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ज्योतिराव फुले-स्त्री मुक्ति व जाति उन्मूलन आन्दोलन के मजबूत योद्धा

ज्योतिराव फुले

ज्योतिराव फुले – स्त्री मुक्ति के पक्षधर व जाति उन्मूलन आन्दोलन के मजबूत योद्धा को उनके जन्‍मदिवस पर नमन, जिन्होंने मानवता को पुनर्जीवित करने के लिए अपना तमाम जीवन समर्पित कर दिया। लगभग 170 वर्ष पहले फुले ने बालिकाओं के लिए पहला विद्यालय खोलने का निर्णय लिया था। विधवा विवाह …

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Generic Medicine : जेनेरिक दवाएं आज क्यों बेअसर हो गयी है

generic medicine

आज इलाज के लिए दवाएँ, जाँच की विभिन्न तकनीकें व ऑपरेशन के विकसित तरीक़े मौजूद हैं। ला इलाज बीमारी को छोड़ दें, तो भी इलाजयोग बीमारियों की वजह से हर साल करोड़ों लोग मर रहे हैं। जैसे- इलाज और दवाओं के महँगा होना, सरकार द्वारा सही ढंग से स्वास्थ्य सेवाएँ …

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अन्तराष्ट्रीय दलित खिलाड़ी को क्यों प्रताड़ित कर रही है रघुबर सरकार  

अन्तराष्ट्रीय दलित खिलाड़ी

अन्तराष्ट्रीय दलित खिलाड़ी को प्रताड़ित करती भाजपा  हमारे समाज के चेहरे पर आज भी जाति व्यवस्था और जातिगत उत्पीड़न एक बदनुमा दाग है। साथ ही एक ऐसी त्रासदी भी है जो ख़त्म होने के बजाय भाजपा के शासनकाल में तीव्रता से सड़ाँध मारती दिखती रही। वैसे तो देशभर में दलितों …

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फ़ेक-न्यूज़ व्हाट्सप्प के गलियारे से निकलकर विज्ञान के शोधालय तक पहुंचा

फ़ेक-न्यूज़

फ़ेक-न्यूज़ अब अपना चोला बदलता हुआ  फ़ेक-न्यूज़ यानि झूठ को सच बनाने का खेल, व्हाट्सप्प से निकलकर अब विज्ञान के शोधालय तक का सफ़र तय कर चुका है। आपको याद होगा 2014 में प्रधान-सेवक ने अपने बयान में गणेश जी को प्लास्टिक सर्जरी का पहला उदाहरण बताया था। उसके बाद …

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मौजूदा सत्ता के बूट (जूते) भारतीय संविधान से भी मजबूत

सत्ता के बूट

क्या मौजूदा सत्ता के बूट (जूते) भारतीय संविधान से भी ज्यादा मजबूत हैं  विकास के नाम पर भारत में आज नैतिकता के पतन की जो बेचैनी वर्तमान सत्ता में देखी जा रही है यकीनन ऐतिहासिक है और हिंदुस्तान के गरिमा को कलंकित करती है। कहते हैं कि राजनीति में सत्ता …

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13 पॉइण्ट विभागीय रोस्टर के ख़ि‍लाफ़ देश भर के एससी/एसटी/ओबीसी सड़क पर

आज के मौजूदा भाजपा सरकार में ‘रोस्टर’ शब्द भी दफ्तरों से निकल कर सड़कों पर ठुमके लगा रहा है। 13 पॉइण्ट विभागीय रोस्टर सिस्टम के ख़ि‍लाफ़ पुरे देश भर में एससी/एसटी/ओबीसी व बुद्धिजीवी आन्दोलन कर रहे हैं। ऐसे में इसके पहलुओं को समझना बेहद ज़रूरी हो जाता है। आरक्षण के …

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घरेलू मज़दूरों को आखिर न्याय कब देगी यह सरकार

घरेलू मज़दूरों

सोशल अलर्ट की 2008 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार देश भर में घरेलू मज़दूरों की कुल संख्या 10 करोड़ के क़रीब थी। जो कि बढ़ते शहरीकरण के वजह से अबतक लगभग तीगुनी हो गयी होगी। इसमें अधिक संख्या औरतों की है, साथ ही निसंदेह लाखों बच्चे भी शामिल हैं। …

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युद्ध की ज़रूरत जितनी मोदी को है उतनी ही इमरान खान को भी

युद्ध की ज़रूरत

युद्ध की ज़रूरत फासीवादी सरकारों को क्यों  आज सीमित युद्ध की ज़रूरत जितनी भाजपा-मोदी को है उतनी ही इमरान खान को भी है। उसके पॉपुलिस्ट नारों की भी हवा मोदी के जुमलों की तरह चन्द महीनों में ही निकल गयी है। आवाम अब उसे सेना की कठपुतली समझती है। भारत …

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आदिवासियों-मूलवासियों के साथ भाजपा ने फिर किया विश्वासघात

आदिवासियों-मूलवासियों

आदिवासियों-मूलवासियों के साथ ऐसा क्यों किया इस सरकार ने  देश में पुलवामा आतंकी हमले की घटना के बाद जो कुछ हो रहा है उस पर ठीक से विचार करते हुए आग्रह है कि वह इस लेख को ध्यान से पढ़ें और विचार करें। सेक्युलर, तरक्की पसंद, लोकतांत्रिक चेतना वाले नागरिकों …

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खरसावाँ गोलीकांड : आजाद भारत का झारखण्डी जलियावाला बाग़ काण्ड

खरसावाँ गोलीकांड

अलग झारखण्ड राज्य के लिए हमारे पूर्वज नौजवानों ने आजाद भारत की सबसे बड़ी शहादत ‘खरसावाँ गोलीकांड’ में दी, जिसे आनेवाली हजारों पीढियां ससम्मान याद करती रहेगी। साथ ही जब भी कभी कोई गलत मंशा से झारखण्ड में कदम रखेगा, खरसावाँ गोलीकांड के शहीदों की राजनीतिक चेतना और समर्पण से …

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आदिम जनजातियां हासिये पर: इनके हक़ के लिए बुलंद आवाज की जरूरत!

आदिम

वर्तमान झारखंड में अनुसूचित जनजाति की सूची के अंतर्गत 32 जनजातियों में से 9 आदिम जनजाति की श्रेणी में आते हैं। झारखंड में 1961 के दशक में इन जनजातियों का आबादी करीब 2,50,000 थी जो वर्तमान घटकर महज 2,00,000 के भीतर रह गई है। अद्यतन आंकड़े के अनुसार इस समय …

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ज्योतिराव फुले : क्यों दलित-आदिवासी-मूलवासी के प्रतीकों को भूल जाती है रघुवर सरकार ?

ज्योतिराव फुले स्त्री मुक्ति के द्योतक

ज्योतिराव फुले स्त्री मुक्ति के द्योतक : क्यों दलित-आदिवासी-मूलवासी के प्रतीकों याद करना भूल जाती है रघुवर सरकार ? ज्योतिराव फुले जी की पूण्यतिथि झारखंड में भी दलित संस्थाओं समेत कई अन्य सस्थानों ने मनाई, लेकिन अचंभित यह है कि झारखंड सरकार ने इन्हें याद करना जरूरी नहीं समझा। यह …

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जनता की भलाई के जगह अंबानी की भलाई करती मोदी सरकार

जनता की यह कैसी पेहरिदारी

महज चंद दिनों पहले जब प्रधानमन्त्री ने कथित रूप से उत्तर प्रदेश में परियोजनाओं की नींव रखने के क्रम में 50 बड़े पूँजीपतियों को सम्बोधित करते हुए कहा था कि ‘अगर नेक नीयत हो तो उद्योगपतियों के साथ खड़े होने में दाग़ नहीं लगता!’ उस समय पूरी देश की जनता …

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मोदी युग में जीवनस्तर में वृधि के पैमाने के हर स्तर पर देश पिछड़ा

मोदी युग अर्थव्यवस्था

मोदी सरकार का एजेण्डा बिल्कुल साफ़ है कि लोग आपस में बँटकर लड़ते-मरते रहें और वे अपने पूँजीपति मालिकों की तिजोरियाँ भरते रहें।

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बेरोज़गार हैं 40 प्रतिशत, कौन है इसका जि़म्मेदार? -मुनीश मैन्दोला

बेरोज़गार हैं 40 प्रतिशत

सरकार का 2 करोड़ प्रति वर्ष नयी नौकरियों के सृजन का वादा भी ”रामराज्य” वाली  सरकार के हर वादे की तरह झूठा निकला! खोदा पहाड़, निकला कॉक्रोच! केन्द्रीय श्रम मन्त्री बण्डारू दत्तात्रेय ने 6 फ़रवरी 2017 को लोकसभा में बताया कि 2013-14 में बेरोज़गारी की दर 3.4 प्रतिशत थी जो …

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इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रों का BHU छात्राओं के समर्थन में बड़ा आगाज

इलाहाबाद विश्वविद्यालय

BHU छात्राओं के समर्थन में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रों ने किया बड़ा आगाज। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में अपने हक़ की लड़ाई लड़ रही छात्राओं के ऊपर जिस तरह से विश्वविद्यालय प्रशासन ने इतनी बेरहमी से लाठीचार्ज किया यह इस बात का गवाह है कि अब केंद्र सरकार, राज्य सरकार तथा …

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गोरखालैंड की मांग को लेकर दार्जिलिंग में चल रहा आंदोलन उग्र

गोरखालैंड

क्या है गोरखा विवाद? अलग गोरखालैंड की मांग क्यों? पिछले कई दिनों से अलग गोरखालैंड की मांग को लेकर दार्जिलिंग में चल रहा आंदोलन उग्र होता जा रहा है। पश्चिम बंगाल के पहाड़ी इलाके में गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहा है। एक अलग गोरखालैंड राज्य की मांग बहुत पुरानी है …

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राइट टू प्राइवेसी : निजता लोगों का अधिकार है, उल्‍लंघन ना हो : अंबेडकर -मुकेश सिंह

राइट टू प्राइवेसी

राइट टू प्राइवेसी (निजता का अधिकार) एक मौलिक अधिकार है: सुप्रीम कोर्ट एक बेहद अहम फैसले के तौर पर सुप्रीम कोर्ट ने निजता के अधिकार, यानी राइट टू प्राइवेसी को मौलिक अधिकारों, यानी फन्डामेंटल राइट्स का हिस्सा करार दिया है। कोर्ट का यह फैसला देश के हर नागिरक को प्रत्यक्ष …

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जम्‍मू-कश्‍मीर में अनुच्छेद 35 ए को हटाने की खबरों से राजनीतिक उथल पुथल

जम्‍मू-कश्‍मीर में अनुच्छेद 35 ए

जम्‍मू-कश्‍मीर राज्य में अनुच्छेद 35 ए को हटाने की खबरों से राजनीतिक उथल पुथल का माहौल हो गया है। जम्मू कश्मीर के कटटरपंथियों के साथ-साथ राजनीतिक दल भी इसके विरुद्ध लामबंद हो गए हैं। आइये इस विवादित अनुच्छेद के बारे में विस्तार से जानें: जम्‍मू-कश्‍मीर को भारत के विशेष राज्य …

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छेड़खानी की घटनाओं के विरोध में पिंजड़ा तोड़ ग्रूप द्वारा अभियान की शुरुआत

छेड़खानी की घटनाओं के विरोध में पिंजड़ा तोड़ अभियान

छेड़खानी की घटनाओं के विरोध में पिंजड़ा तोड़ अभियान पटना में की शुरुआत पटना में आये दिन सड़कों पर, विश्वविद्यालय परिसर में, कोचिंग संस्थानों में होती छेड़खानी की घटनाओं के विरोध में पिंजड़ा तोड़ ग्रूप द्वारा एक माँगपत्रक अभियान की शुरुआत की गयी जिसमेंं पिंजड़ा तोड़ ग्रूप ने विभिन्न कॉलेजों, कोचिंग …

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