामी यही हो सकती है …

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असेम्बली में क्या वास्तव में बम फेंके गये थे, यदि हाँ तो क्यों?

असेम्बली

28 सितंबर को भारत के महान क्रांतिकारी शहीद भगत सिंह की जयंती है। भगत सिंह भारत के उन चंद क्रांतिकारियों में से हैं जिनका नाम देश का बच्चा बच्चा जानता है। हर चुनावबाज पार्टी भगत सिंह को याद करती है पर क्या सचमुच वो भगत सिंह के सपनों का भारत …

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भगत सिंह । मेरा साथी, मित्र और नेता (एक यादगार पल) : शिव वर्मा

भगत सिंह

एक दिन प्रात: जब मैं कमरे में बैठा कालेज का काम पूरा कर रहा था तो सुना बाहर पड़ोसी से कोई मेरा पता पूछ रहा है। अपना नाम सुनकर मैं बाहर निकल आया, देखा मैला शलवार-कमीज पहने कम्बल ओढ़े एक सिख नौजवान ( भगत सिंह ) सामने खड़ा है- लंबा कद, …

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डायनासोर विनाश करने वाले क्षुद्रग्रह के कारण धरती दो वर्षों तक अँधेरे में रही

डायनासोर विनाश

डायनासोर को मारने वाले क्षुद्रग्रह के कारण पृथ्वी दो वर्षों तक अँधेरे में रही थी एक अध्ययन में यह पाया गया है कि, करीब 66 मिलियन वर्ष पहले पहले पृथ्वी पर टकराकर डायनासोर प्रजाति का विनाश करने वाले विशाल क्षुद्रग्रह की वजह से यह धरती करीब दो वर्षों तक अँधेरे में रही थी। क्षुद्रग्रह की वजह से जंगलों में भयानक आग (दावानल) लग …

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युद्ध अभी जारी है…शहीद भगत सिंह राजगुरु सुखदेव का बयान

युद्ध अभी जारी है…

युद्ध अभी जारी है… फाँसी पर लटकाये जाने से 3 दिन पूर्व – 20 मार्च, 1931 को – भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरु ने पंजाब के गवर्नर को यह पत्र भेजकर माँग की थी कि उन्हें युद्ध बन्दी माना जाये तथा फाँसी पर लटकाये जाने के बजाय गोली से उड़ा दिया …

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​आज हमारे राष्ट्र ध्वज तिरंगे का जन्म दिन है

आज हमारे राष्ट्र ध्वज तिरंगे का जन्म दिन है।भारत की आन, बान और शान हमारे तिरंगे को कोटी कोटी सलाम करता हूँ!  “विजयी विश्व तिरंगा प्यारा झंडा ऊँचा रहे हमारा” जय हिन्द – This post was written by sanjay dash. The views expressed here belong to the author and do …

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विलुप्त हो चुकी सरस्वती नदी के बहाव क्षेत्र का कुओं की मदद से पता किया जायेगा

नयी दिल्ली 20 जुलाई (भाषा) विलुप्त हो चुकी सरस्वती नदी के जीर्णोद्धार के लिये हरियाणा सरकार के सरस्वती धरोहर बोर्ड और तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) के बीच आज समझौता किया गया। इसके तहत सरस्वती नदी के प्रवाह मार्ग में ओएनजीसी द्वारा 100 कुंये बनाकर नदी के प्रवाह की …

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ब्रह्माण्ड के रहस्यों को सुलझाने की दिशा में बढ़ा इन्सान का एक और क़दम

सत्यम मनुष्य हमेशा ही ब्रह्माण्ड के रहस्यों को समझने की कोशिश करता रहा है।  हज़ारों साल पहले जब मनुष्य जंगलों में रहता था तब उसे प्रकृति के रहस्य जादू-टोने की तरह लगते थे और वह मौसम बदलने, बिजली गिरने, जीवन और मृत्यु जैसी प्राकृतिक घटनाओं को अदृश्य और जादुई शक्तियों …

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दुनिया की छब्बीस भाषाओं के जानकार राहुल सांकृत्यायन

राहुल सांकृत्यायन सच्चे अर्थों में जनता के लेखक थे। वह आज जैसे कथित प्रगतिशील लेखकों सरीखे नहीं थे जो जनता के जीवन और संघर्षों से अलग-थलग अपने-अपने नेह-नीड़ों में बैठे कागज पर रोशनाई फि़राया करते हैं। जनता के संघर्षों का मोर्चा हो या सामंतों-जमींदारों के शोषण-उत्पीड़न के खिलाफ़ किसानों की …

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हूल दिवस

आज यानीं 30 जून 1855 को झारखण्ड के चार महान क्रांतिकारियों सिद्धू, कान्हू, भैरव, चाँद एवम दो बहनों झानो,फूलो द्वारा अंग्रेजों के खिलाफ संथाल विद्रोह की शुरुवात की गईं थी। संथाल विद्रोह को हूल विद्रोह के नाम से भी जाना जाता है। 30 जून को झारखण्ड सरकार हूल दिवस के …

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भारत छोड़ो आन्दोलन में झारखण्डवासियों की भूमिका : महेश अमन

भारत छोड़ो आन्दोलन

झारखण्डवासियों की भारत छोड़ो आन्दोलन में अहम भूमिका भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में 1942 की क्रांति का अपना एक महत्वपूर्ण स्थान है। इस समय झारखण्ड के कुछ हिस्सों में ऐसी राजनीतिक घटनाएं हुई थी, जिससे अंग्रेजी सरकार के पैरों तले की जमीन खिसकने लगी थी। बर्मा एवं सिंगापुर सीमा पर अंग्रेजी …

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