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अमित कुमार

amit kumar personal article

शरीर गलाकर, पेट काटकर जी रहे हैं मज़दूर

सरकारी आँकड़ों में दावा किया जाता है कि देश के ग़रीबों को भी पहले से बेहतर खाना मिलने लगा है। इन दावों के झूठ की पोल खोलने के लिए बहुत-से अर्थशास्त्री दूसरे आँकड़े भी पेश करते हैं जो बताते हैं कि पिछले बीस वर्षों में जबसे देश में ”विकास” का …

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‘धीमी मौत’ – ये कविता पाब्लो नेरूदा नहीं बल्कि ब्राज़ीलियन कवयित्री मार्था मेदेइरोस की है

धीमी मौत कविता काफी प्रचलित है। इण्टरनेट पर अक्सर पाब्बल रूदा के नाम से शेयर होने वाली ये कविता असल में ब्राज़ीलियन कवयित्री मार्था मेदेइरोस की है। आगे से आप भी अगर धीमी मौत कविता शेयर करते हैं तो वहां कवि का नाम सही कर लें। हिन्दी में इसके कई …

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ड्राईवर मुसलमान नहीं हिन्दु था, नहीं नहीं ड्राईवर तो मुसलमान हीं था.. लेकिन ड्राईवर का नाम सलीम है.. मैं कहता हूं की ड्राईवर का नाम हर्ष है.!

अमित कुमार, गुजरात| हिन्दू- मुसलमान, सेकुलर वामपंथी सब के सब कन्फ्यूज हैं कि बस का ड्राईवर कौन है, और अभी तक कोई भी सही नहीं बता सका है कि आखिर ड्राईवर हिन्दु है की मुसलमान है.. ?   मेरा मानना है की ड्राईवर कोई भी हो उससे क्या फर्क पड़ता …

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जब मुफ्त में नमक नहीं मिलता, कोई करोड़ों की पूंजी लगाकर मुफ्त का अखबार और समाचार क्यों देता है?

आप दुकानदार से नमक मांगते हैं, आप उम्मीद करते हैं आपको नमक ही मिलेगा। आप नमक खरीदने दुकान जाते हैं। दुकान में नमक नहीं हो तो आप क्या करते हैं? मैं दूसरी दुकान जाता हूं। आप भी ऐसा ही करते होंगें। आप जब कभी नमक लेने जाएं, और आपको नमक …

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वामपंथ को अपना दुश्मन मानना छोड़ें अंबेडकरवादी !

अंबेडकरवादी अपना सबसे बड़ा दुश्मन वामपंथीयों को मानते हैं, आए दिन सोसल मिडिया पर अपना भड़ास निकालते रहते हैं वामपंथीयों के खिलाफ, लेकिन जब कोई मुसीबत आती है, या संघ समर्थीत केन्द्र सरकार द्वारा किसी अंबेडकरवादी नेता को गैर कानूनी तरीके से प्रताड़ीत करती तब अंबेडकरवादी लोग वामपंथीयों से कहने …

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दिल्ली से बल्लभगढ़ जा रहे एक मुसलमान लड़के को भीड़ ने पीट पीट कर मार डाला

गुरुवार की रात दिल्ली से बल्लभगढ़ जा रहे एक 16 साल के एक मुसलमान लड़के को लोकल ट्रेन में भीड़ ने पीट पीट कर मार डाला. मारे गए जुनैद के साथ उसके दो भाई और दो दोस्त भी थे, उन्हें भी चोटें आई हैं. घटना बीते गुरुवार रात की है. …

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क्‍या आपने हिन्‍दी के प्रसिद्ध लेखक मुंशी प्रेमचन्‍द की ‘ईदगाह’ कहानी पढ़ी है। अगर नहीं तो यहां पढ़ें –

रमजान के पूरे तीस रोजों के बाद ईद आयी है। कितना मनोहर, कितना सुहावना प्रभाव है। वृक्षों पर अजीब हरियाली है, खेतों में कुछ अजीब रौनक है, आसमान पर कुछ अजीब लालिमा है। आज का सूर्य देखो, कितना प्यारा, कितना शीतल है, यानी संसार को ईद की बधाई दे रहा …

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