Breaking News
Home / साहित्य

साहित्य

litrature

कमजोर : विश्‍व प्रसिद्ध कथाकार अंतोन चेखव की लघुकथा …(हिसाब चुकता)

कमजोर

कमजोर : आज मैं अपने बच्चों की अध्यापिका यूलिमा वार्सीयेव्जा का हिसाब चुकता करना चाहता था। ”बैठ जाओ, यूलिमा वार्सीयेव्जा।” मेंने उससे कहा, ”तुम्हारा हिसाब चुकता कर दिया जाए। हाँ, तो फैसला हुआ था कि तुम्हें महीने के तीस रूबल मिलेंगे, हैं न?” ”नहीं,चालीस।” ”नहीं तीस। तुम हमारे यहाँ दो …

Read More »

हे नारद, मेरी सुनो (कविता) – उदय मोहन पाठक (अधिवक्ता)

हे नारद

हे नारद ‘ : आजादी के इतने वर्ष बीत जाने जाने के बाद भी जब शोषित, पीड़ित, गरीब, लोगों को देखता हूँ तो मन में एक भाव आता है कि कोई ऐसा बहुजन हिताय कार्य करने वाला मसीहा अवतरित हो जो इनके पीड़ा को हर ले और समाज में समानता …

Read More »

धर्म की क्षय : तुम्हारे धर्म की क्षय-महाविद्रोही राहुल सांकृत्यायन का लेख

धर्म की क्षय

राहुल सांकृत्यायन की ये (तुम्‍हारी क्षय) पुस्‍तक, लेख का एक हिस्‍सा (तुम्‍हारे धर्म की क्षय) यहां दिया जा रहा है वैसे तो धर्मों में आपस में मतभेद है। एक पूरब मुँह करके पूजा करने का विधान करता है, तो दूसरा पश्चिम की ओर। एक सिर पर कुछ बाल बढ़ाना चाहता …

Read More »

मुंशी प्रेमचंद : उनका समय और हमारा समय : निरंतरता और परिवर्तन के द्वंद्व

मुंशी प्रेमचंद , उनका समय और हमारा समय

मुंशी प्रेमचंद को जानने के लिए ये लेख जरूर पढ़ें (…कविता कृष्‍णपल्‍लवी) मुंशी प्रेमचंद की 300 से अधिक कहानियों में से कम से कम 20 तो ऐसी हैं ही, जिनकी गणना विश्व की श्रेष्ठतम कहानियों में की जा सकती है और जिनकी बदौलत उनका स्थान मोपासां, चेखोव आदि श्रेष्ठतम कथाकारों …

Read More »

हल्कू ने आकर स्त्री से कहा… कथा सम्राट प्रेमचंद के जन्‍मदिवस 31 जुलाई

हल्कू ने आकर स्त्री से कहा...

 (हल्कू ने आकर स्त्री से कहा…)  “पूस की रात” हल्कू ने आकर स्त्री से कहा- सहना आया है, लाओ, जो रुपये रखे हैं, उसे दे दूं, किसी तरह गला तो छूटे. प्रेमचंद का लेखन और उनकी रचनाएं जितनी प्रासंगिक उस समय में थीं, जब वह रची गईं, उतनी ही आज …

Read More »

बच्चो को परिवार का महत्व समझाओ

एक पार्क मे दो बुजुर्ग बैठे बातें कर रहे थे..! पहला :– मेरी एक पोती है..! शादी के लायक है..! BA किया है..! job करती है..! कद -5″2 इंच है..! सूंदर है..! कोई लड़का नजर में हो तो बताइएगा..! दूसरा :– ” आपकी पोती को किस तरह का परिवार चाहिए..? …

Read More »

फेयरवेल पार्टी

  “ओफ्फो आकाश तुम मुझे घूरना बंद करो।” “एक तो साड़ी में तुम ऐसा क़यामत ढा रही हो और कहती हो..” “देखो ऐसे वाहियात शब्द मेरे लिए मत कहा करो।” “अरे तुम तो गुस्सा हो गयी। मेरा मतलब तो ये था कि तुम बहुत सुंदर लग रही हो।” स्कूल की …

Read More »

ब्रह्माण्ड के रहस्यों को सुलझाने की दिशा में बढ़ा इन्सान का एक और क़दम

सत्यम मनुष्य हमेशा ही ब्रह्माण्ड के रहस्यों को समझने की कोशिश करता रहा है।  हज़ारों साल पहले जब मनुष्य जंगलों में रहता था तब उसे प्रकृति के रहस्य जादू-टोने की तरह लगते थे और वह मौसम बदलने, बिजली गिरने, जीवन और मृत्यु जैसी प्राकृतिक घटनाओं को अदृश्य और जादुई शक्तियों …

Read More »

साम्प्रदायिकता और संस्कृति

साम्प्रदायिकता सदैव संस्कृति की दुहाई दिया करती है। उसे अपने असली रूप में निकलने में शायद लज्जा आती है, इसलिए वह उस गधे की भाँति जो सिंह की खाल ओढ़कर जंगल में जानवरों पर रोब जमाता फिरता था, संस्कृति का खोल ओढ़कर आती है। हिन्दू अपनी संस्कृति को कयामत तक …

Read More »

‘हम भ्रम की चादर फैलाते हैं…’

हावर्ड फास्ट के प्रसिद्ध उपन्यास ‘आदिविद्रोही’ का एक अंश  उपन्यास के इस प्रसंग में सिसेरो और ग्रैकस नामक दो रोमनों की बातचीत है। ये दोनों गुलामों पर टिके रोमन साम्राज्य की सत्ता के दो स्तम्भ थे। सिसेरो दास व्यवस्था का समर्थन करने वाला विचारक और प्रखर वक्ता था और ग्रैकस …

Read More »

राहुल सांकृत्यायन का लेख – तुम्हारी जात-पाँत की क्षय

हमारे देश को जिन बातों पर अभिमान है, उनमें जात-पाँत भी एक है। दूसरे मुल्कों में जात-पाँत का भेद समझा जाता है भाषा के भेद से, रंग के भेद से। हमारे यहाँ एक ही भाषा बोलने वाले, एक ही रंग के आदमियों की भिन्न-भिन्न जातें होती हैं। यह अनोखा जाति-भेद …

Read More »

दुनिया की छब्बीस भाषाओं के जानकार राहुल सांकृत्यायन

राहुल सांकृत्यायन सच्चे अर्थों में जनता के लेखक थे। वह आज जैसे कथित प्रगतिशील लेखकों सरीखे नहीं थे जो जनता के जीवन और संघर्षों से अलग-थलग अपने-अपने नेह-नीड़ों में बैठे कागज पर रोशनाई फि़राया करते हैं। जनता के संघर्षों का मोर्चा हो या सामंतों-जमींदारों के शोषण-उत्पीड़न के खिलाफ़ किसानों की …

Read More »

एक लड़की के लिए मूल अधिकार पाना दुश्वार

शिक्षा मूल अधिकारो में से एक है। हमारा संविधान यह अधिकार हर लिंग, जाती और धर्म के लोगो को सामान रूप से देता है। स्त्रियों को भी यह अधिकार है परंतु उन्हें अपने इस अधिकार को पाने के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ता है। जिन बच्चियों को माँ बाप उच्च …

Read More »

क्‍या आपने हिन्‍दी के प्रसिद्ध लेखक मुंशी प्रेमचन्‍द की ‘ईदगाह’ कहानी पढ़ी है। अगर नहीं तो यहां पढ़ें –

रमजान के पूरे तीस रोजों के बाद ईद आयी है। कितना मनोहर, कितना सुहावना प्रभाव है। वृक्षों पर अजीब हरियाली है, खेतों में कुछ अजीब रौनक है, आसमान पर कुछ अजीब लालिमा है। आज का सूर्य देखो, कितना प्यारा, कितना शीतल है, यानी संसार को ईद की बधाई दे रहा …

Read More »