Breaking News
Home / व्यंग्य

व्यंग्य

critics

प्रगति की पेंटिंग में विकास को देखना, एक व्यंग्य… दुर्गेश यादव”गुलशन”

विकास

विकास विकास न हुआ, रीतिकालीन नायिका का 'कंगना' हो गया है जिसे वह नदिया किनारे गुमा आई है और गा गाकर ना मिल पाने की व्यथा व्यक्त कर रही है ।

Read More »

प्रणाम : चारेां महानुभावों को मेरा प्रणाम! –उदयमोहन पाठक (अधिवक्ता)

प्रणाम

एक किसान कही जा रहा था। रास्ते में उसे चार आदमी मिले। किसान ने उन्हें स्वभाववश प्रणाम किया और आगे बढ़ गया। कुछ आगे बढ़ते ही चारों यह कहकर आपस में लड़ने लगे कि किसान ने मात्र उसे प्रणाम किया। उन्होंने किसान को बुलाकर पूछा भाई तुमने किसे प्रणाम किया? …

Read More »

कमजोर : विश्‍व प्रसिद्ध कथाकार अंतोन चेखव की लघुकथा …(हिसाब चुकता)

कमजोर

कमजोर : आज मैं अपने बच्चों की अध्यापिका यूलिमा वार्सीयेव्जा का हिसाब चुकता करना चाहता था। ”बैठ जाओ, यूलिमा वार्सीयेव्जा।” मेंने उससे कहा, ”तुम्हारा हिसाब चुकता कर दिया जाए। हाँ, तो फैसला हुआ था कि तुम्हें महीने के तीस रूबल मिलेंगे, हैं न?” ”नहीं,चालीस।” ”नहीं तीस। तुम हमारे यहाँ दो …

Read More »

हर साल की भांति इस साल भी (व्यंग्य) –उदयमोहन पाठक (अधिवक्ता)

हर साल की भांति इस साल भी

हर साल की भांति इस साल भी यह संवाद सूनते-सुनते अरसा गुजर गया। कभी उकताहट होती है कि लोग इसे बदलते क्यों नहीं? एक जगह ग्रामीण मेला लगा हुआ था। मेले में ही माइॅक से आवाज गूँज रही थी। ‘‘ हर साल की भांति इस साल भी’ सुनकर अच्छा लगा …

Read More »

शार्क और छोटी मछलियां : धर्मं भी अवश्य होगा… बेर्टोल्‍ट ब्रेष्ट की लघुकथा

शार्क और छोटी मछलियां

“यदि शार्क मनुष्‍य हो जाएं तो क्‍या वे छोटी मछलियों से भला व्‍यवहार करेंगी?” श्रीयुत के. की मकानमालकिन की छोटी पुत्री ने उनसे पूछा। ‘अवश्‍य’, उसने उत्‍तर दिया, यदि शार्क मनुष्‍य हो जाएं तो वे छोटी मछलियों के लिए मजबूत बक्‍से बनवा देंगी। उन बक्‍सों में वे सब प्रकार के …

Read More »

ढूंढते रह जाओगे… (अपनी छोटी-बड़ी समस्यायों के समाधान) -उदय मोहन पाठक

ढूंढते रह जाओगे...

ढूंढते रह जाओगे… दस-दस फीट के दस गड्ढे खेादने के बजाय एक सौ फीट का कुआॅं खोद लो, पानी जरूर मिलेगा। अन्यथा छोटे-छोटे गड्ढों में पानी ढूॅंढ़ते रह जाओगे कम उम्र से ही लोग अपनी छोटी-बड़ी समस्या के समाधान के लिए ईश्वर को ढूंढते रहते हैंं, शायद कभी किसी समस्या …

Read More »

दो नाक वाले लोग –प्रसिद्ध व्‍यंग्‍यकार हरिशंकर परसाई की कलम से

दो नाक वाले व्यंग (हरिशंकर परसाई)

दो नाक वाले लोग: मैं उन्हें समझा रहा था कि लड़की की शादी में टीमटाम में व्यर्थ खर्च मत करो। पर वे बुजुर्ग कह रहे थे- आप ठीक कहते हैं, मगर रिश्तेदारों में नाक कट जाएगी।   नाक उनकी काफी लंबी थी। मेरा ख्याल है, नाक की हिफाजत सबसे ज्यादा …

Read More »

कालिख से पुते हुए सभ्य चेहरे

तीसमार खाँन एक स्पेशल मिसन की पूर्ति के लिए घोटाले द्वीप के दौरे पर निकले थे।वहाँ पहुँचने पर लोगों ने पूरे तामझाम से स्वाग़त किया। पहले दिन वे घोटाले द्वीप के बाजार निकले,देखा लोग विभिन्न प्रकार के मुखौटे बेच रहे थे।सभी मुखौटे काले थे।दुकानदार चिल्ला-चिल्ला कर बेच रहे थे,”घोटाला ले …

Read More »

उसकी जुबान पर सिर्फ रोटी लिखा है

न खाने पर लिखा है…न पानी पर लिखा है… न हवा पर लिखा है….न कफ़न पर लिखा है… तू हिन्दू है…या मुसलमान है….जाके किसी भूखे प्यासे से पूछ ! तेरा धर्म क्या है…? उसकी जुबान पर सिर्फ रोटी लिखा है….। This post was written by sanjay dash. The views expressed here …

Read More »

अंधविश्वास देश व विज्ञान के लिए जहर है

समाज को अंधकार व अंधविश्वास के गर्त में ढकेलने का जिम्मेदार भी पुरोहित वर्ग ही है।कौटिल्य ने अपने अर्थशास्त्र में लिखा कि रात में मंदिर या सिद्ध स्थान पर कोई चमत्कारिक घटना खडी करके यात्रा या समाज मे लगवाकर उससे धन कमावे।वृक्ष में किसी मनुष्य को छिपाकर उससे राक्षस का …

Read More »

सत्य समाज में बहिष्कृत जीवन जीता रहा है 

दस ब्राह्मण जा रहे थे.. सफर करते करते थक गए पर भोजन नही मिला,,, और जिंदा रहने के लिए भोजन बहुत जरूरी था….. तभी एक कौआ आया जिसे मारकर खाने का प्लान बना.. उसमे एक सच्चे ब्राह्मण ने विरोध किया और धमकी दी कि अगर आप लोगो ने कौआ का …

Read More »

सहज व्यापार : यह व्यवसाय बहुत ही लाभप्रद है – उदयमोहन पाठक (अधिवक्ता)

सहज व्यापार

सहज व्यापार : एक सज्जन हाल में ही गुरु-दीक्षा लेकर आए। दो-चार सप्ताह तक उनमें शिष्यत्व का भाव रहा। एक सच्चे सेवक की भाँति, जो भी उनके समीप जाता, उसके समक्ष गुरुवचन की थाली परोस देते। जब उन्हें पता चला कि उनके करीबी लोग उनकी बातों से प्रभावित हो रहे …

Read More »

फिर भी जीना सीख लिया : क्या तुम जिन्दा हो? -उदयमोहन पाठक, अधिवक्ता

फिर भी जीना सीख लिया

फिर भी जीना सीख लिया : मुझे जिन्दा देखकर वे सहम गए। बोले, क्या तुम वाकई जिन्दा हो? मैंने कहा कोई शक। बोले यकीन नहीं होता। मैंने तुम्हारे जीने के सारे रास्ते बंद कर दिये। तुम्हारी कमाई और महंगाई के बीच बड़ा फासला बनाया, तुम्हें रोजगार से विमुख किया ताकि …

Read More »